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मैनुअल तरीके से नहीं हो सकती पारदर्शी जांच : जनकराज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Mar 2025 12:59 AM IST
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Transparent inspection cannot be done manually : Janakraj
संवाद न्यूज एजेंसी
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पिहोवा। चावल की डिलीवरी के समय गुणवत्ता मशीन की बजाय मैनुअल तरीके से जांच करने के आदेश पर राइस मिलर्स में रोष गहरा गया है।
राइस मिलर्स एसोसिएशन हरियाणा के उप प्रधान जनक राज सिंगला ने बताया कि हाल ही में अधिकारियों द्वारा आदेश दिया गया है कि चावल डिलीवरी के समय चेक की जाने वाली क्वालिटी को मशीन की बजाय मैनुअल तरीके से जांचा जाएगा। जो किसी भी हाल में पारदर्शी नहीं है।
उन्होंने कहा कि कई साल से सरकार मशीनों द्वारा गुणवत्ता जांच करती आ रही है। अब सरकार को अपनी ही मशीनों पर विश्वास नहीं रहा। मैनुअल तरीके से जांच होने पर व्यापारियों को परेशान किए जाने का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि लगभग 60 प्रतिशत चावल की डिलीवरी हो चुकी है। अब बचे हुए माल को लेने में सरकार आनाकानी कर रही है। कभी पीवी तो कभी जांच के नाम पर व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है।
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जब सरकार को धान की खरीद करनी होती है। तब किसानों के दबाव के चलते व्यापारियों को सभी मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन बाद में नियमों में बदलाव करके व्यापारियों को परेशान करने का काम किया जा रहा है।
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सिंगला ने कहा कि चावल नीति में बदलाव की जरूरत है।
सरकार के नियमानुसार 67 किलो चावल प्रति क्विंटल राइस मिलर को देना होता है जबकि कोई भी बीज ऐसा नहीं है। जिसमें से 61 या 62 किलो से अधिक चावल निकलता हो। सरकार चाहे तो खुद सैंपल के तौर पर कुछ धान की खरीद करके चावल निकाल कर देख सकती है। उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव के कारण पहले ही राइस मिलर घाटे से गुजर रहा है। उधर, मौसम के कारण भी चावल की गुणवत्ता प्रभावित होकर सूखने के कगार पर है जिससे वजन घट रहा है। अगले महीने गेहूं का सीजन भी शुरू होने वाला है। लेबर भी इस सीजन में चली जाएगी। ऐसे में राइस मिलर को मजदूरों की कमी की समस्या से भी गुजरना पड़ेगा।
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