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Kurukshetra News: गीता ज्ञान के साथ इस बार राष्ट्र भक्ति का संदेश भी देश-दुनिया में फैलेगा

Mon, 27 Apr 2026 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Mon, 27 Apr 2026 01:48 AM IST
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This time, along with the knowledge of Gita, the message of patriotism will also spread across the country and the world.
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर, जहां होगा गीता महोत्सव का आयोजन। संवाद
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की धरा से अब गीता ज्ञान के साथ-साथ राष्ट्र भक्ति का संदेश भी देश-दुनिया तक फैलेगा। देश की सेना के लिए तीन व्यूह रचनाएं इसी धरा पर हुई महाभारत से ली जा चुकी हैं। अब इसी धरा पर पहला मौका होगा जब तीनों सेनाओं के पराक्रम से भी लाखों लोग रूबरू हो पाएंगे। इसके लिए पांच से 25 दिसंबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान तीनों सेनाओं की ओर से देश की सेना का गौरव बढ़ाती व राष्ट्र भक्ति का संदेश देती खास प्रदर्शनी लगाई जाएंगी, जिसके लिए तैयारी की जाने लगी है।
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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से तीनों सेनाओं को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव से जोड़ने का आग्रह किया गया था, जिसके लिए सेना की तीनों इकाइयों वायु, जल और थल सेना को पत्र भी भेजे गए। इन पर सेनाध्यक्षों की ओर से सहमति भी आने लगी है। नौ सेनाध्यक्ष एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की ओर से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को पत्र भी आ चुका है, जिसमें इस महोत्सव की भी उन्होंने जमकर सराहना की है तो इसे गौरव का क्षण भी माना है। वही संभावना जताई जा रही है अगले कुछ ही दिनों तक अन्य दोनों सेनाध्यक्षों की ओर से भी सहमति मिल जाएगी।
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कुरुक्षेत्र की धरा से राष्ट्र भक्ति की मजबूती का खास जुड़ाव
कुरुक्षेत्र की धरा से राष्ट्र भक्ति की मजबूती का खास जुड़ाव माना जाता है। नियोजित युद्व के सबसे पुराने साक्ष्यों की यही धरा मानी जाती है। केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल बताते हैं कि महाकाव्य महाभारत में व्यूह रचनाओं का उल्लेख स्पष्ट मिलता है। ये व्यूह रचनाएं ही महाभारत के 18 दिन चले युद्व में प्रयोग हुई। इसके साथ ही इसी धरा पर पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर महाभारत व्यूह रचना दीर्घा भी बनाई हुई है। यहीं नहीं मेजर जनरल जीडी बख्शी ने भी अपनी एक पुस्तक में उल्लेख किया है कि महाभारत की इसी व्यूह रचना से तीन व्यूह रचनाएं सेना के लिए शामिल की गई थी। उधर सेना के सर्वोच्च पदक परमवीर चक्र में वज्र के निशान का भी कुरुक्षेत्र से संबंध है। यह वज्र महर्षि दधिचि की हड्डियों से बना था और महर्षि दधिचि ने इसी धरा पर इस वज्र के लिए अपनी हड्डियां दान की थी। ऐसे में केडीबी की ओर से सन्निहित सरोवर पर महर्षि दधिचि की इस संवाद क्रम को दर्शाती खास प्रतिमा भी स्थापित की हुई है।
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प्रदर्शनी का आयोजन सार्थक प्रयास होगा : उपेंद्र
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि सेनाओं की ओर से खास प्रदर्शनी लगाए जाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। हालांकि इसमें क्या-क्या होगा अभी मंथन किया जा रहा है लेकिन प्रदर्शनी का यह आयोजन सार्थक प्रयास होगा। गीता भी युद्व के मैदान में ही उपजी थी तो हमारी सेनाएं भी इससे प्रेरणा ले रही है।

कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर, जहां होगा गीता महोत्सव का आयोजन। संवाद

कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर, जहां होगा गीता महोत्सव का आयोजन। संवाद

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