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ब्रह्मसरोवर के चारों तरफ बिखरी भारतीय संस्कृति की छटा
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The shade of Indian culture scattered around Brahmasarovar
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर के पावन तटों पर भारतीय संस्कृति की छटा को दूर-दूर तक महसूस किया जा रहा है। इस संस्कृति की छटा का एहसास करने के बाद एकाएक शहर और प्रदेश के लोग अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। इस महोत्सव में जहां शिल्पकार अपनी शिल्पकला से पर्यटकों को मोहित कर रहे हैं, वहीं विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार पर्यटकों का खूब मनोरंजन कर रहे है।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव शिल्प और सरस मेले के छठे दिन सुबह और शाम के समय दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों का पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर सहित विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार मनोरंजन करने का काम कर रहे हैं। उत्तरी तट पर जहां राजस्थानी लोक कलाकार कच्ची घोड़ी नृत्य की प्रस्तुति देकर पर्यटकों को नृत्य करने के लिए उत्साहित कर रहे हैं, उत्तर पश्चिमी तट पर बीन-बांसुरी की धुन पर लोक कलाकार भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इस पावन तट के चारों तरफ किसी न किसी प्रदेश के कलाकार, बाजीगर, बहरूपिए भी पर्यटकों को लुभा रहे हैं।
मंगलवार को इस शिल्प मेले की रौनक को बढ़ाने का काम विभिन्न राज्यों से आए पर्यटकों व विद्यार्थियों ने किया। आसमान में खिली धूप ने महोत्सव के माहौल को और भी मनमोहक कर दिया, महोत्सव में आए विद्यार्थियों व पर्यटकों ने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया। बच्चे, जवान और बुजुर्गों ने महोत्सव में जमकर खरीदारी की और विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों खूब मस्ती से नृत्य किया। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुभव मेहता ने कहा कि प्रशासन की तरफ से मेले में पर्यटकों के लिए अच्छे प्रबंध किए गए हैं और यह सरस और शिल्प मेला पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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विभिन्न राज्यों की संस्कृति बनी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन पर्व पर ब्रह्मसरोवर का तट विभिन्न राज्यों की संस्कृति को अपने आगोश में समेट रहा है। इस तट पर विभिन्न राज्यों की संस्कृति पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस तट पर भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति को एक साथ देखने का मौका मिल रहा है। शिल्प मेले के छठे दिन चारों तरफ शिल्पकला की छोटी-छोटी दुकानों पर पर्यटकों ने खूब खरीदारी की। यह दुकानें भारतीय शिल्पकला के सौंदर्य को भी चरितार्थ कर रही हैं।
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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव शिल्प और सरस मेले के छठे दिन सुबह और शाम के समय दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों का पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर सहित विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकार मनोरंजन करने का काम कर रहे हैं। उत्तरी तट पर जहां राजस्थानी लोक कलाकार कच्ची घोड़ी नृत्य की प्रस्तुति देकर पर्यटकों को नृत्य करने के लिए उत्साहित कर रहे हैं, उत्तर पश्चिमी तट पर बीन-बांसुरी की धुन पर लोक कलाकार भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इस पावन तट के चारों तरफ किसी न किसी प्रदेश के कलाकार, बाजीगर, बहरूपिए भी पर्यटकों को लुभा रहे हैं।
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मंगलवार को इस शिल्प मेले की रौनक को बढ़ाने का काम विभिन्न राज्यों से आए पर्यटकों व विद्यार्थियों ने किया। आसमान में खिली धूप ने महोत्सव के माहौल को और भी मनमोहक कर दिया, महोत्सव में आए विद्यार्थियों व पर्यटकों ने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया। बच्चे, जवान और बुजुर्गों ने महोत्सव में जमकर खरीदारी की और विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों खूब मस्ती से नृत्य किया। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुभव मेहता ने कहा कि प्रशासन की तरफ से मेले में पर्यटकों के लिए अच्छे प्रबंध किए गए हैं और यह सरस और शिल्प मेला पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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विभिन्न राज्यों की संस्कृति बनी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन पर्व पर ब्रह्मसरोवर का तट विभिन्न राज्यों की संस्कृति को अपने आगोश में समेट रहा है। इस तट पर विभिन्न राज्यों की संस्कृति पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस तट पर भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति को एक साथ देखने का मौका मिल रहा है। शिल्प मेले के छठे दिन चारों तरफ शिल्पकला की छोटी-छोटी दुकानों पर पर्यटकों ने खूब खरीदारी की। यह दुकानें भारतीय शिल्पकला के सौंदर्य को भी चरितार्थ कर रही हैं।

The shade of Indian culture scattered around Brahmasarovar- फोटो : Kurukshetra