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नाटक दीपदान में दिखाई पन्ना धाय के त्याग, समर्पण और बलिदान की कहानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 06 May 2022 02:03 AM IST
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The story of Panna Dhay's sacrifice, dedication and sacrifice appeared in the play Deepdan
The story of Panna Dhay's sacrifice, dedication and sacrifice appeared in the play Deepdan - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चल रहे पांच दिवसीय नाट्य उत्सव के तीसरे दिन दीपदान नाटक का मंचन किया। अभिषेक शर्मा ने निर्देशन में कलाकारों ने नाटक के जरिये पन्ना धाय के त्याग, समर्पण और बलिदान की कहानी दिखाई। नाटक में दिखाया गया कि राष्ट्र के प्रति प्रेम और कर्तव्य पुत्र प्रेम से भी अधिक मूल्यवान होता है। नाटक में दिखाया गया कि पन्ना धाय ने मेवाड़ के कुंवर उदय सिंह को बचाने के लिए अपने पुत्र चंदन का बलिदान दिया।
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मुख्यातिथि सांसद नायब सैनी, केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर सांसद नायब सैनी ने कहा कि नाटकों में जो कहानियां प्रस्तुत की जाती हैं वह जीवन की सच्ची घटनाओं पर आधारित होती हैं। दीप दान भी ऐसी ही देश के प्रति पन्ना धाय के त्याग, समर्पण और बलिदान की कहानी है। कार्यक्रम के अंत में नाटक निदेशक अभिषेक शर्मा सहित उनकी पूरी टीम को सम्मानित किया गया। इस मौके पर विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया, प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. सुनील ढीगड़ा, डॉ. नीलम ढांडा, प्रो. परमेश, डॉ. ब्रजेश साहनी, डॉ. दीपक राय बब्बर, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. गुरचरण, डॉ. मधुदीप सहित अन्य मौजूद रहे।
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दीपदान नाटक का अंश
महाराणा सांगा की मृत्यु के बाद उनका पुत्र राज सिंहासन का उत्तराधिकारी था, मगर वह अभी केवल 14 वर्ष का था इसलिए महाराणा सांगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र बनवीर को राज्य की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया। धीरे-धीरे बनवीर राज्य को पूरी तरह हड़प लेने की योजना बनाने लगा। उसने एक रात्रि में दीपदान के आयोजन के बहाने नृत्य का आयोजन कराया।
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उसने प्रजाजनों को इस नृत्य में व्यस्त रखकर कुंवर उदय सिंह की हत्या की योजना बनाई, मगर कुंवर की देखभाल करने वाली धाय मां पन्ना को बनवीर के षड्यंत्र का पता चल गया। वह अत्यंत सावधानी तथा चतुराई से कुंवर को बारी-कीरत के टोकरे में छिपाकर राजभवन से बाहर भेज देती है तथा कुंवर की शैय्या पर अपने इकलौते पुत्र चंदन को सुला देती है। बनवीर ने पहले महाराणा विक्रमादित्य की हत्या की तथा बाद में कुंवर उदयसिंह को मारने के उद्देश्य से उदय सिंह के कक्ष में प्रवेश किया। बनवीर ने शैय्या पर सोए चंदन को उदय सिंह समझकर उसकी हत्या कर दी। इस प्रकार पन्ना ने अपने पुत्र की बलि चढ़ाकर मेवाड़ के सिंहासन के उत्तराधिकारी की रक्षा की।

The story of Panna Dhay's sacrifice, dedication and sacrifice appeared in the play Deepdan

The story of Panna Dhay's sacrifice, dedication and sacrifice appeared in the play Deepdan- फोटो : Kurukshetra

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