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आज विष्कुंभ और प्रीति योग के बीच शुरू होगा महादेव का प्रिय श्रावण मास

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jul 2022 02:36 AM IST
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Today Mahadev's favorite Shravan month will start between Vishkumbh and Preeti Yoga
आज वीरवार से विष्कुंभ और प्रीति योग के बीच भगवान शिव का अति प्रिय श्रावण मास शुरू होने जा रहा है। मान्यता है कि यह योग शिवजी की भक्ति के लिए बहुत फलदायी हैं। इस श्रावण में चार सोमवार होंगे और 11 अगस्त को श्रावण मास संपन्न होगा। श्रावण मास के लिए जिले के सभी शिवालयों ने तैयारी पूरी कर ली है। ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में श्रावण और शिवरात्रि के लिए विशेष तैयारी की गई है। श्रावण मास में हर रोज सुबह पांच से छह बजे भगवान संगमेश्वर महादेव का 11 हजार बिल्वपत्र से अभिषेक किया जाएगा, जिसे मंदिर के फेसबुक पेज पर लाइव दिखाया जाएगा।
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वहीं नौ अगस्त को मंदिर की ओर से भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया जाएगा। अगले दिन देशभर से संत-महात्मा मंदिर पहुंचेंगे। मंदिर में प्रतिदिन दीमक की बांबी से लाई गई मिट्टी से निर्मित पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा अर्चना यजमानों द्वारा होगी। मंदिर के प्रबंधक महंत सचिव विश्वनाथ गिरी ने बताया श्रावण में हर दिन दूध, दही, घी, गंगा जल, गन्ने का रस व शहद से शिवलिंग का अखंड रुद्राभिषेक होगा। सुबह पांच से छह बजे 11 हजार बिल्वपत्रों से विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। श्रावण माह में हर शाम को फल, फूल, मिठाई, ड्राई फ्रूट, रंग, सब्जी, अनाज, चावल, गेहूं सहित विभिन्न वस्तुओं से भगवान शिव का भव्य शृंगार होगा। उन्होंने बताया कि श्रावण माह में हर दिन पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा अर्चना की जाएगी। दीमक की बांबी से लाई गई मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा। पूजा अर्चना के बाद इन शिवलिंग का विसर्जन होगा।
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दीमक के बीच से मिला था शिवलिंग
यहां शिवलिंग दीमक की बांबी के बीच से मिला था। महात्मा गणेश गिरि अपने शिष्यों एक दिन वह झाड़ियों की तरफ घूम रहे थे। तब उन्हें घास के बीच एक दीमक बांबी दिखाई दी, जिसे चिमटे से कुरेदकर देखा तो उनका चिमटा किसी ठोस चीज से टकराया। बांबी को हटाकर देखा तो उन्हें यहां बड़ा सुंदर और तेजस्वी शिवलिंग दिखाई दिया। इस शिवलिंग को यहां से उखाड़ कर किसी साफ स्थान पर स्थापित करने के लिए खुदाई की तो शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। तब भगवान शिव की प्रेरणा से शिवलिंग को वहां स्थापित कर दिया गया। इसके बाद 1946 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ।
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26 जुलाई की अर्ध रात्रि कांवड़िए चढ़ाएंगे जल : भूषण
सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने कहा कि 26 जुलाई को अर्धरात्रि में कांवड़िये जल चढ़ाएंगे। कांवड़ियों के लिए रात्रि 12 बजे मंदिर के द्वार खुले रखे जाएंगे। मंदिर की ओर से 25 जुलाई को पांच जरूरतमंद कन्याओं की शादी कराई जाएगी। वहीं नौ अगस्त को भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा मंदिर प्रांगण से शुरू होकर विभिन्न रास्तों से होते हुए सरस्वती तीर्थ पर संपन्न होगी। सरस्वती पर पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा अर्चना के बाद शिवलिंग का विसर्जन किया जाएगा।
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