फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Three times the load capacity of the extended maternal aunt merge, Kurukshetra

क्षमता से तीन गुना भार ने बढ़ाया एलएनजेपी का मर्ज

Wed, 05 Oct 2016 12:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सादिक अली
ब्यूरो/अमर उजाला, सादिक अली Updated Wed, 05 Oct 2016 12:42 AM IST
विज्ञापन
Three times the load capacity of the extended maternal aunt merge, Kurukshetra
क्षमता से तीन गुना भार ने बढ़ाया एलएनजेपी का मर्ज - फोटो : Amar Ujala
जिले के सबसे बड़े अस्पताल है एलएनजेपी में क्षमता से ज्यादा लोड का मर्ज पैर पसार रहा है। अस्पताल में आउट डोर और इन डोर मरीजों की संख्या के यहां इस कदर बढ़ गई है कि यहां की सारे संसाधन ही बौने से नजर आने लगे हैं। मरीजों के आधार पर डॉक्टरों की नियुक्तियों की बातें की जा रही है, लेकिन यहां की हकीकत यह है कि जितने पद 50 बेड के अस्पताल में स्वीकृत हुए थे, उतने भी डॉक्टर फिलहाल नहीं है। ऐसे में मौजूदा डॉक्टरों पर मरीजों का भार भी लगातार बढ़ रहा है। अस्पताल में मौजूदा मशीनों की भी यही स्थिति है। वायरल सीजन के चलते मशीनों पर भी क्षमता से ज्यादा भार पड़ रहा है। ऐसे में यह अस्पताल खुद ही बीमार हो रहा है। हालांकि सरकार ने 200 बेड के लिए अलग से बिल्डिंग स्वीकृत की है, लेकिन उसमें अभी काफी वक्त लगने की उम्मीद है। फिलहाल अस्पताल में मरीजों के साथ ही अस्पताल प्रशासन की स्थिति दयनीय ही है। अमर उजाला की खुलासा करती रिपोर्ट -
विज्ञापन


एलएनजेपी अस्पताल में 50 बेड स्वीकृत थे। धीरे धीरे मरीज बढने लगे और अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त बेड लगाने शुरू किए। फिर इसे 100 बेड का अस्पताल कर दिया गया। अब इस अस्पताल की स्थिति और ज्यादा खराब होने लगी है। फिलहाल चल रहे वायरल सीजन में मरीजों की संख्या में दो गुना तक इजाफा हुआ है। यहां आम दिनों में  आउटडोर में मरीजों की संख्या दो हजार की संख्या 1800 से 2000 तक रहती है। लेकिन जब से वायरल फैला है तब से आउटडोर में 2500 से लेकर चार हजार तक मरीज आए हैं। यहां कई मशीनें पुरानी है और उनकी क्षमता भी ज्यादा नहीं है। ऐसे में आए दिन मशीनें खराब भी होती रहती है।
विज्ञापन


इनडोर में तीन गुना मरीज
अस्पताल में कुल 100 बेड हैं। लेकिन इन दिनों यहां भर्ती मरीजों की संख्या तीन-गुना तक हैं। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले छह दिनों में भर्ती मरीजों की संख्या 300 से लेकर करीब 360 तक भी पहुंची है। मंगलवार को भी मरीजों की संख्या 300 के आसपास ही थी। ऐसे में अस्पताल प्रशासन एक एक बेड पर दो-दो, तीन-तीन मरीजों को रखने के लिए मजबूर है। सूत्रों की माने तो सबसे ज्यादा बुरी स्थिति जच्चा-बच्चा वार्ड की है। यहां एक एक बेड पर तकरीबन हर दिन तीन-तीन महिलाओं को रखने की स्थिति बनती है। 18 बेड की नर्सरी में मंगलवार को भी 21 मरीज मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


जुगाड़ भी आते हैं काम
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों को अन्य विकल्पों के सहारे भी रखा जाता है। जब एक एक बेड पर क्षमता से ज्यादा मरीज हो जाते हैं तब बैंच, स्ट्रेचर आदि पर भी मरीजों को रखना पड़ता है। इमरजेंसी में भी ऐसा ही नजारा देखा जा सकता है। जहां मरीजों को स्ट्रेचर पर ही इलाज देना पड़ता है।

