{"_id":"62e8366ebec5541b1e419434","slug":"turtle-smugglers-laid-a-trap-of-conspiracy-after-collusion-kurukshetra-kurukshetra-news-knl1165552171","type":"story","status":"publish","title_hn":"कछुआ तस्करों ने मिलीभगत के बाद बिछाया साजिश का जाल!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कछुआ तस्करों ने मिलीभगत के बाद बिछाया साजिश का जाल!
विज्ञापन
ब्रह्मसरोवर में लगे जाल को निकालते कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर में कछुआ तस्कर गिरोह ने जाल लगाया था। यह काम बगैर मिलीभगत के संभव ही नहीं है। साजिश के इस जाल को कब और कैसे लगाया गय.ा इसके जवाब तलाशने पुलिस जुटाने में प्रयासरत है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 500 मीटर लंबे इस जाल को सरोवर में कैसे लगाया गया, क्योंकि ब्रह्मसरोवर पर हर समय पर्यटन पुलिस का पहरा रहता है। मामले की गहन जांच हुई तो इस साजिश के जाल में कई लोग फंस सकते हैं।
ब्रह्मसरोवर में इंडियन सॉफ्ट शैल टर्टल (कछुए की एक प्रजाति) काफी संख्या में हैं। इसके अलावा सरोवर में ग्रीन सॉफ्ट शैल टर्टल भी है। बाजार में कछुओं की बहुत अधिक मांग रहती है, क्योंकि अधिकतर लोग टीबी और दमा से निजात पाने के लिए कछुओं का सेवन करते हैं। ब्रह्मसरोवर में नहर से पानी आता है और उस रास्ते ही कछुए ब्रह्मसरोवर तक पहुंच जाते हैं। कछुओं को लुप्तप्राय जीव घोषित किया गया है। उनके यहां बढ़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन और वातावरण मिल रहा है। वहीं ब्रह्मसरोवर में कई दुर्लभ प्रजाति की मछलियां भी है। इन मछलियों में डिमांड भी मार्केट में खूब रहती है।
ब्रह्मसरोवर में इन जलीय जीवों को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि धार्मिक कारण भी है। 15 फुट गहरे और चार किलोमीटर दायरे में फैले इस सरोवर में पैदा होने वाली काई और घास की सफाई भी यह जलीय जीव करते हैं। जलीय जीवों पर ही तस्करों की नजर है। इससे पहले छह जनवरी 2021 को केडीबी कार्यालय के पास से जाल बरामद हुआ था। उस समय एफआईआर दर्ज की गई थी। अब तक उस मामले की जांच आगे नहीं बढ़ाई जा सकी। वहीं इस बार लगाए गए जाल में तीन कछुए फंसे थे। इन कछुओं को जाल से मुक्त कराकर ब्रह्मसरोवर में छोड़ा गया। वहीं घाट पर करीब जाल में कई मछलियां भी फंसी हुई थी, जिस कारण उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा का कहना है कि इस कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी तीन बार ब्रह्मसरोवर से जाल बरामद हो चुका है। इसके बाद भी केडीबी और पर्यटक पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया। मिलीभगत के बगैर ब्रह्मसरोवर में, वो भी वीआईपी घाट पर जाल लगना असंभव है। इस मामले की गहनता से जांच होनी चाहिए। सभा राज्यपाल और सीएम को इस मामले से अवगत कराएगी।
रात में जाल लगाने का अनुुमान : राजपाल
केयूके थाना प्रबंधक राजपाल ने बताया कि पुलिस ने रविवार देर शाम ही अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। ब्रह्मसरोवर से बरामद जाल की लंबाई करीब 500 मीटर होगी। यह जाल कहां से आया पुलिस इसकी जांच कर रही है। वहीं पर्यटक पुलिस के प्रभारी विनोद कुमार ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि रात में जाल बिछाया गया था। हमारी टीमें गश्त करती रहती हैं लेकिन रात का फायदा उठाकर जाल लगा दिया होगा। हम गश्त को और तेज करेंगे।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर में कछुआ तस्कर गिरोह ने जाल लगाया था। यह काम बगैर मिलीभगत के संभव ही नहीं है। साजिश के इस जाल को कब और कैसे लगाया गय.ा इसके जवाब तलाशने पुलिस जुटाने में प्रयासरत है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 500 मीटर लंबे इस जाल को सरोवर में कैसे लगाया गया, क्योंकि ब्रह्मसरोवर पर हर समय पर्यटन पुलिस का पहरा रहता है। मामले की गहन जांच हुई तो इस साजिश के जाल में कई लोग फंस सकते हैं।
ब्रह्मसरोवर में इंडियन सॉफ्ट शैल टर्टल (कछुए की एक प्रजाति) काफी संख्या में हैं। इसके अलावा सरोवर में ग्रीन सॉफ्ट शैल टर्टल भी है। बाजार में कछुओं की बहुत अधिक मांग रहती है, क्योंकि अधिकतर लोग टीबी और दमा से निजात पाने के लिए कछुओं का सेवन करते हैं। ब्रह्मसरोवर में नहर से पानी आता है और उस रास्ते ही कछुए ब्रह्मसरोवर तक पहुंच जाते हैं। कछुओं को लुप्तप्राय जीव घोषित किया गया है। उनके यहां बढ़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन और वातावरण मिल रहा है। वहीं ब्रह्मसरोवर में कई दुर्लभ प्रजाति की मछलियां भी है। इन मछलियों में डिमांड भी मार्केट में खूब रहती है।
विज्ञापन
ब्रह्मसरोवर में इन जलीय जीवों को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि धार्मिक कारण भी है। 15 फुट गहरे और चार किलोमीटर दायरे में फैले इस सरोवर में पैदा होने वाली काई और घास की सफाई भी यह जलीय जीव करते हैं। जलीय जीवों पर ही तस्करों की नजर है। इससे पहले छह जनवरी 2021 को केडीबी कार्यालय के पास से जाल बरामद हुआ था। उस समय एफआईआर दर्ज की गई थी। अब तक उस मामले की जांच आगे नहीं बढ़ाई जा सकी। वहीं इस बार लगाए गए जाल में तीन कछुए फंसे थे। इन कछुओं को जाल से मुक्त कराकर ब्रह्मसरोवर में छोड़ा गया। वहीं घाट पर करीब जाल में कई मछलियां भी फंसी हुई थी, जिस कारण उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा का कहना है कि इस कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी तीन बार ब्रह्मसरोवर से जाल बरामद हो चुका है। इसके बाद भी केडीबी और पर्यटक पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया। मिलीभगत के बगैर ब्रह्मसरोवर में, वो भी वीआईपी घाट पर जाल लगना असंभव है। इस मामले की गहनता से जांच होनी चाहिए। सभा राज्यपाल और सीएम को इस मामले से अवगत कराएगी।
रात में जाल लगाने का अनुुमान : राजपाल
केयूके थाना प्रबंधक राजपाल ने बताया कि पुलिस ने रविवार देर शाम ही अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। ब्रह्मसरोवर से बरामद जाल की लंबाई करीब 500 मीटर होगी। यह जाल कहां से आया पुलिस इसकी जांच कर रही है। वहीं पर्यटक पुलिस के प्रभारी विनोद कुमार ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि रात में जाल बिछाया गया था। हमारी टीमें गश्त करती रहती हैं लेकिन रात का फायदा उठाकर जाल लगा दिया होगा। हम गश्त को और तेज करेंगे।

ब्रह्मसरोवर में शिकारियों की ओर से लगाए गए जाल में फंसे कछुए। संवाद- फोटो : Kurukshetra