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मेहनत से मिली सफलता: कभी हॉकी स्टिक खरीदने के पैसे भी नहीं थे, आज ओलंपिक में गूंजा नाम

Fri, 06 Aug 2021 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सुनील धीमान, संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
सुनील धीमान, संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 06 Aug 2021 01:15 AM IST
सार

सुरेंद्र के भाई मनोज कुमार ने बताया कि सुरेंद्र को तराशने में सबसे बड़ा योगदान उनके गुरु हॉकी कोच गुरविंद्र सिंह का है, जिन्होंने प्रतिभा को पहचान कर उसे मुकाम तक पहुंचाया।

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Success Story of Hockey Player Surender Palad of Kurukshetra
कुरुक्षेत्र में खिलाड़ी सुरेंद्र पालड़ के घर जश्न। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक समय ऐसा भी था जब ओलंपियन सुरेंद्र पालड़ के पास हॉकी स्टिक खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे। तब सुरेंद्र की मेहनत और लगन को देखते हुए एक रिश्तेदार ने हॉकी स्टिक खरीदकर दी। इसके बाद सुरेंद्र ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ओलंपिक में पदक विजेता हॉकी टीम के खिलाड़ी सुरेंद्र के भाई मनोज कुमार का कहना है कि आत्मविश्वास और अनुशासन सुरेंद्र की बड़ी ताकत है, जिसके दम पर वह ओलंपिक तक पहुंचा है। हॉकी टीम की जीत से उत्साहित सुरेंद्र के पिता ने कहा कि वह खुद बेटे को लेने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट जाएंगे और उसे गले लगाएंगे।

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ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन से देशवासी गदगद हैं। कुरुक्षेत्र सेक्टर-8 निवासी सुरेंद्र पालड़ के परिजनों और आसपास के लोगों में खासा उत्साह है। ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने की खबर मिलते ही घर-परिवार और क्षेत्र में जश्न का माहौल बन गया। एक ओर जहां लोग ढोल की थाप पर थिरकते नजर आए वहीं जमकर मिठाइयां बांटी गई। 
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भारतीय हॉकी टीम की इस जीत पर खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह, विधायक सुभाष, डीसी मुकुल कुमार, सुरेंद्र के कोच गुरविंद्र सिंह, डीएसओ बलबीर सिंह ने सुरेंद्र के परिजनों को शुभकामनाएं दी हैं। सुरेंद्र पालड़ के पिता मलखान सिंह ने कहा कि बेटे के प्रदर्शन ने उनका सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। यह जीत पूरे भारत के लिए बेहद खास है, क्योंकि ओलंपिक में 41 साल बाद भारतीय हॉकी टीम ने मेडल जीता है। वह अपने बेटे के स्वागत के लिए खुद एयरपोर्ट जाएंगे, क्योंकि यह क्षण उनकी जिंदगी में दोबारा नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि भले ही सुरेंद्र उनके पांव छूना चाहे, लेकिन वह गले लगाकर स्वागत करेंगे।
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सुरेंद्र के भाई मनोज कुमार ने बताया कि शुरू में उनकी पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं थी, उस दौरान उनके रिश्तेदार ने सुरेंद्र के लिए हॉकी खरीदी थी। उन्होंने बताया कि सुरेंद्र को तराशने में सबसे बड़ा योगदान उनके गुरु हॉकी कोच गुरविंद्र सिंह का है, जिन्होंने प्रतिभा को पहचान कर उसे मुकाम तक पहुंचाया।


सुरेंद्र की उपलब्धि
  • 2011 में जूनियर नेशनल गेम में हरियाणा की टीम में चयन
  • मई 2013 में मलेशिया में हुई जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में कांस्य। इसी साल हॉलैंड व बेल्जियम में टेस्ट सीरीज।
  • 2016 में रियो ओलंपिक में चयन व खेले।
  • 2017 में एशिया कप में गोल्ड मेडल।
  • 2018 वर्ल्ड चैंपियन ट्रॉफी में रजत। इसी साल एशियन गेम में कांस्य व सीनियर वर्ल्ड कप में खेला।
  • 2019 में ओलंपिक क्वालीफाई
  • अगस्त 2021 में टोक्यो ओलंपिक में कांस्य विजेता टीम का हिस्सा बने 
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