मरीजों के लिए जगह नहीं, परिजनों को कहां रखे
भर्ती मरीजों के साथ कम से कम एक परिजन के रहने की छूट अमूमन अस्पतालों में होती है। लेकिन एलएनजेपी में स्थिति यह है कि यहां भर्ती मरीजों के लिए ही पर्याप्त जगह नहीं है, ऐसे में परिजनों की मौजूदगी से स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। मरीज के परिजनों को अमूमन अस्पताल परिसर में ही बैठना पड़ता है।

जितने पद मंजूर, उतने भी नहीं है डॉक्टर
एलएनजेपी अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 42 पद स्वीकृत हैं। लेकिन फिलहाल यहां 35 ही डॉक्टर तैनात हैं।  इनमें से भी कुछ एक डेप्यूटेशन पर हैं, एक दो डॉक्टर अवकाश पर रहते हैं, ऐसे में हर दिन औसतन 25 से 30 डॉक्टर ही ड्यूटी पर रहते हैं। डेंटल में तीन पद स्वीकृत हैं, जिसमें दो डेंटिस्ट और एक सीनियर डेंटिस्ट की पोस्ट हैं। लेकिन है फिलहाल एक ही। डॉक्टरों की कमी के कारण जो डॉक्टर मौजूद हैं उन्हें पर ही आउटडोर में आने वाले हजारों मरीजों को देखने की मजबूरी है। डॉक्टरों की माने तो आउटडोर में इन दिनों एक डॉक्टर पर करीब 150 से 200 मरीजों का भार एक समय में रहता है। जबकि एक मरीज को कम से कम पांच मिनट चाहिए ही चाहिए। ताकि उसे सही ढंग से जांच सके और दवा लिख सकें। लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण इतना वक्त भी एक मरीज को नहीं दे पाते। वर्क लोड बढ़ने के कारण डॉक्टरों के व्यवहार में तल्खी आ जाती है। जिससे मरीज कई बार नाराजगी भी जता देते हैं। कई बार तो हंगामे की भी स्थिति बन जाती है।

मशीनों पर भी अतिरिक्त भार
अस्पताल से जुड़े लोगों का कहना है कि अस्पताल में लगी सीबीसी मशीन की क्षमता 50 जांच एक दिन में करने की है। लेकिन मरीजों की संख्या के हिसाब से हर रोज तकरीबन 200 से ज्यादा टेस्ट इस मशीन पर हो रहे हैं। ऐेसे में मशीन कितने दिन काम दे सकती है। फिलहाल भी सीबीसी मशीन खराब हो गई। इसी तरह यहां लगी एक्सरे मशीन भी बेहद पुरानी हो चुकी है। इसकी क्षमता भी 50 से 60 जांच की है, लेकिन 150 के करीब जांच अमूमन की जाती है। जिससे स्टाफ भी परेशान और मशीन कभी भी बंद होने की स्थिति में आ सकती है।

200 बेड को मंजूरी पर सुविधा दूर की कौड़ी
राज्य सरकार ने एलएनजेपी में 200 बेड का अलग से भवन बनाने की मंजूरी दे दी है। बताया जाता है कि इसके लिए राशि भी जारी की जा चुकी है, लेकिन फिलहाल इसका काम शुरू नहीं हुआ है। भवन बनने से लेकर इसमें सभी सुविधाएं जुटाने और इसे शुरू करने में अभी लंबा वक्त लगने की संभावना हैं। ऐसे में मरीजों के साथ अस्पताल प्रशासन को भी फिलहाल व्यवस्थाओं के मर्ज से गुजरना ही होगा।  


यह सही है कि मेन पावर की कमी हैं। मरीजों की संख्या के हिसाब से बेड भी कम हैं। ऐसे में एक एक बेड पर दो-दो, तीन तीन मरीजों को रखना पड़ता है। हर माह सरकार को भी इसकी रिपोर्ट भेजी जाती है। सौ बेड के भवन के लिए सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसका फायदा मरीजों को मिलेगा। डॉक्टरों की भर्ती के लिए भी सरकार ने तैयारी की है। जो मशीनें खराब होती है उन्हें तुरंत सुधरवा लिया जाता है। हम सभी अपने स्तर पर मरीजों को बेहतर इलाज देने का प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ. एसके नैन, सीएमओ सिविल अस्पताल कुरुक्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed