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Kurukshetra News: इस्माईलाबाद के तीन चिकित्सक झांसा में कर रहे एमएलसी ड्यूटी
Sun, 03 Aug 2025 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 03 Aug 2025 02:19 AM IST
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इस्माईलाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों मरीजों को इलाज लेने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। केंद्र में चिकित्सकों के छह पद है, जिनमें से तीन पदों पर चिकित्सक नियुक्त है।
वहीं इन तीन चिकित्सकों में से भी चार से पांच दिन सीएचसी झांसा में एमएलसी ड्यूटी ली जा रही है। ऐसा होने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस्माइलाबाद में मरीजों को परेशानी होती है।
चिकित्सक के दूसरे सेंटर पर जाने से चार से पांच दिन मूलत: ड्यूटी नहीं कर पाते जिसके चलते ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में मरीज निजी अस्पतालों में जाकर इलाज लेने पर मजबूर है।
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पिहोवा और अंबाला के बीच नेशनल हाईवे पर यह एकमात्र सरकारी अस्पताल है, जिस वजह से हर समय आपातकालीन सेवाओं की जरूरत पड़ती है।
महज हो रही घोषणाएं, व्यवस्था कुछ भी नहीं : मुख्यमंत्री ने पिहोवा रैली के दौरान पीएचसी को सीएचसी में तब्दील करने की घोषणा की थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग यहां पर स्टाफ की संख्या को बढ़ाने के बजाय कम करता जा रहा है। जिसके कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगे दामों पर इलाज करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना करीब 100 से 120 मरीज इलाज लेने पहुंच रहे हैं। लेकिन उन्हें बिना इलाज लिए बैरंग लौटना पड़ रहा है। विभाग पीएचसी में ही मरीजों को इलाज मुहिया नहीं करा पा रहा।
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वहीं इन तीन चिकित्सकों में से भी चार से पांच दिन सीएचसी झांसा में एमएलसी ड्यूटी ली जा रही है। ऐसा होने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस्माइलाबाद में मरीजों को परेशानी होती है।
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चिकित्सक के दूसरे सेंटर पर जाने से चार से पांच दिन मूलत: ड्यूटी नहीं कर पाते जिसके चलते ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में मरीज निजी अस्पतालों में जाकर इलाज लेने पर मजबूर है।
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पिहोवा और अंबाला के बीच नेशनल हाईवे पर यह एकमात्र सरकारी अस्पताल है, जिस वजह से हर समय आपातकालीन सेवाओं की जरूरत पड़ती है।
महज हो रही घोषणाएं, व्यवस्था कुछ भी नहीं : मुख्यमंत्री ने पिहोवा रैली के दौरान पीएचसी को सीएचसी में तब्दील करने की घोषणा की थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग यहां पर स्टाफ की संख्या को बढ़ाने के बजाय कम करता जा रहा है। जिसके कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगे दामों पर इलाज करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना करीब 100 से 120 मरीज इलाज लेने पहुंच रहे हैं। लेकिन उन्हें बिना इलाज लिए बैरंग लौटना पड़ रहा है। विभाग पीएचसी में ही मरीजों को इलाज मुहिया नहीं करा पा रहा।