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अधर्म धर्म पर हावी न हो इसके लिए जरूरत थी गीता उपदेश की : गीता मनीषी

Sun, 17 Dec 2023 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Sun, 17 Dec 2023 02:08 AM IST
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There was a need to preach Gita so that unrighteousness does not dominate religion: Geeta Manishi
कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में श्री गीता जयंती के अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् में जीओ गीता परिवार कुरुक्षेत्र द्वारा आयोजित दिव्य गीता सत्संग के चतुर्थ दिवस में श्रद्धा व आस्था के रूप में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। दिव्य गीता सत्संग के चतुर्थ दिवस का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रमोद वालिया अंबाला, डॉ. ऋषि पाल, पूर्व सांसद कैलाशो सैनी, कैलाश गुप्ता करनाल, भारत भूषण कपूर, बीडी. सिंगला, केवल चावला अंबाला एवं जीओ गीता की ओर से बृज गुप्ता करनाल ने दीप प्रज्वलन करके किया।
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दिव्य गीता सत्संग के विशिष्ट अतिथियों में सम्मिलित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डाॅ. महेंद्र गर्ग, जसवंत सैनी, पंकज गर्ग, संदीप गुप्ता, अक्षत गुप्ता, अंकुर गुप्ता, रमेश गोयल एवं जीओ गीता की ओर से श्याम आहूजा ने गीता पूजन कर भगवान श्री कृष्ण की कृपा का प्रसाद पाया। श्री कृष्ण कृपा कर दो ऐसी, गीतामय जीवन हो जाए भजन से गीता सत्संग की शुरुआत करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि जहां सत्य व असत्य का संघर्ष हो, जहां धर्म व अधर्म के बीच लड़ाई हो, वहां कहीं अधर्म धर्म पर हावी न हो जाए इसके लिए आवश्यकता थी गीता उपदेश की। गीता मनीषी ने कहा कि पिछले तीन दिनों में व्यास पीठ से बार-बार एक ही बात कही जा रही है कि गीता का हर शब्द एक प्रेरणा है। शत्रुओं को सदैव तप्त रखने वाले अर्जुन से सभी कांपते थे। जो अर्जुन कभी पराजित नहीं हुआ वह अर्जुन कुरुक्षेत्र की धर्मधारा पर अपने आप से पराजित हो गया।
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अर्जुन महाभारत युद्ध प्रारंभ होने से पहले ही हार गया। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की धरा साक्षी है कि अर्जुन किसी और से नहीं अपितु अपने आप से हारा। युद्ध क्षेत्र में भगवान जानते थे कि अगर अर्जुन हार गया तो संदेश जाएगा कि अधर्म से धर्म हार गया, असत्य से सत्य हार गया। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि गीता जटिल ग्रंथ है। वास्तव में गीता जटिल ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन की जटिलताओं को दूर करने का ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि सत्संग कोई मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि सत्संग जीवन को साधने के लिए है। इस अवसर पर अशोक चावला अंबाला, मंगत राम जिंदल, हंसराज सिंगला, विजय नरूला, प्रेम पुरी, सुनील वत्स, हैप्पी चावला अंबाला, संजीव सपड़ा, हरीश मुंजाल, धीरज वालिया, रमाकांत शर्मा एवं योगेश चावला योगी अंबाला सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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श्री श्री कृपा बिहारी जी के दर्शन करेंगे उप-राष्ट्रपति

उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ रविवार को गीता ज्ञान संस्थानम् में पहुंचेंगे। सायं पांच बजे यहां श्री श्री कृपा बिहारी मंदिर में विराजमान ठाकुर श्री श्री कृपा बिहारी जी के दर्शन तो करेंगे ही साथ ही जीओ गीता संग्रहालय का अवलोकन भी करेंगे। इसके लिए संस्थान द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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