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डीएफएससी की खरीद पर भी भारी पड़ी ट्रेनिंग, पांच घंटे बंद रही खरीद
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:06 AM IST
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डीएफएससी की खरीद पर भी भारी पड़ी ट्रेनिंग, पांच घंटे बंद रही खरीद
- फोटो : Amar Ujala
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कड़ी प्रतीक्षा के बाद मंगलवार से भले ही धान खरीद सरकारी तौर पर शुरू हो गई है, लेकिन धान खरीद करने वाली एजेंसियां अभी भी आदेशों के पेंच में फंसी हुई है। जिसके चलते खरीद शुरू होने के दूसरे दिन भी खरीद एजेंसियां मंडियों तक नहीं पहुंच पाई। थानेसर अनाज मंडी में भी केवल खाद्य एवं पूर्ति विभाग की ओर से ही खरीद की गई जबकि धान से लबालब हुई मंडी में किसान धान बिकने की बाट जोहते रहे।
किसानों को बड़ा झटका उस समय भी लगा जब धान खरीद कर रही डीएफएससी के अधिकारियों को भी अचानक ही ई ट्रेडिंग के लिए करनाल में आयोजित की गई ट्रेनिंग में भेज दिया गया। जिससे लगभग पांच घंटे तक खरीद कार्य रुका रहा। हालांकि खरीद कार्य सुबह साढ़े दस बजे शुरू किया गया तो इसके कुछ देर बाद ही संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया तो वहीं ट्रेनिंग से लौटने के बाद देर शाम फिर खरीद शुरू की गई। बताया जा रहा है कि डीएफएससी ने 23300 क्विंटल धान की खरीद की है जबकि बुधवार को थानेसर अनाज मंडी में लगभग 30 हजार क्विंटल पीआर धान की आवक रही तो वहीं 1509 किस्म का धान महज 705 क्विंटल पहुंचा। बता दें कि थानेसर अनाज मंडी में डीएफएससी के अलावा हैफेड, हरियाणा एग्रो, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को भी अधिकृत किया गया है और बुधवार को हैफेड व हरियाणा एग्रो को खरीद करनी थी। उधर मंडी में उठान कार्य भी साथ ही शुरु कर दिया गया है, लेकिन धान की आवक बढ़ने से मंडी में अगले दो दिनों में ही जाम लगने की संभावना जताई जा रही है।
नहीं आए आदेश क्या करते : पारस गुप्ता
हैफेड के मैनेजर पारस गुप्ता का कहना है कि धान खरीद भले ही मंगलवार से बताई जा रही हो लेकिन उच्चधिकारियों के पास बुधवार को भी आदेश नहीं आए। जिसके चलते एजेंसी धान खरीद नहीं कर पाई। यहां तक कि धान खरीद ई ट्रेडिंग से होगी या मैनुअल यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया। लेकिन बुधवार देर सांय ई मेल से आदेश आ गए है और वीरवार को सुबह ही धान खरीद का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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ई सेंटर पर लटका ताला, नहीं दिखाई किसानों ने रुचि
भले ही प्रदेश सरकार ने ई ट्रेडिंग व मैनुअल दोनों ही तरीकों से धान खरीद को मंजूरी दी है। लेकिन किसान ई ट्रेडिंग के प्रति कोई रुझान नहीं दिखा रहे है। यही कारण है कि धान खरीद शुरू होने के दूसरे दिन भी एक भी किसान ने ई ट्रेडिंग के प्रति रचि नही दिखाई। शायद यही कारण रहा कि दोपहर बाद केंद्र पर ताला लटका दिया गया।
खरीद के नहीं, किसानों के भुगतान के ही आए आदेश
सरकार की ओर से बुधवार देर सांय तक भी धान खरीद के लिखित आदेश नहीं आए। सरकार की ओर से मंगलवार को देर सांय भी फैक्स के माध्यम से जहां धान खरीद करने को कहा गया तो वहीं यह फैक्स विशेष तौर पर धान का भुगतान आढ़तियों के मार्फत किए जाने के आदेश दिया गया। बुधवार देर सांय तक भी ई ट्रेडिंग व मैनुअल तरीके को लेकर कोई आदेश नहीं आया। इन्हीं आदेशों की ही खरीद एजेंसियां भी बाट जोह रही है।
कम रेट पर की जा रही खरीद
