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Kurukshetra News: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के मामले का स्थानांतरण आवेदन खारिज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Oct 2025 02:08 AM IST
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Transfer application of case to Motor Accident Claims Tribunal dismissed
कुरुक्षेत्र। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) से संबंधित एक मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला वर्ष 2017 में हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है जिसके तहत 11 दिसंबर 2019 को एमएसीटी की ओर से दिए गए मुआवजा आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण और निष्पादन याचिका दायर की गई थी।
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आवेदक के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि तत्कालीन एमएसीटी ने यह गलत निष्कर्ष निकाला कि 4 फरवरी 2017 को हुई दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों में झारखंड लाइसेंसिंग प्राधिकरण की ओर से जारी वैध लाइसेंस का उल्लेख था। इसके अतिरिक्त उन्होंने आरोप लगाया कि एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी हेम राज के खिलाफ उनकी पूर्व शिकायत के कारण उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है। दूसरी ओर प्रतिवादी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने तर्क दिया कि उन्हें पीठासीन अधिकारी हेम राज की अदालत पर पूर्ण विश्वास है और मामले के स्थानांतरण की कोई आवश्यकता नहीं है।
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जिला न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार पुनरीक्षण और निष्पादन याचिकाएं केवल उसी अदालत में सुनी जा सकती हैं जिसने मूल मुआवजा आदेश पारित किया था या उसकी उत्तराधिकारी अदालत में। वर्तमान में हेम राज की अदालत के स्थान पर भूपेंद्र नाथ की अदालत उत्तराधिकारी है। इन याचिकाओं का स्थानांतरण अन्य अदालतों में संभव नहीं है। पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि आवेदक ने इनके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। सर्वोच्च न्यायालय के 1966 के एक निर्णय का उल्लेख करते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि केवल आशंका के आधार पर स्थानांतरण नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं। चूंकि आवेदक कोई पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके, इसलिए दोनों स्थानांतरण आवेदन खारिज कर दिए गए।
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