{"_id":"63af46bfd290c508d34e186c","slug":"there-is-a-close-relationship-between-innovation-and-entrepreneurship-kurukshetra-news-knl132143863","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवाचार तथा उद्यमिता में है निकटतम संबंध: अभिषेक शर्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवाचार तथा उद्यमिता में है निकटतम संबंध: अभिषेक शर्मा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की ओर से संवाद-छह के अंतर्गत एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इस दौरान नवाचार और उद्यमिता में निकटतम संबंध बताया गया।
इस अवसर पर गोल्ड मेडलिस्ट एवं अनुसंधान एसोसिएशन ऑफ राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर, अलियॉनज टेक्नोलॉजी, स्विट्जरलैंड (फॉर्च्यून-30) से जुड़े अभिषेक शर्मा ने कहा कि नवाचार तथा उद्यमिता दोनों में निकटतम संबंध है तथा दोनों को अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने एमबीए और बीबीए के विद्यार्थियों को नया व्यापार शुरू करने से संबंधित विषय के बारे में बताते हुए अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि एक उद्यमी कैसे समय, पैसे एवं अनुसंधान का सही तालमेल बनाकर अपने व्यवसाय को ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि नवाचार उद्यमिता का विशिष्ट उदाहरण है तथा नवाचार से आशय किसी नवीन क्रिया को सम्पन्न करना, किसी नई वस्तु को निर्मित करना, किसी नए विचार को उत्पन्न करना व किसी नवीन औद्योगिकी को लागू करने से है। कार्यक्रम के अंत में व्याख्यान के संचालक प्रो. अनिल मित्तल एवं उप संचालक डॉ. राजन शर्मा ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. जयकिशन, डॉ. अनिल, डॉ. रजनी सैनी, श्वेता वशिष्ठ, विक्रम तथा जयंत उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस अवसर पर गोल्ड मेडलिस्ट एवं अनुसंधान एसोसिएशन ऑफ राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर, अलियॉनज टेक्नोलॉजी, स्विट्जरलैंड (फॉर्च्यून-30) से जुड़े अभिषेक शर्मा ने कहा कि नवाचार तथा उद्यमिता दोनों में निकटतम संबंध है तथा दोनों को अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने एमबीए और बीबीए के विद्यार्थियों को नया व्यापार शुरू करने से संबंधित विषय के बारे में बताते हुए अपने अनुभव साझा किए।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि एक उद्यमी कैसे समय, पैसे एवं अनुसंधान का सही तालमेल बनाकर अपने व्यवसाय को ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि नवाचार उद्यमिता का विशिष्ट उदाहरण है तथा नवाचार से आशय किसी नवीन क्रिया को सम्पन्न करना, किसी नई वस्तु को निर्मित करना, किसी नए विचार को उत्पन्न करना व किसी नवीन औद्योगिकी को लागू करने से है। कार्यक्रम के अंत में व्याख्यान के संचालक प्रो. अनिल मित्तल एवं उप संचालक डॉ. राजन शर्मा ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. जयकिशन, डॉ. अनिल, डॉ. रजनी सैनी, श्वेता वशिष्ठ, विक्रम तथा जयंत उपस्थित रहे।
विज्ञापन