सरकार की ओर से धान खरीद शुरू किए जाने के बावजूद भी किसानों को पूरा दाम नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों को धान में नमी बताई जा रही है तो वहीं सूखी धान का भी पूरा रेट नहीं लगाया जा रहा। हालांकि पर्चा पूरे रेट का काटा जा रहा है, लेकिन मंडी जानकारों की मानें तो हर किसान को एक क्विंटल पर लगभग 50-60 रुपये का चूना लगाया जा रहा है जबकि इसी के चलते ही आढ़तियों को भी आढ़त कम होने का चूना लग रहा है। इसके बावजूद भी कोई खुलकर इसके विरोध में बोलने को तैयार नहीं है।
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किसानों को बड़ा झटका उस समय भी लगा जब धान खरीद कर रही डीएफएससी के अधिकारियों को भी अचानक ही ई ट्रेडिंग के लिए करनाल में आयोजित की गई ट्रेनिंग में भेज दिया गया। जिससे लगभग पांच घंटे तक खरीद कार्य रुका रहा। हालांकि खरीद कार्य सुबह साढ़े दस बजे शुरू किया गया तो इसके कुछ देर बाद ही संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया तो वहीं ट्रेनिंग से लौटने के बाद देर शाम फिर खरीद शुरू की गई। बताया जा रहा है कि डीएफएससी ने 23300 क्विंटल धान की खरीद की है जबकि बुधवार को थानेसर अनाज मंडी में लगभग 30 हजार क्विंटल पीआर धान की आवक रही तो वहीं 1509 किस्म का धान महज 705 क्विंटल पहुंचा। बता दें कि थानेसर अनाज मंडी में डीएफएससी के अलावा हैफेड, हरियाणा एग्रो, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को भी अधिकृत किया गया है और बुधवार को हैफेड व हरियाणा एग्रो को खरीद करनी थी। उधर मंडी में उठान कार्य भी साथ ही शुरु कर दिया गया है, लेकिन धान की आवक बढ़ने से मंडी में अगले दो दिनों में ही जाम लगने की संभावना जताई जा रही है।
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नहीं आए आदेश क्या करते : पारस गुप्ता
हैफेड के मैनेजर पारस गुप्ता का कहना है कि धान खरीद भले ही मंगलवार से बताई जा रही हो लेकिन उच्चधिकारियों के पास बुधवार को भी आदेश नहीं आए। जिसके चलते एजेंसी धान खरीद नहीं कर पाई। यहां तक कि धान खरीद ई ट्रेडिंग से होगी या मैनुअल यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया। लेकिन बुधवार देर सांय ई मेल से आदेश आ गए है और वीरवार को सुबह ही धान खरीद का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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ई सेंटर पर लटका ताला, नहीं दिखाई किसानों ने रुचि
भले ही प्रदेश सरकार ने ई ट्रेडिंग व मैनुअल दोनों ही तरीकों से धान खरीद को मंजूरी दी है। लेकिन किसान ई ट्रेडिंग के प्रति कोई रुझान नहीं दिखा रहे है। यही कारण है कि धान खरीद शुरू होने के दूसरे दिन भी एक भी किसान ने ई ट्रेडिंग के प्रति रचि नही दिखाई। शायद यही कारण रहा कि दोपहर बाद केंद्र पर ताला लटका दिया गया।
खरीद के नहीं, किसानों के भुगतान के ही आए आदेश
सरकार की ओर से बुधवार देर सांय तक भी धान खरीद के लिखित आदेश नहीं आए। सरकार की ओर से मंगलवार को देर सांय भी फैक्स के माध्यम से जहां धान खरीद करने को कहा गया तो वहीं यह फैक्स विशेष तौर पर धान का भुगतान आढ़तियों के मार्फत किए जाने के आदेश दिया गया। बुधवार देर सांय तक भी ई ट्रेडिंग व मैनुअल तरीके को लेकर कोई आदेश नहीं आया। इन्हीं आदेशों की ही खरीद एजेंसियां भी बाट जोह रही है।
कम रेट पर की जा रही खरीद
सरकार की ओर से धान खरीद शुरू किए जाने के बावजूद भी किसानों को पूरा दाम नहीं मिल पा रहा है। कई किसानों को धान में नमी बताई जा रही है तो वहीं सूखी धान का भी पूरा रेट नहीं लगाया जा रहा। हालांकि पर्चा पूरे रेट का काटा जा रहा है, लेकिन मंडी जानकारों की मानें तो हर किसान को एक क्विंटल पर लगभग 50-60 रुपये का चूना लगाया जा रहा है जबकि इसी के चलते ही आढ़तियों को भी आढ़त कम होने का चूना लग रहा है। इसके बावजूद भी कोई खुलकर इसके विरोध में बोलने को तैयार नहीं है।