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वर्ल्ड ऑटिज्म डे ः बच्चा आंखें मिलाकर बात न करे तो रहें सतर्क

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 02:21 AM IST
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World Autism Day: Be alert if the child does not talk with eyes, Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। अगर बच्चा आंखें मिलाकर बात नहीं कर रहा या फिर एकांत में रहने के साथ बोलने में भी दिक्कत महसूस करता है तो अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि बच्चा ऑटिज्म बीमारी (मानसिक विकार) से पीड़ित हो सकता है। जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग और शहर के निजी अस्पतालों में हर माह ऑटिज्म से पीड़ित 10-12 नए मरीज मिल रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को ट्रेेनिंग जी जा सकती है। लेकिन बिल्कुल ठीक नहीं किया जा सकता।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र परूथी का कहना है कि यह एक गंभीर विकासात्मक विकार है, जो संवाद करने और बातचीत करने की क्षमता को बाधित करता है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और प्रभावित व्यक्ति के समग्र संज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 700 में से लगभग एक बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) की संभावना होती है। लड़कियों की तुलना में लड़कों में ऑटिज्म होने की संभावना चार गुना अधिक होती है। कई कारणों के चलते बच्चों के दिमाग का विकास बाधित हो सकता है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों में ऑटिज्म के लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए।
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ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का दिमाग कम करता है काम : डॉ. सुरेंद्र
जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढाण ने बताया कि ऑटिज्म के रोगी को मिर्गी के दौरे भी पड़ सकते हैं। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का दिमाग अन्य बच्चों की तुलना में कम काम करता है। ऐसे में इन बच्चों का व्यवहार, सोचने समझने की क्षमता, सुनने की क्षमता आदि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इन बच्चे का व्यवहार गुस्सैल होता है। वे हर वक्त बेचैन और अशांत रहते हैं। इन्हें दूसरों की भावनाएं समझ में नहीं आती हैं।
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ऑटिज्म आनुवंशिक बीमारी, माता-पिता सावधानी बरतें : डॉ. नेहा दुआ
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा दुआ सोबती का कहना है कि ऑटिज्म आनुवंशिक बीमारी है, लेकिन देरी से प्रेगनेंसी प्लान, प्रीमेच्योर डिलीवरी, जन्म के वक्त कम वजन और ट्यूबरस स्क्लेरोसिस की समस्या मुख्य कारण हो सकती है। बताया कि माता-पिता को लेट प्रेगनेंसी से बचना चाहिए। बच्चे की प्लानिंग से पहले जांच और मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी लेनी चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी डाइट, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय-समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करके इस समस्या से बचा जा सकता है।
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