{"_id":"4697463488b92c6112cbaaf8b6df3681","slug":"three-thousand-five-hundred-students-ultimatum-to-nit","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनआईटी को पैंतीस सौ छात्रों का अल्टीमेटम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनआईटी को पैंतीस सौ छात्रों का अल्टीमेटम
अमर उजाला, पानीपत
Updated Thu, 17 Apr 2014 12:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुरुक्षेत्र। देश के 30 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में सातवें रैंक का गौरव रखने वाले एनआईटी कुरुक्षेत्र के 3500 होनहार विद्यार्थी आंदोलन की राह पर हैं।
एनआईटी के निदेशालय में बुधवार को जो मांगपत्र डायरी कराया है, उसमें आंदोलन की चिंगारी साफ झलक रही है। विद्यार्थियों ने संस्थान को 21 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे 21 अप्रैल को मेस का बायकाट कर धरने पर बैठ जाएंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी एनआईटी प्रशासन की होगी।
गौरतलब है कि मांगपत्र में एनआईटी के विद्यार्थियों ने आंदोलन का ऐलान किया है। इन्होंने अपनी मांगों की फेहरिस्त एनआईटी के निदेशालय में डायरी कराने के बाद इसकी 1-1 कॉपी महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, एचआरएम, एमएचआरडी नई दिल्ली, मुख्यमंत्री हरियाणा, चेयरपर्सन बीओजी एनआईटी हरियाणा, डीसी और एसपी कुरुक्षेत्र को भेजी है।
विज्ञापन
इसमें स्पष्ट लिखा है कि अगर 21 अप्रैल तक छात्रहित में उनके मुद्दे हल नहीं हुए तो 21 अप्रैल की शाम से धरने पर बैठना पड़ेगा। बहरहाल विद्यार्थियों का कहना है कि वे पिछले छह माह से अपनी मांगों को रख रहे हैं, इसकी शुरुआत उन्होंने वार्डन से की थी, चार माह पहले उन्होंने अपनी मांग चीफ वार्डन को सौंपी, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई न होने पर दो माह पहले फरवरी में उन्होंने 3500 विद्यार्थियों के हस्ताक्षर कराकर एनआईटी निदेशक को मांगपत्र सौंपा था। इस मामले को अब दो माह बीत चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आखिरकार बुधवार को विद्यार्थियों ने एनआईटी के निदेशालय में जाकर अपनी मांग को डायरी कराया और इसकी कापी राष्ट्रपति सहित उक्त लोगों को भेजी है। यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र मेस का बायकाट करके 21 अप्रैल से धरने पर बैठेंगे और इसके लिए जिम्मेदार एनआईटी प्रशासन होगा। गौरतलब है कि अभी तक जितनी बार एनआईटी के विद्यार्थियों ने आंदोलन किया, उसमें अधिकतर बार सरकार और एनआईटी प्रशासन को झुकना पड़ा है।
एनआईटी के विद्यार्थियों ने निदेशक को लिखा है कि जिन समस्याओं के मूल्यांकन के लिए कंपीटेंट अथॉरिटी को पिछले छह महीने पहले निवेदन किया था, उस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। विद्यार्थियों का कहना है कि पहले वार्डन, फिर चीफ वार्डन और उसके बाद निदेशक के संज्ञान में भी पूरा मामला लाया जा चुका है।
एनआईटी विद्यार्थियों ने बिजली बिल के बारे में लिखा कि केंद्र से अनुदान प्राप्त देश के किसी भी संस्थान की ओर से छात्रों से बिजली बिल नहीं लिया जाता। वहीं एनआईटी कुरुक्षेत्र ऐसा संस्थान है, जहां बिजली बिल की ऐवज में विद्यार्थियों से पैसे वसूल किए जा रहे हैं। मांग पत्र में ये भी सवाल उठाया गया है कि जबएनआईटी जैसे अन्य संस्थानों में केंद्र सरकार की ओर से बिजली बिल के लिए अनुदान दिया जा रहा है, तो विद्यार्थियों को बिजली बिल में छूट क्यों नहीं दी जा रही। विद्यार्थियों के अनुसार मेस बिल में आर्थिक सहायता (सब्सिडी) लागू की जाए, क्योंकि ऐसे कई छात्र हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है
मांग पत्र में मेस वर्करों की मजदूरी के बिल जोड़ने का मुद्दा भी उठाया गया। गौरतलब है कि कर्मियाें की मजदूरी भी छात्रों के मेस बिल में जोड़ी जाती है, जबकि कर्मियों की मजदूरी के लिए केंद्र अनुदान देता है।
