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बारिश से मारकंडा नदी में आया हजारों क्यूसेक पानी
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लंबे समय बाद मारकंडा नदी में पानी आया है। फिलहाल नदी के जलभराव से किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। मारकंडा नदी में पहाड़ों के पानी के साथ-साथ कालाअंब व साढौरा नदी तथा वेघना नदी का भी पानी पहुंचता है। इस बार बरसाती मौसम में 8 हजार 186 क्यूसेक पानी पहुंचा है।
गेज रीडर रविंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार तड़के ठीक से पानी आना शुरू हुआ और इसका लेवल 8 हजार 186 क्यूसेक तक आंका गया है। उन्होंने बताया कि पहाड़ों पर बरसात जारी है और मारकंडा नदी में पानी इससे ज्यादा आ सकता है। उन्होंने बताया कि अभी आए इस पानी से कोई नुकसान नहीं है। बाड़ का पानी निकटवर्ती गांवों व बाजीगर कॉलोनी तथा मारकंडा कॉलोनी में नुकसान पहुंचाता है।
यह बरसाती पानी गांव अरूप नगर, गुमटी, दयाल नगर, मुगल माजरा, मदनपुर व मोहनपुर आदि गांवों के अलावा अनेक डेरे भी बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। जब भी मारकंडा नदी में ज्यादा पानी आता है तब ही कॉलोनी वासियों को इस की मार सहनी पड़ती है। मानसून की बेरुखी के कारण शाहाबाद में ऋषि मारकंडेश्वर मंदिर के पास उत्तर में बहने वाली मारकंडा नदी की गोद अभी तक जल से सूनी पड़ी थी, जिस कारण नदी की रेत आग से भी ज्यादा तप रही थी और लोग टकटकी लगाकर मानसून के आने तथा नदी में पानी बहने की प्रतीक्षा कर रह रहे थे। मारकंडा नदी के जल से हरे-भरे होने वाले खेत भी नदी में पानी न आने के कारण सूखते जा रहे थे और इस नदी के जल पर निर्भर किसानों के खेतों में धान की रोपाई मुश्किल हो गई है। लोगों का मानना है कि हर वर्ष जून माह के आखिरी तथा जुलाई माह के शुरुआती दिनों में एक-दो बरसात पड़ने के बाद मारकंडा नदी में जलधारा बह उठती है, लेकिन लगातार बदल रहे मौसम के कारण अब तक नदी में पानी नहीं आया था।
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गेज रीडर रविंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार तड़के ठीक से पानी आना शुरू हुआ और इसका लेवल 8 हजार 186 क्यूसेक तक आंका गया है। उन्होंने बताया कि पहाड़ों पर बरसात जारी है और मारकंडा नदी में पानी इससे ज्यादा आ सकता है। उन्होंने बताया कि अभी आए इस पानी से कोई नुकसान नहीं है। बाड़ का पानी निकटवर्ती गांवों व बाजीगर कॉलोनी तथा मारकंडा कॉलोनी में नुकसान पहुंचाता है।
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यह बरसाती पानी गांव अरूप नगर, गुमटी, दयाल नगर, मुगल माजरा, मदनपुर व मोहनपुर आदि गांवों के अलावा अनेक डेरे भी बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। जब भी मारकंडा नदी में ज्यादा पानी आता है तब ही कॉलोनी वासियों को इस की मार सहनी पड़ती है। मानसून की बेरुखी के कारण शाहाबाद में ऋषि मारकंडेश्वर मंदिर के पास उत्तर में बहने वाली मारकंडा नदी की गोद अभी तक जल से सूनी पड़ी थी, जिस कारण नदी की रेत आग से भी ज्यादा तप रही थी और लोग टकटकी लगाकर मानसून के आने तथा नदी में पानी बहने की प्रतीक्षा कर रह रहे थे। मारकंडा नदी के जल से हरे-भरे होने वाले खेत भी नदी में पानी न आने के कारण सूखते जा रहे थे और इस नदी के जल पर निर्भर किसानों के खेतों में धान की रोपाई मुश्किल हो गई है। लोगों का मानना है कि हर वर्ष जून माह के आखिरी तथा जुलाई माह के शुरुआती दिनों में एक-दो बरसात पड़ने के बाद मारकंडा नदी में जलधारा बह उठती है, लेकिन लगातार बदल रहे मौसम के कारण अब तक नदी में पानी नहीं आया था।
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