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Kurukshetra News: रूटों पर कम हुए फेरे, यात्रियों को करना पड़ रहा लंबा इंतजार
Tue, 03 Mar 2026 03:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 03 Mar 2026 03:14 AM IST
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कुरुक्षेत्र। नए बस अड्डे स्थित वर्कशॉप में खड़ी कंडम बसें। संवाद
कुरुक्षेत्र। डिपो में बसों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जिससे स्थानीय रूटों पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बसों की कमी के कारण कई रूटों पर फेरे कम कर दिए गए हैं, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
डिपो से पिहोवा, कैथल और लाडवा सहित अन्य लोकल रूटों पर बसों के चक्कर घटे हैं। पिहोवा रूट सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है, बसों के 20 से 25 फेरे कम हुए है। यात्रियों को घंटों बस का इंतजार करना पड़ रहा है। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और ग्रामीण क्षेत्र के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
हाल ही में दूसरे डिपो से 53 बसें मिलने के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन इनमें से करीब 20 बसें कंडम हो चुकी हैं। परिवहन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए डिपो को करीब 250 बसों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 154 बसें ही उपलब्ध हैं। यानी पहले से ही 96 बसों की कमी बनी हुई है।
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रोज थम रहे पांच से छह बसों के पहिए
रोजाना पांच से छह बसें अलग-अलग रूटों पर खराब होकर खड़ी हो जाती हैं। वहीं आठ से दस बसें वर्कशॉप में मरम्मत और सर्विस के लिए खड़ी रहती हैं। कई बसें अपनी निर्धारित किलोमीटर सीमा पूरी कर चुकी हैं, फिर भी मजबूरी में उन्हें सड़कों पर उतारा जा रहा है। इससे यात्रियों के साथ-साथ चालक और परिचालकों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
वर्कशॉप मैनेजर अश्वनी कुमार ने बताया कि कंडम बसों को हटाया गया है और नई बसों की मांग सरकार को भेज दी गई है। जल्द ही नई बसें मिलने की उम्मीद है, जिससे परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा और यात्रियों को राहत मिलेगी।
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डिपो से पिहोवा, कैथल और लाडवा सहित अन्य लोकल रूटों पर बसों के चक्कर घटे हैं। पिहोवा रूट सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है, बसों के 20 से 25 फेरे कम हुए है। यात्रियों को घंटों बस का इंतजार करना पड़ रहा है। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और ग्रामीण क्षेत्र के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
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हाल ही में दूसरे डिपो से 53 बसें मिलने के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन इनमें से करीब 20 बसें कंडम हो चुकी हैं। परिवहन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए डिपो को करीब 250 बसों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 154 बसें ही उपलब्ध हैं। यानी पहले से ही 96 बसों की कमी बनी हुई है।
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रोज थम रहे पांच से छह बसों के पहिए
रोजाना पांच से छह बसें अलग-अलग रूटों पर खराब होकर खड़ी हो जाती हैं। वहीं आठ से दस बसें वर्कशॉप में मरम्मत और सर्विस के लिए खड़ी रहती हैं। कई बसें अपनी निर्धारित किलोमीटर सीमा पूरी कर चुकी हैं, फिर भी मजबूरी में उन्हें सड़कों पर उतारा जा रहा है। इससे यात्रियों के साथ-साथ चालक और परिचालकों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
वर्कशॉप मैनेजर अश्वनी कुमार ने बताया कि कंडम बसों को हटाया गया है और नई बसों की मांग सरकार को भेज दी गई है। जल्द ही नई बसें मिलने की उम्मीद है, जिससे परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा और यात्रियों को राहत मिलेगी।