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खेतों में जाने का नहीं मिल रहा रास्ता, पानी की निकासी भी नहीं : चढूनी
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कुरुक्षेत्र। नेशनल हाईवे के निर्माण का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें अपने ही खेतों तक जाने के लिए न रास्ता मिल रहा है और न ही बारिश के दिनों में खेतों में जमा होने वाले पानी की निकासी हो पा रही है। यह आरोप है भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का।
हाईवे के निर्माण से अनेक किसानों के खेत भी विभाजित हो गए हैं, वहीं अब उन्हें सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही। इसके लिए भाकियू ने प्रधानमंत्री मोदी और सड़क व परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने बताया कि हाईवे निकलने से अनेक किसानों की जमीन दो भागों में विभाजित हो गई है। ऐसे में एक ओर की जमीन तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है जिससे किसानों के लिए अपनी ही जमीन पर जाना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने बताया कि हाईवे के निर्माण में बरसाती पानी की निकासी के लिए पर्याप्त पुलों का निर्माण नहीं किया गया और छोटी पुलियाएं बनाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। यही नहीं खेतों पर जाने वाले कच्चे रास्तों पर पुल भी बेहद तंग बनाए जा रहे हैं, जहां से कंबाइन, फसलों से लदे ट्रैक्टर-ट्राॅली भी नहीं निकल पा रहे।
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जितना चौड़ा रास्ता है, उतने चौड़े ही पुल बनाए जाने चाहिए। पुलों की ऊंचाई भी पर्याप्त होनी चाहिए।
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हाईवे के निर्माण से अनेक किसानों के खेत भी विभाजित हो गए हैं, वहीं अब उन्हें सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही। इसके लिए भाकियू ने प्रधानमंत्री मोदी और सड़क व परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने बताया कि हाईवे निकलने से अनेक किसानों की जमीन दो भागों में विभाजित हो गई है। ऐसे में एक ओर की जमीन तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है जिससे किसानों के लिए अपनी ही जमीन पर जाना मुश्किल हो गया है।
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उन्होंने बताया कि हाईवे के निर्माण में बरसाती पानी की निकासी के लिए पर्याप्त पुलों का निर्माण नहीं किया गया और छोटी पुलियाएं बनाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। यही नहीं खेतों पर जाने वाले कच्चे रास्तों पर पुल भी बेहद तंग बनाए जा रहे हैं, जहां से कंबाइन, फसलों से लदे ट्रैक्टर-ट्राॅली भी नहीं निकल पा रहे।
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जितना चौड़ा रास्ता है, उतने चौड़े ही पुल बनाए जाने चाहिए। पुलों की ऊंचाई भी पर्याप्त होनी चाहिए।