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हम आंदोलन के साथ पर कॉल का इंतजार : चढूनी
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कुरुक्षेत्र। एमएसपी व अन्य मांगों के समर्थन में पंजाब व अन्य राज्यों के किसानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के साथ है लेकिन इन किसान संगठनों की ओर से की जाने वाली कॉल के अनुसार ही अगला कदम उठाया जाएगा। उक्त बातें भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं। इससे पहले प्रदेश स्तरीय बैठक की गई।
बैठक में आंदोलन को लेकर चल रहे वर्तमान हालात के साथ-साथ बारिश व ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों व किसानों की अन्य समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में किसान आंदोलन को लेकर कोर कमेटी भी बनाई गई, जो जरूरत अनुसार तत्काल निर्णय लेने में भी सक्षम होगी। चढूनी ने कहा कि उन्होंने कई दिन पहले दिल्ली कूच को लेकर फैसला ले लिया था, जिसके लिए कोर कमेटी की पांच मार्च को बैठक भी बुला ली थी लेकिन आंदोलनरत किसान संगठनों ने तीन मार्च को पंजाब व हरियाणा के संगठनों को छोड़कर दूसरे राज्यों का दिल्ली कूच का एलान किया था। ऐसे में उन्हें भी अपना फैसला फिलहाल टालना पड़ा, लेकिन अब अगली कॉल का इंतजार रहेगा। अब दूसरे प्रदेशों के किसान दिल्ली में जाने को तैयार है।
जले ट्रांसफार्मर का खर्च किसानों पर, नहीं सहेंगे
चढूनी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अब ट्रांसफार्मर जलने पर उसका 20 फीसदी खर्च किसान पर डाले जाने का निर्णय लिया है, जो सही नहीं है। इसका यूनियन कड़ा विरोध करती है। सरकार को यह निर्णय वापस लेना होगा। ट्रांसफार्मर जलने में किसान का कोई दोष नहीं होता। सरकार के इस फैसले से किसानों में गहरा रोष है।
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जींद महिला जिलाध्यक्ष की जमीन कुर्क करने का आदेश गलत
चढूनी ने बताया कि भाकियू जींद जिला की महिला अध्यक्ष अनीता सुदकन की जमीन कुर्क करने के आदेश जारी किए गए हैं, जो पूरी तरह से गलत है। यूनियन आंदोलन के दौरान टोल प्लाजा रोके जाने को लेकर चल रहे मामले में ये आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन अनीता सुदकन को इस बारे में जानकारी तक नहीं थी। यहां तक कि कोई नोटिस तक उन्हें नहीं भेजा गया। वे इसका कड़ा विरोध करते हैं और इसके चलते जींद में भी विरोध दर्ज कराया जाएगा।
40 हजार रुपये प्रति एकड़ मिले मुआवजा
चढूनी ने कहा कि प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश व ओलावृष्टि से बड़े स्तर पर फसलें खराब हुई हैं और यह किसानों पर आफत पड़ी है। सरकार को जल्द विशेष गिरदावरी करवाकर प्रति एकड़ 40 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए, ताकि किसानों को कुछ राहत मिल सके।
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बैठक में आंदोलन को लेकर चल रहे वर्तमान हालात के साथ-साथ बारिश व ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों व किसानों की अन्य समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में किसान आंदोलन को लेकर कोर कमेटी भी बनाई गई, जो जरूरत अनुसार तत्काल निर्णय लेने में भी सक्षम होगी। चढूनी ने कहा कि उन्होंने कई दिन पहले दिल्ली कूच को लेकर फैसला ले लिया था, जिसके लिए कोर कमेटी की पांच मार्च को बैठक भी बुला ली थी लेकिन आंदोलनरत किसान संगठनों ने तीन मार्च को पंजाब व हरियाणा के संगठनों को छोड़कर दूसरे राज्यों का दिल्ली कूच का एलान किया था। ऐसे में उन्हें भी अपना फैसला फिलहाल टालना पड़ा, लेकिन अब अगली कॉल का इंतजार रहेगा। अब दूसरे प्रदेशों के किसान दिल्ली में जाने को तैयार है।
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जले ट्रांसफार्मर का खर्च किसानों पर, नहीं सहेंगे
चढूनी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अब ट्रांसफार्मर जलने पर उसका 20 फीसदी खर्च किसान पर डाले जाने का निर्णय लिया है, जो सही नहीं है। इसका यूनियन कड़ा विरोध करती है। सरकार को यह निर्णय वापस लेना होगा। ट्रांसफार्मर जलने में किसान का कोई दोष नहीं होता। सरकार के इस फैसले से किसानों में गहरा रोष है।
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जींद महिला जिलाध्यक्ष की जमीन कुर्क करने का आदेश गलत
चढूनी ने बताया कि भाकियू जींद जिला की महिला अध्यक्ष अनीता सुदकन की जमीन कुर्क करने के आदेश जारी किए गए हैं, जो पूरी तरह से गलत है। यूनियन आंदोलन के दौरान टोल प्लाजा रोके जाने को लेकर चल रहे मामले में ये आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन अनीता सुदकन को इस बारे में जानकारी तक नहीं थी। यहां तक कि कोई नोटिस तक उन्हें नहीं भेजा गया। वे इसका कड़ा विरोध करते हैं और इसके चलते जींद में भी विरोध दर्ज कराया जाएगा।
40 हजार रुपये प्रति एकड़ मिले मुआवजा
चढूनी ने कहा कि प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश व ओलावृष्टि से बड़े स्तर पर फसलें खराब हुई हैं और यह किसानों पर आफत पड़ी है। सरकार को जल्द विशेष गिरदावरी करवाकर प्रति एकड़ 40 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए, ताकि किसानों को कुछ राहत मिल सके।