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Kurukshetra News: केयू में कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी की बारीकियों का दिया गया प्रशिक्षण
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के नृत्य एवं संगीत विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय नृत्य महोत्सव का वीरवार को समापन हो गया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हुई इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी की विभिन्न शैलियों का प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह में प्रो. शुचिस्मिता ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य को देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। ये युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भरतनाट्यम विशेषज्ञ के एस निश्रेया वरलक्ष्मी ने प्रतिभागियों को हस्त मुद्राओं, अभिनय और ताल-संगत का प्रशिक्षण दिया। डॉ. मानसी सक्सेना ने कथक की प्रस्तुति देकर दर्शकों की सराहना बटोरी। पहले दिन दीप्ति गुप्ता ने जयपुर घराने की कथक शैली की बारीकियां सिखाईं। वाणी माधव ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी।
आयोजन का उद्देश्य और संयोजन
नृत्य एवं संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने कार्यशालाओं का उद्देश्य बताया। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों और युवा कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ना है। कार्यक्रम का आयोजन कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग (हरियाणा) और सांस्कृतिक संस्था नृत्य धारा ने किया। इसमें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के नृत्य एवं संगीत विभाग तथा युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग का भी संयुक्त तत्वावधान रहा। कार्यक्रम के संयोजन में डॉ. मानसी सक्सेना की प्रमुख भूमिका रही, जबकि मंच संचालन डॉ. पुरुषोत्तम ने किया।
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समापन समारोह में प्रो. शुचिस्मिता ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य को देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। ये युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भरतनाट्यम विशेषज्ञ के एस निश्रेया वरलक्ष्मी ने प्रतिभागियों को हस्त मुद्राओं, अभिनय और ताल-संगत का प्रशिक्षण दिया। डॉ. मानसी सक्सेना ने कथक की प्रस्तुति देकर दर्शकों की सराहना बटोरी। पहले दिन दीप्ति गुप्ता ने जयपुर घराने की कथक शैली की बारीकियां सिखाईं। वाणी माधव ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी।
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आयोजन का उद्देश्य और संयोजन
नृत्य एवं संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने कार्यशालाओं का उद्देश्य बताया। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों और युवा कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ना है। कार्यक्रम का आयोजन कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग (हरियाणा) और सांस्कृतिक संस्था नृत्य धारा ने किया। इसमें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के नृत्य एवं संगीत विभाग तथा युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग का भी संयुक्त तत्वावधान रहा। कार्यक्रम के संयोजन में डॉ. मानसी सक्सेना की प्रमुख भूमिका रही, जबकि मंच संचालन डॉ. पुरुषोत्तम ने किया।
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