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Kurukshetra News: नए पदाधिकारी नियुक्त करने पर फिर आमने-सामने आए दोनों गुट
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। एक ओर कुंटिया प्रधान रजवंत कौर रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां करने की बात कह रही हैं, वहीं पूर्व प्रधान रामकुमार गुर्जर ने इस पर कड़ा एतराज जताया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हर रोज 30 से 35 कर्मचारी कुंटिया कार्यालय में बैठे रहते हैं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति और कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। यह कैसे संभव हो सकता हैं कि लगातार कोई कर्मचारी कार्यालय में बैठा रहे और उसकी हाजिरी लगती रहें।
रामकुमार गुर्जर ने कहा कि रजवंत कौर और उनके सलाहकार कुंटिया के संविधान और इतिहास के बारे में सही जानकारी नहीं रखते। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की मदद से वह अपने समर्थकों के साथ जबरन कुंटिया कार्यालय में बैठी हुई हैं। गुर्जर ने कहा कि बार-बार नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की जा रही है, जबकि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है।
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उन्होंने दावा किया कि 800 से अधिक कर्मचारियों ने सर्व कर्मचारी संघ की अध्यक्षता में आयोजित आम सभा में सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का चयन कर दिया है। संविधान के अनुसार आम सभा सर्वोच्च इकाई है और उसे आवश्यक निर्णय लेने तथा बदलाव करने का अधिकार प्राप्त है।
गुर्जर ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलसचिव पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए चुनिंदा कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। कुछ कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं और उनके विभागों में छापेमारी करवाई जा रही है जबकि दूसरी ओर 4 जून से लगातार कई कर्मचारी सुबह से शाम तक कुंटिया कार्यालय में मौजूद रहते हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति और कार्य को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया जाता।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि संबंधित कर्मचारियों की सीसीटीवी फुटेज की जांच करवाई जाए और यह देखा जाए कि वे अपनी सीटों पर कितना समय कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों के लिए एक समान नियम होने चाहिए। पूर्व प्रधान ने बताया कि उन्होंने नवनियुक्त प्रधान नीलकंठ शर्मा से मुलाकात कर कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित भेदभाव, दबाव और तबादलों के मुद्दे पर चर्चा की है। इस दौरान कर्मचारियों के हितों और संगठन में चल रहे विवाद पर भी विचार-विमर्श किया गया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि हर रोज 30 से 35 कर्मचारी कुंटिया कार्यालय में बैठे रहते हैं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति और कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। यह कैसे संभव हो सकता हैं कि लगातार कोई कर्मचारी कार्यालय में बैठा रहे और उसकी हाजिरी लगती रहें।
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रामकुमार गुर्जर ने कहा कि रजवंत कौर और उनके सलाहकार कुंटिया के संविधान और इतिहास के बारे में सही जानकारी नहीं रखते। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की मदद से वह अपने समर्थकों के साथ जबरन कुंटिया कार्यालय में बैठी हुई हैं। गुर्जर ने कहा कि बार-बार नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की जा रही है, जबकि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है।
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उन्होंने दावा किया कि 800 से अधिक कर्मचारियों ने सर्व कर्मचारी संघ की अध्यक्षता में आयोजित आम सभा में सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का चयन कर दिया है। संविधान के अनुसार आम सभा सर्वोच्च इकाई है और उसे आवश्यक निर्णय लेने तथा बदलाव करने का अधिकार प्राप्त है।
गुर्जर ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलसचिव पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए चुनिंदा कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। कुछ कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं और उनके विभागों में छापेमारी करवाई जा रही है जबकि दूसरी ओर 4 जून से लगातार कई कर्मचारी सुबह से शाम तक कुंटिया कार्यालय में मौजूद रहते हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति और कार्य को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया जाता।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि संबंधित कर्मचारियों की सीसीटीवी फुटेज की जांच करवाई जाए और यह देखा जाए कि वे अपनी सीटों पर कितना समय कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों के लिए एक समान नियम होने चाहिए। पूर्व प्रधान ने बताया कि उन्होंने नवनियुक्त प्रधान नीलकंठ शर्मा से मुलाकात कर कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित भेदभाव, दबाव और तबादलों के मुद्दे पर चर्चा की है। इस दौरान कर्मचारियों के हितों और संगठन में चल रहे विवाद पर भी विचार-विमर्श किया गया।