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प्राकृतिक खेती से ही बचेंगे जल, जंगल, जीव और जमीन : आचार्य देवव्रत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2024 07:04 AM IST
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Water, forests, animals and land will be saved only through natural farming: Acharya Devvrat
कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक फार्म के दौरे के दौरान गुजरात के राज्यपाल आचार्य
कुरुक्षेत्र। प्राकृतिक खेती आज की जरूरत है क्योंकि प्राकृतिक खेती करके ही जल, जंगल, जमीन और जीव को बचाया जा सकता है। लगातार रासायनिक खेती करने से देश के कई प्रदेशों में जहां भूमिगत जलस्तर लगातार घटता जा रहा है वहीं जमीन भी बंजर हो रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती अपनाया जाना और भी अहम हो जाता है। ये आह्वान गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया।
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वे प्राकृतिक खेती के गुर सीखने के लिए गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचे ओलंपियन पदमश्री पहलवान योगेश्वर दत्त के नेतृत्व में 23 नामचीन खिलाड़ियों व विभिन्न गांवों से आए सरपंचों एवं अन्य लोगों को संबोधित कर रहे थे। खिलाड़ियों में ओलंपिक मेडलिस्ट, द्रोणाचार्य अवार्डी, ध्यानचंद अवार्डी, अर्जुन अवार्डी, भारत केसरी, हिन्द केसरी, एशियन और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता भी शामिल रहे। वहीं विख्यात समाजसेवी डॉ. सम्पूर्ण सिंह, निदेशक बिग्रेडियर डॉ. प्रवीण कुमार, विख्यात कृषि वैज्ञानिक पदमश्री डॉ. हरिओम, प्राचार्य सूबे प्रताप, रामनिवास आर्य भी मुख्य तौर पर रहे।
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आचार्यश्री देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती में एक देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से 30 एकड़ भूमि पर खेती की जाती है और किसान को किसी भी प्रकार का कोई पेस्टीसाइड, यूरिया, डीएपी आदि खेत में डालने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई लोगों को भ्रम है कि प्राकृतिक खेती और जैविक खेती एक ही है मगर ये दोनों एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत है। जैविक खेती तो रासायनिक खेती से भी नुकसानदायक है।
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गुरुकुल के फार्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां पर पिछले 10 वर्षों से विशुद्ध प्राकृतिक खेती की जा रही है, एक बूंद भी यूरिया या किसी प्रकार का पेस्टीसाइड खेतों में नहीं डाला गया। देशी गाय के गोबर से बने जीवामृत और घनजीवामृत के प्रयोग से ही फसलों का उत्पादन रासायनिक और जैविक खेती करने वाले किसानों की तुलना में डेढ़ गुणा से भी अधिक है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में उनके नेतृत्व में तीन लाख से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया, इसी प्रकार गुजरात में 10 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर बिना खाद, केमिकल के अच्छा उत्पादन ले रहे हैं। आचार्य ने कहा कि यदि हमें कैंसर, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से छुटकारा पाना है और आने वाली पीढ़ी को विरासत के रूप में पानी और शुद्ध पर्यावरण देना है तो सभी को प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।
राज्यपाल ने सभी खिलाड़ियों व अन्य लोगों को गुरुकुल की अत्याधुनिक गोशाला, एनडीए विंग, विद्यालय भवन सहित विभिन्न प्रकल्पों का भ्रमण कराया। उन्होंने जीवामृत एवं घनजीवामृत निर्माण केंद्र पर सभी को प्राकृतिक खेती में प्रयोग होने वाले विभिन्न घटकों की विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद सभी ने फार्म का भ्रमण किया तो हर बारीकी से रूबरू हुए। फार्म पर एक साथ कई फसलें लेने का मॉडल उन्हें बहुत भाया। सेब, केला, अमरूद, लीची और आम के बाग को देख सभी हैरान रह गए।


अब नामचीन खिलाड़ी चलाएंगे प्राकृतिक खेती के लिए मुहिम
योगेश्वर दत्त सहित यहां पहुंचे नामचीन खिलाड़ियों की प्राकृतिक खेती के प्रति गहन रुचि दिखाई दी। हर बारीकी को जानने के प्रति वे उत्साहित रहे तो वहीं आचार्य देवव्रत व पदमश्री डॉ. हरिओम ने उन्हें हर फसल व उसकी बिजाई से लेकर उत्पादन तक के चक्र से रूबरू कराया। अब ये नामचीन खिलाड़़ी प्राकृतिक खेती की मुहिम चलाएंगे और अपने साथ किसानों को जोड़ेंगे, ताकि इसके प्रति रुझान बढ़ सके।
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