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मां कूष्मांडा की पूजा कर मालपुआ का भोग लगाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में मां भद्रकाली को गुलाबी वस्त्रों से सजाकर कूष्मांडा स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। सुबह छह बजे मंदिर की मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने मां भद्रकाली की मंगला आरती की। इसमें अतुल शर्मा परिवार मुख्य यज्ञमान रहा। स्नान के बाद पूजा अर्चना के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ व कुम्हड़ा अर्पित किया गया। इसे बाद मंत्रों का जाप कर मां को अतिप्रिय मालपुआ का भोग लगाया गया।
मंगला आरती से पूर्व ही भक्त मां के दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर में जमा हो गए थे। गर्मी व तेज धूप की परवाह किए बगैर लाइनों में लगे भक्त जय माता दी और जय मां भद्रकाली का जयघोष करके एक-दूसरे का मनोबल बढ़ा रहे थे। सेवादार लाइनों में लगे भक्तों के लिए जल की सेवा कर रहे थे। मंदिर में शक्ति त्रिशूल पर भी मन्नत का धागा बांधने वालों की भारी भीड़ लगी रही। घर में आशीर्वाद स्वरूप मां का लाल ध्वज व जगराता कराने वाले भक्त मां की पवित्र ज्योति ले जाने वाले भक्त भी बड़ी संख्या में शक्तिपीठ पहुंचे।
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की रचनाकार कहा गया है। इनकी आठ भुजाएं हैं । इनके सात हाथों में कमंडल, धनुष ,बाण, कमल पुष्प ,कलश, चक्र और गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियां और निधियों को देने वाली माला है। देवी के हाथों में अमृत कलश भक्तों को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य का प्रदान करने वाला है। मां की सवारी सिंह हैं, जो धर्म का प्रतीक है।
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उन्होंने बताया कि भागवत पुराण के अनुसार माता कूष्मांडा का यह स्वरूप देवी पार्वती के विवाह के बाद से लेकर कार्तिकेय के जन्म के बीच का है। इस रूप में देवी संपूर्ण सृष्टि को धारण करने वाली है। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वालों भक्तों को मां की उपासना करनी चाहिए। देवी के इस स्वरूप की उपासना से समस्त रोग व शोक नष्ट हो जाते हैं।
वहीं नवरात्र व्रत भंडारा दोपहर 12 बजे रामकुमार व अन्नपूर्णा भंडारा सिमरन की ओर आयोजित किया गया। भजन संध्या में अशोक कौशिक हरियाणवी ने भक्तों को भक्ति में लीन कर दिया। मंगलवार होने के कारण हनुमान जी के भजन भी सुनाए गए। शाम सात बजे 505 ज्योति से महाआरती में कन्या पूजन, नव दुर्गा पूजन व भारत माता पूजन किया गया। महाआरती का समापन हनुमान चालीसा के साथ हुआ। सोमवार देर रात उपायुक्त मुकुल कुमार व एसपी डॉ. अंशु सिंगला ने मां के दरबार में माथा टेका।
जगराते को लेकर हुई बैठक
दुर्गाष्टमी पर होने वाले जगराते को मंदिर परिसर में बैठक हुई। इसमें व्यवस्था के लिए सेवादारों की ड्यूटियां लगाई गईं। साथ ही मंदिर का सुंदरीकरण करने पर भी विचार विमर्श किया गया। बैठक में नरेंद्र वालिया, हेमराज शर्मा, धर्मपाल गोयल, मीना जोशी, शकुंतला देवी, निकुंज शर्मा, देवेंद्र गर्ग, रामपाल लाठर, सुनील वर्मा, हाकम चौधरी आदि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में मां भद्रकाली को गुलाबी वस्त्रों से सजाकर कूष्मांडा स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। सुबह छह बजे मंदिर की मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने मां भद्रकाली की मंगला आरती की। इसमें अतुल शर्मा परिवार मुख्य यज्ञमान रहा। स्नान के बाद पूजा अर्चना के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ व कुम्हड़ा अर्पित किया गया। इसे बाद मंत्रों का जाप कर मां को अतिप्रिय मालपुआ का भोग लगाया गया।
मंगला आरती से पूर्व ही भक्त मां के दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर में जमा हो गए थे। गर्मी व तेज धूप की परवाह किए बगैर लाइनों में लगे भक्त जय माता दी और जय मां भद्रकाली का जयघोष करके एक-दूसरे का मनोबल बढ़ा रहे थे। सेवादार लाइनों में लगे भक्तों के लिए जल की सेवा कर रहे थे। मंदिर में शक्ति त्रिशूल पर भी मन्नत का धागा बांधने वालों की भारी भीड़ लगी रही। घर में आशीर्वाद स्वरूप मां का लाल ध्वज व जगराता कराने वाले भक्त मां की पवित्र ज्योति ले जाने वाले भक्त भी बड़ी संख्या में शक्तिपीठ पहुंचे।
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पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की रचनाकार कहा गया है। इनकी आठ भुजाएं हैं । इनके सात हाथों में कमंडल, धनुष ,बाण, कमल पुष्प ,कलश, चक्र और गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियां और निधियों को देने वाली माला है। देवी के हाथों में अमृत कलश भक्तों को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य का प्रदान करने वाला है। मां की सवारी सिंह हैं, जो धर्म का प्रतीक है।
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उन्होंने बताया कि भागवत पुराण के अनुसार माता कूष्मांडा का यह स्वरूप देवी पार्वती के विवाह के बाद से लेकर कार्तिकेय के जन्म के बीच का है। इस रूप में देवी संपूर्ण सृष्टि को धारण करने वाली है। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वालों भक्तों को मां की उपासना करनी चाहिए। देवी के इस स्वरूप की उपासना से समस्त रोग व शोक नष्ट हो जाते हैं।
वहीं नवरात्र व्रत भंडारा दोपहर 12 बजे रामकुमार व अन्नपूर्णा भंडारा सिमरन की ओर आयोजित किया गया। भजन संध्या में अशोक कौशिक हरियाणवी ने भक्तों को भक्ति में लीन कर दिया। मंगलवार होने के कारण हनुमान जी के भजन भी सुनाए गए। शाम सात बजे 505 ज्योति से महाआरती में कन्या पूजन, नव दुर्गा पूजन व भारत माता पूजन किया गया। महाआरती का समापन हनुमान चालीसा के साथ हुआ। सोमवार देर रात उपायुक्त मुकुल कुमार व एसपी डॉ. अंशु सिंगला ने मां के दरबार में माथा टेका।
जगराते को लेकर हुई बैठक
दुर्गाष्टमी पर होने वाले जगराते को मंदिर परिसर में बैठक हुई। इसमें व्यवस्था के लिए सेवादारों की ड्यूटियां लगाई गईं। साथ ही मंदिर का सुंदरीकरण करने पर भी विचार विमर्श किया गया। बैठक में नरेंद्र वालिया, हेमराज शर्मा, धर्मपाल गोयल, मीना जोशी, शकुंतला देवी, निकुंज शर्मा, देवेंद्र गर्ग, रामपाल लाठर, सुनील वर्मा, हाकम चौधरी आदि मौजूद रहे।

श्री देवी कूप भद्रकाली मंदिर में मां के दर्शन करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : Kurukshetra