छात्रों ने बताया कि उन्होंने आरटीआई से पता किया है कि देश के अन्य सभी तकनीकि संस्थानों में छात्र अकादमिक परिषद है, लेकिन एनआईटी कुरुक्षेत्र में छात्रहित में छात्र अकादमिक परिषद बनाने की मांग कई बार उठ चुकी है। लेकिन इस मांग को आज तक पूरा नहीं किया।
विज्ञापन
एनआईटी के निदेशालय में बुधवार को जो मांगपत्र डायरी कराया है, उसमें आंदोलन की चिंगारी साफ झलक रही है। विद्यार्थियों ने संस्थान को 21 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे 21 अप्रैल को मेस का बायकाट कर धरने पर बैठ जाएंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी एनआईटी प्रशासन की होगी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि मांगपत्र में एनआईटी के विद्यार्थियों ने आंदोलन का ऐलान किया है। इन्होंने अपनी मांगों की फेहरिस्त एनआईटी के निदेशालय में डायरी कराने के बाद इसकी 1-1 कॉपी महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, एचआरएम, एमएचआरडी नई दिल्ली, मुख्यमंत्री हरियाणा, चेयरपर्सन बीओजी एनआईटी हरियाणा, डीसी और एसपी कुरुक्षेत्र को भेजी है।
विज्ञापन
इसमें स्पष्ट लिखा है कि अगर 21 अप्रैल तक छात्रहित में उनके मुद्दे हल नहीं हुए तो 21 अप्रैल की शाम से धरने पर बैठना पड़ेगा। बहरहाल विद्यार्थियों का कहना है कि वे पिछले छह माह से अपनी मांगों को रख रहे हैं, इसकी शुरुआत उन्होंने वार्डन से की थी, चार माह पहले उन्होंने अपनी मांग चीफ वार्डन को सौंपी, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई न होने पर दो माह पहले फरवरी में उन्होंने 3500 विद्यार्थियों के हस्ताक्षर कराकर एनआईटी निदेशक को मांगपत्र सौंपा था। इस मामले को अब दो माह बीत चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आखिरकार बुधवार को विद्यार्थियों ने एनआईटी के निदेशालय में जाकर अपनी मांग को डायरी कराया और इसकी कापी राष्ट्रपति सहित उक्त लोगों को भेजी है। यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र मेस का बायकाट करके 21 अप्रैल से धरने पर बैठेंगे और इसके लिए जिम्मेदार एनआईटी प्रशासन होगा। गौरतलब है कि अभी तक जितनी बार एनआईटी के विद्यार्थियों ने आंदोलन किया, उसमें अधिकतर बार सरकार और एनआईटी प्रशासन को झुकना पड़ा है।
एनआईटी के विद्यार्थियों ने निदेशक को लिखा है कि जिन समस्याओं के मूल्यांकन के लिए कंपीटेंट अथॉरिटी को पिछले छह महीने पहले निवेदन किया था, उस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। विद्यार्थियों का कहना है कि पहले वार्डन, फिर चीफ वार्डन और उसके बाद निदेशक के संज्ञान में भी पूरा मामला लाया जा चुका है।
एनआईटी विद्यार्थियों ने बिजली बिल के बारे में लिखा कि केंद्र से अनुदान प्राप्त देश के किसी भी संस्थान की ओर से छात्रों से बिजली बिल नहीं लिया जाता। वहीं एनआईटी कुरुक्षेत्र ऐसा संस्थान है, जहां बिजली बिल की ऐवज में विद्यार्थियों से पैसे वसूल किए जा रहे हैं। मांग पत्र में ये भी सवाल उठाया गया है कि जबएनआईटी जैसे अन्य संस्थानों में केंद्र सरकार की ओर से बिजली बिल के लिए अनुदान दिया जा रहा है, तो विद्यार्थियों को बिजली बिल में छूट क्यों नहीं दी जा रही। विद्यार्थियों के अनुसार मेस बिल में आर्थिक सहायता (सब्सिडी) लागू की जाए, क्योंकि ऐसे कई छात्र हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है
मांग पत्र में मेस वर्करों की मजदूरी के बिल जोड़ने का मुद्दा भी उठाया गया। गौरतलब है कि कर्मियाें की मजदूरी भी छात्रों के मेस बिल में जोड़ी जाती है, जबकि कर्मियों की मजदूरी के लिए केंद्र अनुदान देता है।
छात्रों ने बताया कि उन्होंने आरटीआई से पता किया है कि देश के अन्य सभी तकनीकि संस्थानों में छात्र अकादमिक परिषद है, लेकिन एनआईटी कुरुक्षेत्र में छात्रहित में छात्र अकादमिक परिषद बनाने की मांग कई बार उठ चुकी है। लेकिन इस मांग को आज तक पूरा नहीं किया।