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Kurukshetra News: वतन पर मिटने वालों को नमन, सम्मान पाकर भावुक हुए परिजन
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कुरुक्षेत्र। अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘मां तुझे प्रणाम’ कार्यक्रम के तहत सोमवार को धर्मनगरी में वतन पर मिटने वाले शहीदों का सम्मान किया गया। यह पल बहुत भावुक था और इस दौरान सम्मान पाने वाले शहीदों के परिजनों की आंखें भी नम नजर आईं। इन शहीदों के परिजनों को सम्मान प्रदान करने वाले मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व सम्मानित अतिथि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने भी खुद को गौरवान्वित महसूस किया। मेहमानों ने भी परिजनों को सत्कार करते हुए कहा कि शहीदों के ऋण को यह देश कभी नहीं चुका सकता।
इस अवसर शहीदों की कुर्बानियों और उनकी शूरवीरता की कहानियों को भी याद किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मेहमानों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। उसके बाद शहीदों के परिजनों को स्मृति चिह्न भेंटकर व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे कुवि के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि देश की सरहद पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों के परिजनों काे सम्मान देना सराहनीय कार्य है। देश के सैनिक विषय परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर देते हैं। आसमान छूती चोटियों का शून्य तापमान हो या फिर रेगिस्तान में 52 डिग्री का पारा, ऐसी परिस्थितियों में भी सैनिक देश की रक्षा के लिए सरहद पर डटे रहते हैं, ताकि हम सभी घरों में सुरक्षित चैन की नींद सो सकें। मातृभूमि की रक्षा करते-करते अनेकों सैनिक अपने प्राण न्यौछावर कर चुके हैं, जिन पर पूरे देश को हमेशा गर्व रहेगा। शहीदों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। इस कार्यक्रम में उजाला सिगनस मुख्य सहयोगी रहा, जबकि नीलम यूनिवर्सिटी, श्री बालाजी आरोग्यम अस्पताल, एमआईजी अस्पताल, महाराजा अग्रसेन अस्पताल, दा हाईस्ट करिअॅर इंस्टीट्यूट व खान हेयर एक्सपेंसो का भी योगदान रहा।
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सैनिकों के परिजनों का सम्मान जरूरी
उजाला सिग्नस के यूनिट हेड डॉ. परवेश अख्तर कहा कि देशवासियों को सैनिकों, शहीदों और शहीदों के परिजनों का सम्मान करना चाहिए। सैनिक ही देश की रक्षा के लिए दिन रात सरहदों पर अपनी जान को जोखिम में डालते हैं। इसलिए सभी देशवासियों का फर्ज बनता है कि सैनिकों और उनके परिजनों का सम्मान करना चाहिए।
सैनिकों के कारण ही खुली हवा में ले रहे सांस
एमआईजी अस्पताल के प्रतिनिधि संदीप ने कहा कि देश की रक्षा के लिए दिन रात मैदान में डटे सैनिकों के कारण ही हम आज खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं, सैनिकों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। सैनिकों को सम्मान देने के लिए आयोजित यह कार्यक्रम अमर उजाला का सराहनीय कदम है।
शहीदों को सम्मान देना काबिले तारीफ
महाराजा अग्रसेन अस्पताल के डॉ. प्रमोद ने बताया कि अमर उजाला की ओर से देश के शहीदों को सम्मान देना काबिले तारीफ है। देश के शहीद हुए जवानों के कारण ही आज हम चैन की नींद सो रहे हैं। देश की रक्षा के लिए सैनिक अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है।
सैनिकों के कारण ही हम सुरक्षित
दा हाईस्ट करिअॅर इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि अमित का कहना है कि अमर उजाला की ओर से शहीदों का सम्मान किया जाना सराहनीय है। देश पर मर मिटने वाले शहीद हुए सैनिकों के कारण ही हम आज आजाद है, शहीदों को बलिदान को हमेशा याद रखना चाहिए और उनके योगदान के लिए उन्हें दिल से याद करना चाहिए।
शहीदों की यादें हो गईं ताजा
सेवानिवृत सूबेदार रविंद्र कौशिक का कहना है कि मातृभूमि की रक्षा करने के लिए सैनिकों का अहम योगदान है। इसके कारण ही आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अमर उजाला की ओर से शहीदों के परिजनों की ओर सम्मान दिए जाने से उनकी यादें ताजा हो गईं। हमें शहीदों के परिजनों से मिलते रहना चाहिए, ताकि उन्हें ऐसा अनुभव न हो कि हम अकेले हैं।
शहीदों को कभी न भूलें
