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Kurukshetra News: फसल बौनी रहने पर 15 एकड़ में किसान ने चलाया ट्रैक्टर
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कुरुक्षेत्र। इस समय जब खेतों में धान की फसल लहलाहते देख किसान के चेहरे खुशी से खिल उठने चाहिए थे। उस समय जिले के कई गांवों के किसान बेबसी के आंसू बहा रहे हैं। खराब किस्म के बीज ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया, जिसके चलते मकिमपुरा गांव के एक किसान ने अपनी 15 एकड़ फसल पर ट्रैक्टर चलाकर जमीन में मिला दिया है।
किसान नरेश कुमार ने बताया कि उसने 70 एकड़ जमीन 74 हजार रुपये के हिसाब से ठेके पर ली हुई है, जिसमें उसने धान की फसल लगाई हुई है। बीज खराब क्वालिटी का होने की वजह से उसके 15 एकड़ में पौधे नहीं बढ़ रहे और वह सूख कर खराब हो रही है। नरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अब तक एक एकड़ के हिसाब से 20 से 25 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। अब न ही कृषि वैज्ञानिकों के पास इसका कोई इलाज है, जिसके चलते उन्हें 35 दिन तक बच्चों की तरह पाली फसल पर खुद ही ट्रैक्टर चलाना पड़ रहा है। नरेश को 2021 में इस लाइलाज बीमारी का सामना करना पड़ा था, उस समय इस बीमारी का ज्ञान न होने के चलते उन्हें काफी नुकसान हुआ था। नरेश कुमार बताते है कि उनके पड़ोसी किसानों के खेतों में भी फसल बोनी रहने की बीमारी आ हुई है और उनके कई पड़ोसियों ने, जिनके पास धान की पौध बची हुई थी, अपनी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया है और कई ट्रैक्टर चलाने की तैयारी में हैं। वहीं जानकारी के अनुसार धान की पौध बोनी रहने की बीमारी जिले के शाहापुर, ईशाक, मंगाना, मोरथली आदी गांवों के किसानों की फसल भी इस बीमारी की चपेट में हैं। किसान नेता संजू नंबरदार ने आरोप लगाया है कि बीज कंपनियां सरकार के साथ मिलीभगत करके नकली बीज बनाकर किसानों को ठगने में लगे हुए हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने माना कि जिले के कुछ गांवों में धान की फसल के पौधों में बौनापन दिखाई दिया है।
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किसान नरेश कुमार ने बताया कि उसने 70 एकड़ जमीन 74 हजार रुपये के हिसाब से ठेके पर ली हुई है, जिसमें उसने धान की फसल लगाई हुई है। बीज खराब क्वालिटी का होने की वजह से उसके 15 एकड़ में पौधे नहीं बढ़ रहे और वह सूख कर खराब हो रही है। नरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अब तक एक एकड़ के हिसाब से 20 से 25 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। अब न ही कृषि वैज्ञानिकों के पास इसका कोई इलाज है, जिसके चलते उन्हें 35 दिन तक बच्चों की तरह पाली फसल पर खुद ही ट्रैक्टर चलाना पड़ रहा है। नरेश को 2021 में इस लाइलाज बीमारी का सामना करना पड़ा था, उस समय इस बीमारी का ज्ञान न होने के चलते उन्हें काफी नुकसान हुआ था। नरेश कुमार बताते है कि उनके पड़ोसी किसानों के खेतों में भी फसल बोनी रहने की बीमारी आ हुई है और उनके कई पड़ोसियों ने, जिनके पास धान की पौध बची हुई थी, अपनी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया है और कई ट्रैक्टर चलाने की तैयारी में हैं। वहीं जानकारी के अनुसार धान की पौध बोनी रहने की बीमारी जिले के शाहापुर, ईशाक, मंगाना, मोरथली आदी गांवों के किसानों की फसल भी इस बीमारी की चपेट में हैं। किसान नेता संजू नंबरदार ने आरोप लगाया है कि बीज कंपनियां सरकार के साथ मिलीभगत करके नकली बीज बनाकर किसानों को ठगने में लगे हुए हैं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने माना कि जिले के कुछ गांवों में धान की फसल के पौधों में बौनापन दिखाई दिया है।