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कुरुक्षेत्र में बड़ा हादसा: बच्चे को डूबता देख मारकंडा में कूदे पांच कांवड़िए, दो बचकर निकले; तीन की तलाश जारी
Fri, 14 Jul 2023 08:34 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहाबाद, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहाबाद, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 14 Jul 2023 08:34 PM IST
सार
तीन की गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम तलाश कर रही है। पांच कांवड़िए मारकंडा नदी में बच्चे को डूबता देख कूदे थे, जो तेज बहाव में बह गए। दो ने किसी तरह जान बचा ली। तीन का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया।
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नदी किनारे बैठ विलाप करते कांवड़ियों के अभिभावक ।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र में मारकंडा नदी में पांच कांवड़िए बह गए, जिनमें से दो को बाहर निकाल लिया गया, जबकि तीन कांवड़ियों की देर शाम तक एनडीआरएफ , गोताखोरों और सिंचाई विभाग के कर्मचारी अलग-अलग टीमें बना कर तलाश कर रहे हैं, लेकिन कोई सुराग नहीं लग पाया।
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गांव सुलखनी के सरपंच गुरबक्श सिंह ने बताया कि शुक्रवार को गांव सुलखनी के रमन पुत्र राजपाल, अजीत सिंह पुत्र बलि राम, गुरसेवक सिंह पुत्र जसबीर, गुरप्रीत पुत्र बलबीर और राजेश पुत्र गुलजार सिंह हरिद्वार से कांवड़ लाने के बाद मारकंडा मंदिर में रुके हुए थे। जिसके बाद मारकंडा नदी में एक छोटी दिवार से इन युवाओं ने एक बच्चा नदी में कूदता हुआ देखा, जिसके बाद उन्हें लगा की वह बचा डूब रहा है। इसके बाद उन सभी ने बिना कुछ सोचे समझे नदी में बच्चे को बचाने के लिए छलांग लगा दी।
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इन पांचो में से गुरप्रीत और राजेश किसी तरह नदी किनारे सुरक्षित पहुंच गए, लेकिन रमन, अजीत और गुरसेवक का कोई पता नहीं चल सका। मामले की सूचना मिलते ही हरियाणा शुगर फेड के चेयरमैन रामकरण, नगरपालिका प्रधान सहित सिंचाई विभाग के कई अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंची।
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युवाओं की तलाश करने के लिए आस पास के कई गोताखोर और अंबाला से एनडीआरएफ की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। एनडीआरएफ की टीम और सिंचाई विभाग के कर्मचारियों सहित गोताखोरों ने अलग-अलग टीम बना कर नदी में करीब दो किलोमीटर तक युवाओं की तलाश की, जो देर शाम तक जारी रही।
नदी से सुरक्षित बाहर निकले गुरप्रीत और राजेश ने बताया कि वह सभी नदी किनारे नहा रहे थे और बच्चे को डूबता देख सबसे पहले रमन और उसके बाद अजीत और गुरसेवक ने छलांग लगाई थी। जिसके बाद उन्हें डूबता देख हम दोनों ने छलांग लगाई। गुरप्रीत और राजेश ने बताया कि नदी में पानी का बहाव बहुत तेज था और उन सभी को तैरना भी नहीं आता था। मगर इंसानियत के नाते उन्होंने बच्चे को बचाने के लिए नदी में छलांग लगाई थी।
जिसको समझा बच्चा, वह था तैराक
बताया जा रहा है कि मारकंडा नदी के किनारे झुग्गी झोपड़ियों में कई ऐसे परिवार रहते हैं, जिनके परिवारों में बड़ों से लेकर बच्चों तक को तैरना आता है। नदी में पानी आने के बाद अक्सर यहां बच्चे नदी में तैरते दिखाई देते हैं। मगर शुक्रवार को जब एक बच्चे ने नलवी रोड मारकंडा पुल के ऊपर से नदी में छलांग लगाई, तो सुलखनी के इन युवाओं ने सोचा कि बच्चा नदी में डूब रहा है। इसके बाद एक एक करके सभी युवाओं ने नदी में छलांग लगा दी। उसके बाद बच्चा तो नदी से सुरक्षित बाहर आ गया, लेकिन यह सभी युवा तेज रफ्तार पानी में बह गए।