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भागवत पुराण की कथा में ही जीवन का वास्तविक दर्शन है व यही पवित्र तीर्थ है : संजीव कृष्ण ठाकुर
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कुरुक्षेत्र। श्रीजयराम विद्यापीठ में आयोजित कथा में प्रवचन देते कथावाचक संजीव कृष्ण ठाकुर। विज्
कुरुक्षेत्र। श्री जयराम विद्यापीठ परिसर में गीता जयंती महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास तथा श्रद्धा से मनाया जा रहा है। पिछले करीब साढ़े तीन दशकों की भांति इस वर्ष भी विद्यापीठ परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण की कथा प्रारंभ हुई। पहले दिन व्यासपीठ से कथा के शुभारंभ से पूर्व दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर से कथा भागवत पुराण को सिर पर पवित्र कलशों के साथ धारण कर व्यासपीठ पर लेकर आए।
इस अवसर पर देश भर में फैली जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, कथा व्यास वृंदावन मथुरा से विख्यात कथावाचक संजीव कृष्ण ठाकुर व विद्यापीठ के ट्रस्टियों ने विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ व्यासपीठ का पूजन किया। इसके उपरांत दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया गया। कथा प्रारंभ करने पूर्व परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि विद्यापीठ करीब तीन दशकों से भी अधिक समय से गीता को जन-जन तक पहुंचाने एवं समाज को जागरूक करने के लिए भागवत कथा व गीता जयंती के अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करती है। उन्होंने कथावाचक से भी कहा कि वे कथा के साथ समाज के युवाओं को नशे इत्यादि कुरीतियों से दूर करने के साथ सदद्मार्ग बताएं।
कथा के पहले व्यासपीठ से कथावाचक संजीव कृष्ण ठाकुर ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से पहले इसके आध्यात्मिक तथा सामाजिक अर्थ को समझना होगा, तभी मानव जीवन के वास्तविक दर्शन होंगे। उन्होंने कहा कि कथा जीवन के सत्य को बताती है एवं यही पवित्र तीर्थ है। कथा में ही मुक्ति का मार्ग है। भगवान श्री कृष्ण ने भी भगवत गीता में सभी समस्याओं का समाधान बताया है। कथावाचक ने भागवत पुराण की व्याख्या व कथा श्रवण का महत्व बताते हुए कहा कि भागवत में ही जीवन के वास्तविक दर्शन है और यहीं से मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र वह पवित्र भूमि है, जहां गीता के स्वयं के जन्मोत्सव अवसर पर कथा श्रवण का अवसर प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर राजेन्द्र सिंघल, श्रवण गुप्ता, कुलवंत सैनी, केके कौशिक एडवोकेट, खरैती लाल सिंगला, एसएन गुप्ता, सुरेन्द्र गुप्ता, राजेश सिंगला, टेक सिंह लौहार माजरा, सुरेंद्र गुप्ता, केसी रंगा, संगीता शर्मा, सन्तोष यादव, मुनीश मित्तल, विपिन गर्ग, अवनि गुप्ता इत्यादि भी मौजूद रहे।
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इस अवसर पर देश भर में फैली जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, कथा व्यास वृंदावन मथुरा से विख्यात कथावाचक संजीव कृष्ण ठाकुर व विद्यापीठ के ट्रस्टियों ने विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ व्यासपीठ का पूजन किया। इसके उपरांत दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया गया। कथा प्रारंभ करने पूर्व परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि विद्यापीठ करीब तीन दशकों से भी अधिक समय से गीता को जन-जन तक पहुंचाने एवं समाज को जागरूक करने के लिए भागवत कथा व गीता जयंती के अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करती है। उन्होंने कथावाचक से भी कहा कि वे कथा के साथ समाज के युवाओं को नशे इत्यादि कुरीतियों से दूर करने के साथ सदद्मार्ग बताएं।
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कथा के पहले व्यासपीठ से कथावाचक संजीव कृष्ण ठाकुर ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से पहले इसके आध्यात्मिक तथा सामाजिक अर्थ को समझना होगा, तभी मानव जीवन के वास्तविक दर्शन होंगे। उन्होंने कहा कि कथा जीवन के सत्य को बताती है एवं यही पवित्र तीर्थ है। कथा में ही मुक्ति का मार्ग है। भगवान श्री कृष्ण ने भी भगवत गीता में सभी समस्याओं का समाधान बताया है। कथावाचक ने भागवत पुराण की व्याख्या व कथा श्रवण का महत्व बताते हुए कहा कि भागवत में ही जीवन के वास्तविक दर्शन है और यहीं से मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र वह पवित्र भूमि है, जहां गीता के स्वयं के जन्मोत्सव अवसर पर कथा श्रवण का अवसर प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर राजेन्द्र सिंघल, श्रवण गुप्ता, कुलवंत सैनी, केके कौशिक एडवोकेट, खरैती लाल सिंगला, एसएन गुप्ता, सुरेन्द्र गुप्ता, राजेश सिंगला, टेक सिंह लौहार माजरा, सुरेंद्र गुप्ता, केसी रंगा, संगीता शर्मा, सन्तोष यादव, मुनीश मित्तल, विपिन गर्ग, अवनि गुप्ता इत्यादि भी मौजूद रहे।
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