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आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत में रखना होगा जल संचय और शुद्ध वातावरण : भारत भूषण
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकुला व कुवि के सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र के सहयोग से मंगलवार को सीनेट हॉल में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें एक थी नदी सरस्वती विषय पर चर्चा की गई और आने वाले समय में जलसंकट की चिंता व्यक्त की गई। मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती रहे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जलयुद्ध होगा। जल ही जीवन है लेकिन आने वाला समय संकटग्रस्त है। हमें जल का संचय और शुद्ध वातावरण आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत में रखना होगा।
सरस्वती नदी वेदों में ही नहीं बल्कि धरातल पर भी मौजूद है तथा वैज्ञानिक आधार पर भी सरस्वती के मौजूद होने के प्रमाण मिल चुके हैं। सरस्वती विरासत को आने वाली पीढि़यों के लिए संरक्षित करना हमारा नैतिक दायित्व है। भारतीय वैदिक संस्कृति का विकास इसी नदी के आसपास हुआ था। इसलिए इस नदी को खोजना भारतीय सांस्कृतिक विरासत को खोजना है।
सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र के निदेशक व छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि सरस्वती नदी की खोज यात्रा वर्ष 2002 में दर्शन लाल जैन, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती और उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच के प्रयास से शुरू हुई थी। कार्यकारी उपाध्यक्ष कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि सरस्वती नदी लोक साहित्य में कभी भी लुप्त नहीं हुई है। कुछ इतिहासकारों की दृष्टि में सरस्वती मिथ है। हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार वर्मा ने बताया कि गिरते हुए भूजल स्तर को देखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया जो कि तालाबों के विकास, सुरक्षा, पुनरुद्धार, संरक्षण, निर्माण और प्रबंधन को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।
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इस मौके पर डॉ. एके गुप्ता, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, प्रो. डीएस राणा, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. प्रीति जैन, प्रो. रीटा, डॉ. निरुपमा भट्टी, प्रो. किरण, प्रो. सीडीएस कौशल, डॉ. एमके मोदगिल, डॉ. गुरचरण सिंह, डॉ. नीरज बातिश सहित अन्य शिक्षक व प्रतिभागी मौजूद रहे।
12 महीने बहेगा सरस्वती नदी में पानी : धुम्मन
हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब 12 महीने सरस्वती नदी में पानी चलेगा। सरस्वती नदी का अपना आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व है। यह आस्था का केंद्र है। वर्तमान में सरस्वती नदी का जल प्रवाह 380 किमी तक बढ़ चुका है। सरस्वती को धरा पर लाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा शुरूआत की गई थी और अब तक अनेक कार्य किए जा चुके हैं।
सरस्वती कालखंड के वैज्ञानिक साक्ष्य पर शोध करने का किया आह्वान
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि पौराणिक मान्यताएं बिल्कुल सही हैं। मान्यताओं के मुताबिक सरस्वती नदी के जीवित होने के प्रमाण व साक्ष्य मिलते हैं। सरस्वती के विकास से ही हम अपनी विरासत पर गर्व कर सकते हैं। आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जूझ रहा है। धरती के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इसे रोकने के प्रयास करने होंगे, अन्यथा इसके भयावह परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए वेल्यू एडिड कोर्सेज को शामिल किया गया है ताकि विद्यार्थी अपनी संस्कृति से जुड़े रहे। शोधार्थियों से सरस्वती के कालखंड के वैज्ञानिक साक्ष्य पर शोध करने का आह्वान किया।
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सरस्वती नदी वेदों में ही नहीं बल्कि धरातल पर भी मौजूद है तथा वैज्ञानिक आधार पर भी सरस्वती के मौजूद होने के प्रमाण मिल चुके हैं। सरस्वती विरासत को आने वाली पीढि़यों के लिए संरक्षित करना हमारा नैतिक दायित्व है। भारतीय वैदिक संस्कृति का विकास इसी नदी के आसपास हुआ था। इसलिए इस नदी को खोजना भारतीय सांस्कृतिक विरासत को खोजना है।
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सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र के निदेशक व छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि सरस्वती नदी की खोज यात्रा वर्ष 2002 में दर्शन लाल जैन, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती और उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच के प्रयास से शुरू हुई थी। कार्यकारी उपाध्यक्ष कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि सरस्वती नदी लोक साहित्य में कभी भी लुप्त नहीं हुई है। कुछ इतिहासकारों की दृष्टि में सरस्वती मिथ है। हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार वर्मा ने बताया कि गिरते हुए भूजल स्तर को देखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया जो कि तालाबों के विकास, सुरक्षा, पुनरुद्धार, संरक्षण, निर्माण और प्रबंधन को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।
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इस मौके पर डॉ. एके गुप्ता, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, प्रो. डीएस राणा, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. प्रीति जैन, प्रो. रीटा, डॉ. निरुपमा भट्टी, प्रो. किरण, प्रो. सीडीएस कौशल, डॉ. एमके मोदगिल, डॉ. गुरचरण सिंह, डॉ. नीरज बातिश सहित अन्य शिक्षक व प्रतिभागी मौजूद रहे।
12 महीने बहेगा सरस्वती नदी में पानी : धुम्मन
हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब 12 महीने सरस्वती नदी में पानी चलेगा। सरस्वती नदी का अपना आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व है। यह आस्था का केंद्र है। वर्तमान में सरस्वती नदी का जल प्रवाह 380 किमी तक बढ़ चुका है। सरस्वती को धरा पर लाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा शुरूआत की गई थी और अब तक अनेक कार्य किए जा चुके हैं।
सरस्वती कालखंड के वैज्ञानिक साक्ष्य पर शोध करने का किया आह्वान
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि पौराणिक मान्यताएं बिल्कुल सही हैं। मान्यताओं के मुताबिक सरस्वती नदी के जीवित होने के प्रमाण व साक्ष्य मिलते हैं। सरस्वती के विकास से ही हम अपनी विरासत पर गर्व कर सकते हैं। आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जूझ रहा है। धरती के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इसे रोकने के प्रयास करने होंगे, अन्यथा इसके भयावह परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए वेल्यू एडिड कोर्सेज को शामिल किया गया है ताकि विद्यार्थी अपनी संस्कृति से जुड़े रहे। शोधार्थियों से सरस्वती के कालखंड के वैज्ञानिक साक्ष्य पर शोध करने का आह्वान किया।