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यह किसान और किसानी को बचाने की लड़ाई
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भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने देह शामलात व जुमला मुश्तरका भूमि पर मालिकाना हक के लिए दूसरे दिन भी खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह के गांव टिकरी आवास पर धरना प्रदर्शन किया। सुबह ही किसान धरना स्थल पर एकत्रित हो गए थे। पूरा दिन धरना प्रदर्शन करने के बाद शाम को किसान खेल राज्यमंत्री के आवास से पुतला ट्रैक्टर से खींचते हुए मेन चौक पर पहुंचे। अपने ट्रैक्टर-ट्रालियों को लेकर हजारों किसान मेन चौक पर जुटना शुरू हो गए। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों ने पुतले को आग के हवाले कर दिया।
भाकियू के प्रेस प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने बताया कि 16 अगस्त को भाकियू ने खेल राज्यमंत्री को ज्ञापन देकर उनकी मांग विधानसभा सत्र उठाने की मांग रखी थी। किसानों ने आग्रह किया था कि 25-26 को किसान उनके आवास पर पंचायत लेकर पहुंचेंगे, मगर खेल राज्यमंत्री पहले ही अपने आवास से निकल चुके थे। इसे लेकर किसानों ने रणनीति बनाकर पुतले का दहन किया।
कहा कि जब तक किसानों को मालिकाना हक नहीं मिल जाता तब तक किसान चैन की सांस नहीं लेंगे, क्योंकि यह किसान और किसानी को बचाने की जंग है।
पुतला फूंकने को लेकर हजारों किसान चौक पर जमा हुए थे। जब तक किसान मेन चौक से नहीं हटे तब तक प्रशासनिक अधिकारियों की सांसे भी फूली रही। किसानों के आगे-आगे प्रशासनिक अमला भी अपनी गाड़ियों के साथ चलता नजर आया। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।
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भाकियू के प्रेस प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने बताया कि 16 अगस्त को भाकियू ने खेल राज्यमंत्री को ज्ञापन देकर उनकी मांग विधानसभा सत्र उठाने की मांग रखी थी। किसानों ने आग्रह किया था कि 25-26 को किसान उनके आवास पर पंचायत लेकर पहुंचेंगे, मगर खेल राज्यमंत्री पहले ही अपने आवास से निकल चुके थे। इसे लेकर किसानों ने रणनीति बनाकर पुतले का दहन किया।
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कहा कि जब तक किसानों को मालिकाना हक नहीं मिल जाता तब तक किसान चैन की सांस नहीं लेंगे, क्योंकि यह किसान और किसानी को बचाने की जंग है।
पुतला फूंकने को लेकर हजारों किसान चौक पर जमा हुए थे। जब तक किसान मेन चौक से नहीं हटे तब तक प्रशासनिक अधिकारियों की सांसे भी फूली रही। किसानों के आगे-आगे प्रशासनिक अमला भी अपनी गाड़ियों के साथ चलता नजर आया। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।
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