सेवानिवृत्त सूबेदार एवं जिला सैनिक कल्याण बोर्ड में तैनात आरआर शर्मा ने कहा कि सैनिक अपनी जान की परवाह न करते हुए शून्य डिग्री तापमान पर ऊंचे बर्फ के पहाड़ों पर मैदान में डटा रहता है। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर देता है लेकिन पीछे नहीं हटता। देश के लिए कुर्बान होने वाले शहीदों का हमें सम्मान करना चाहिए।
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इस अवसर शहीदों की कुर्बानियों और उनकी शूरवीरता की कहानियों को भी याद किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मेहमानों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। उसके बाद शहीदों के परिजनों को स्मृति चिह्न भेंटकर व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
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कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे कुवि के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि देश की सरहद पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों के परिजनों काे सम्मान देना सराहनीय कार्य है। देश के सैनिक विषय परिस्थितियों में भी देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर देते हैं। आसमान छूती चोटियों का शून्य तापमान हो या फिर रेगिस्तान में 52 डिग्री का पारा, ऐसी परिस्थितियों में भी सैनिक देश की रक्षा के लिए सरहद पर डटे रहते हैं, ताकि हम सभी घरों में सुरक्षित चैन की नींद सो सकें। मातृभूमि की रक्षा करते-करते अनेकों सैनिक अपने प्राण न्यौछावर कर चुके हैं, जिन पर पूरे देश को हमेशा गर्व रहेगा। शहीदों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। इस कार्यक्रम में उजाला सिगनस मुख्य सहयोगी रहा, जबकि नीलम यूनिवर्सिटी, श्री बालाजी आरोग्यम अस्पताल, एमआईजी अस्पताल, महाराजा अग्रसेन अस्पताल, दा हाईस्ट करिअॅर इंस्टीट्यूट व खान हेयर एक्सपेंसो का भी योगदान रहा।
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सैनिकों के परिजनों का सम्मान जरूरी
उजाला सिग्नस के यूनिट हेड डॉ. परवेश अख्तर कहा कि देशवासियों को सैनिकों, शहीदों और शहीदों के परिजनों का सम्मान करना चाहिए। सैनिक ही देश की रक्षा के लिए दिन रात सरहदों पर अपनी जान को जोखिम में डालते हैं। इसलिए सभी देशवासियों का फर्ज बनता है कि सैनिकों और उनके परिजनों का सम्मान करना चाहिए।
सैनिकों के कारण ही खुली हवा में ले रहे सांस
एमआईजी अस्पताल के प्रतिनिधि संदीप ने कहा कि देश की रक्षा के लिए दिन रात मैदान में डटे सैनिकों के कारण ही हम आज खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं, सैनिकों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। सैनिकों को सम्मान देने के लिए आयोजित यह कार्यक्रम अमर उजाला का सराहनीय कदम है।
शहीदों को सम्मान देना काबिले तारीफ
महाराजा अग्रसेन अस्पताल के डॉ. प्रमोद ने बताया कि अमर उजाला की ओर से देश के शहीदों को सम्मान देना काबिले तारीफ है। देश के शहीद हुए जवानों के कारण ही आज हम चैन की नींद सो रहे हैं। देश की रक्षा के लिए सैनिक अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है।
सैनिकों के कारण ही हम सुरक्षित
दा हाईस्ट करिअॅर इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि अमित का कहना है कि अमर उजाला की ओर से शहीदों का सम्मान किया जाना सराहनीय है। देश पर मर मिटने वाले शहीद हुए सैनिकों के कारण ही हम आज आजाद है, शहीदों को बलिदान को हमेशा याद रखना चाहिए और उनके योगदान के लिए उन्हें दिल से याद करना चाहिए।
शहीदों की यादें हो गईं ताजा
सेवानिवृत सूबेदार रविंद्र कौशिक का कहना है कि मातृभूमि की रक्षा करने के लिए सैनिकों का अहम योगदान है। इसके कारण ही आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अमर उजाला की ओर से शहीदों के परिजनों की ओर सम्मान दिए जाने से उनकी यादें ताजा हो गईं। हमें शहीदों के परिजनों से मिलते रहना चाहिए, ताकि उन्हें ऐसा अनुभव न हो कि हम अकेले हैं।
शहीदों को कभी न भूलें
सेवानिवृत्त सूबेदार एवं जिला सैनिक कल्याण बोर्ड में तैनात आरआर शर्मा ने कहा कि सैनिक अपनी जान की परवाह न करते हुए शून्य डिग्री तापमान पर ऊंचे बर्फ के पहाड़ों पर मैदान में डटा रहता है। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर देता है लेकिन पीछे नहीं हटता। देश के लिए कुर्बान होने वाले शहीदों का हमें सम्मान करना चाहिए।