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Kurukshetra News: ये कैसा स्कूल, खंडहर भवन, बेंच है न ही बिजली, अंधेरे में टाट पर लग रही कक्षाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jan 2024 01:56 AM IST
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What kind of school is this, ruined building, no benches, no electricity, classes being held on cots in the dark
कुरुक्षेत्र। न पर्याप्त कमरे, न बेंच, न ही बिजली। है तो सिर्फ स्कूल के नाम पर खंडहर हालत के दो कमरे, जिनमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के 78 बच्च्चे शिक्षा लेने को मजबूर हैं। कभी कड़ाके की ठंड व कोहरे के बीच बरामदे में ही इन बच्चों की कक्षाएं लगती हैं तो कभी एक कमरे में दो से तीन कक्षाएं चलती हैं। ये कमरे भी अंधेरे में इस कदर डूबे होते हैं कि शिक्षक को पीछे का बच्चा साफ दिखाई तक नहीं पड़ता। इन्हीं कमरों में कक्षा के साथ कार्यालय से लेकर रसोई तक है। बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक लगाए गए हैं पर ये भी व्यवस्था के आगे मजबूर हैं। यह हकीकत है खेड़ी ब्राह्मण गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल की।
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जिला उपायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज पांच किलोमीटर दूरी पर शहर से ही सटे इस स्कूल के हालात आज से नहीं, बल्कि अनेकों वर्षों से खराब हैं। करीब 1970 से चल रहे इस स्कूल में कड़ाके की ठंड के साथ-साथ भीषण गर्मी और बारिश के दिनों में बच्चों संग शिक्षकों की मुसीबत बढ़ जाती है। बारिश के दिनों में बच्चे सिर पर बैग रखकर परिसर में भरे पानी से गुजरते हुए कमरे तक पहुंचते हैं। कई बार पानी कमरों के भीतर भी पहुंच जाता है।
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स्कूल के हालात जानने टीम पहुंची तो कड़ाके की ठंड के बीच दो कक्षाएं बाहर बरामदे में लगी थीं। अंधेरे में डूबे एक कमरे में भी दो कक्षाएं लगी थीं। साथ लगते दूसरे कमरे में एक कक्षा लगी थी, जहां कार्यालय और रसोई भी थी। कक्षाओं में बच्चे टाट पर बैठे नजर आए। यहां तैनात दोनों महिला शिक्षिकाएं हालात पर बेबसी जाहिर करतीं रहीं।
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हालात बदलने की बजाए पीएमश्री स्कूलों की सूची से ही हटाया
भले ही आज बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर आदि बनाए जाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग भी स्कूलों को मॉडल संस्कृति स्कूल से लेकर पीएमश्री स्कूल तक बनाए जाने व अंग्रेजी माध्यम एवं नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाने के दावे कर रहा है, लेकिन आज भी अनेकों ऐसे स्कूल हैं, जो आधारभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। विदित हो कि करीब तीन माह पहले खेड़ी ब्राह्मण का यह स्कूल भी पीएमश्री स्कूलों की सूची में आया, लेकिन जब इसके लिए सर्वे कर हकीकत जांची गई तो इसमें सुधार की जगह इसे सूची से ही हटा देना बेहतर समझा गया।



बिजली मीटर लगा, लेकिन बल्ब नहीं जग पाया
स्कूल में भले ही इंचार्ज अमरजीत सिंह और अन्य शिक्षकों के प्रयासों के चलते कुछ दिनों पहले ही बिजली मीटर लग पाया, लेकिन आज तक महज दो कमरों तक भी करंट नहीं पहुंचा है, जिससे बल्ब जलाया जा सके। कमरों में न बेंच है न ही पंखा।



स्कूल की जमीन को लेकर है विवाद, ग्रांट होती है वापस : अमरजीत
स्कूल इंचार्ज शिक्षक अमरजीत सिंह का कहना है कि स्कूल की जमीन को लेकर गांव के ही एक व्यक्ति का विवाद है और उन्होंने अदालत से स्टे लिया हुआ है। ऐसे में विभाग की ओर से भेजी जाने वाली हर ग्रांट को वापस कर दिया जाता है। स्कूल के हालात से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।




अदालत में मामला विचाराधीन : विनोद
डीईईओ विनोद कौशिक का कहना है कि स्कूल की जमीन का मामला अदालत में विचाराधीन है, जिसके चलते यहां कुछ कार्य नहीं कराया जा सका है, लेकिन प्रयास किया जाएगा कि बच्चों को जल्द सभी सुविधाएं मिल सके।
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