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वेदों के मार्ग पर चलना ही सच्चा जीवन : स्वामी संपूर्णानंद
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कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर के योग भवन प्रांगण में चल रहे 12 दिवसीय चतुर्वेद परायण महायज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। हिमाचल प्रदेश से आचार्य प्रदीप के साथ-साथ पानीपत और कैथल से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पानीपत आर्य समाज की ओर से बेला भाटिया और जिला परिषद पानीपत के वाइस चेयरमैन सुरेश मलिक के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ में आहुतियां डालीं।
कार्यक्रम संयोजक स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया और कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन का संविधान है। जो भी इनके मार्ग पर चलेगा, उसका जीवन सुंदर बनेगा और वह समाज व राष्ट्र की उन्नति में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि यह आयोजन महर्षि दयानंद सरस्वती की द्वितीय जन्मशताब्दी वर्ष समापन समारोह, आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ और सत्यार्थ प्रकाश की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हो रहा है। इसमें दूर-दराज से श्रद्धालु आकर यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर रहे हैं। इस मौके पर नरेंद्र आर्य, आचार्य संदीपन, रोहित आर्य, आर्य रामकिशन सांभली, वेद प्रकाश आर्य सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
यज्ञ से पर्यावरण होता है शुद्ध, चारों वेदों में बताया महत्व
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य हरिप्रसाद ने कहा कि यज्ञ यह न केवल वहां मौजूद लोगों को बल्कि पूरे वातावरण को शुद्ध करने का काम करता है। चारों वेदों में यज्ञ को विशेष स्थान दिया गया है और इसे करना सौभाग्य की बात होती है। ऋषियों द्वारा स्थापित इस परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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आवासीय व्यवस्था और भंडारे की विशेष सुविधा
आयोजन में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवासीय और भंडारे की विशेष व्यवस्था की गई है। यहां ऑर्गेनिक सब्जियों के बीज, वैदिक साहित्य, ऑर्गेनिक क्वालिटी के मुरब्बे और च्यवनप्राश की स्टॉल भी लगी है। देसी गाय का शुद्ध घी भी श्रद्धालु यहां से खरीद सकते हैं।
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कार्यक्रम संयोजक स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया और कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन का संविधान है। जो भी इनके मार्ग पर चलेगा, उसका जीवन सुंदर बनेगा और वह समाज व राष्ट्र की उन्नति में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि यह आयोजन महर्षि दयानंद सरस्वती की द्वितीय जन्मशताब्दी वर्ष समापन समारोह, आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ और सत्यार्थ प्रकाश की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हो रहा है। इसमें दूर-दराज से श्रद्धालु आकर यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर रहे हैं। इस मौके पर नरेंद्र आर्य, आचार्य संदीपन, रोहित आर्य, आर्य रामकिशन सांभली, वेद प्रकाश आर्य सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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यज्ञ से पर्यावरण होता है शुद्ध, चारों वेदों में बताया महत्व
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य हरिप्रसाद ने कहा कि यज्ञ यह न केवल वहां मौजूद लोगों को बल्कि पूरे वातावरण को शुद्ध करने का काम करता है। चारों वेदों में यज्ञ को विशेष स्थान दिया गया है और इसे करना सौभाग्य की बात होती है। ऋषियों द्वारा स्थापित इस परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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आवासीय व्यवस्था और भंडारे की विशेष सुविधा
आयोजन में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवासीय और भंडारे की विशेष व्यवस्था की गई है। यहां ऑर्गेनिक सब्जियों के बीज, वैदिक साहित्य, ऑर्गेनिक क्वालिटी के मुरब्बे और च्यवनप्राश की स्टॉल भी लगी है। देसी गाय का शुद्ध घी भी श्रद्धालु यहां से खरीद सकते हैं।