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Kurukshetra News: जय ओंकार आश्रम में साप्ताहिक सत्संग, गुरु भक्ति और समर्पण का संदेश
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कुरुक्षेत्र। जय ओंकार आश्रम श्री ब्रह्मा मंदिर प्रांगण में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। सत्संग में आसपास के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संगत ने गुरु महिमा का गुणगान किया और ओंकार भगवान के जयकारों के साथ सर्व कल्याण की कामना की। पूरा प्रांगण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव से ओत-प्रोत नजर आया।
कुरड़ी वाले स्वामी शक्तिदेव ने कहा कि प्रत्येक इंसान को अपने गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और समभाव में रहना चाहिए। गुरु शरण में रहने वाले जीव के जीवन में कभी भी अप्रिय घटना नहीं हो सकती, क्योंकि वह निराकार परब्रह्म ओंकार भगवान के साकार स्वरूप गुरु के आश्रय में रहता है। उन्होंने कहा कि संसार के सभी प्राणी अपने कर्मों के अनुसार सुख-दुख भोगते हैं, किंतु जो पूर्ण रूप से गुरु पर आश्रित हो जाता है, वह कर्म-जाल से मुक्त होकर सदा सुख और शांति प्राप्त करता है। गुरु का आश्रित वही बन सकता है, जो गुरुवाणी और गुरु सेवा को जीवन में सर्वोपरि स्थान देता है।
सत्संग में बताया गया कि जब जीव का गुरु से आत्मिक संबंध जुड़ता है, तब उसे आत्मानंद की अनुभूति होती है, जो केवल ओंकार भगवान की शक्ति स्वरूप सद्गुरु ज्योति से ही संभव है। संघ संचालक पंडित शिवनारायण दीक्षित ने कहा कि गुरु चरणों की सेवा सर्वोच्च है और सभी को अपने गुरुदेव का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।
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कुरड़ी वाले स्वामी शक्तिदेव ने कहा कि प्रत्येक इंसान को अपने गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और समभाव में रहना चाहिए। गुरु शरण में रहने वाले जीव के जीवन में कभी भी अप्रिय घटना नहीं हो सकती, क्योंकि वह निराकार परब्रह्म ओंकार भगवान के साकार स्वरूप गुरु के आश्रय में रहता है। उन्होंने कहा कि संसार के सभी प्राणी अपने कर्मों के अनुसार सुख-दुख भोगते हैं, किंतु जो पूर्ण रूप से गुरु पर आश्रित हो जाता है, वह कर्म-जाल से मुक्त होकर सदा सुख और शांति प्राप्त करता है। गुरु का आश्रित वही बन सकता है, जो गुरुवाणी और गुरु सेवा को जीवन में सर्वोपरि स्थान देता है।
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सत्संग में बताया गया कि जब जीव का गुरु से आत्मिक संबंध जुड़ता है, तब उसे आत्मानंद की अनुभूति होती है, जो केवल ओंकार भगवान की शक्ति स्वरूप सद्गुरु ज्योति से ही संभव है। संघ संचालक पंडित शिवनारायण दीक्षित ने कहा कि गुरु चरणों की सेवा सर्वोच्च है और सभी को अपने गुरुदेव का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।
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