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Kurukshetra News: नाटक ‘सम्राट अशोक’ से दिया अहिंसा का संदेश
Sun, 29 Mar 2026 03:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 29 Mar 2026 03:56 AM IST
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कुरुक्षेत्र। नाटक सम्राट अशोक का मंचन करते कलाकार। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। विश्व रंगमंच दिवस पर हरियाणा कला परिषद द्वारा कला कीर्ति भवन में तीन दिवसीय रंगरथ नाट्य महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसके पहले दिन रास कला मंच सफीदों के कलाकारों ने नाटक सम्राट अशोक का मंचन किया।
कला परिषद के निदेशक विवेक कालिया के नेतृत्व में पहले दिन वरिष्ठ रंगकर्मी बृजकिशोर शर्मा, नीरज सेठी, चंद्रशेखर दुआ, सुरेखा और हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल ने उत्सव का शुभारंभ किया।
मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा द्वारा लिखित और अंकिता के निर्देशन तथा रविमोहन के मार्गदर्शन में मंचित लगभग दो घंटे की अवधि वाला नाटक सत्ता, युद्ध और विजय की कथा से आगे बढ़कर एक ऐसे शासक की आत्मिक यात्रा को दिखाता है, जो हिंसा के मार्ग से हटकर करुणा और धम्म के रास्ते पर चलता है। कलिंग युद्ध की विभीषिका अशोक के अंदर गहरा द्वंद्व पैदा करती है।
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युद्धभूमि में बहता रक्त, स्त्रियों और बच्चों की चीखें, उजड़ते हुए नगर सब अशोक के हृदय को झकझोर देते हैं और यहीं से अशोक का परिवर्तन प्रारंभ होता है। सम्राट अशोक में दिखाया कि अशोक जन्म के समय से ही काफी कुरूप थे। लेकिन एक वीर योद्धा थे।
नाटक में दर्शाया कि अशोक बिंदुसार का पुत्र था। उनकी मां धर्मा उपेक्षित थी। अशोक के जन्म के बाद उन्हें स्वीकारा गया। इसलिए पुत्र का नाम अशोक रखा। अशोक उज्जयिनी के शासन बने। बिंदुसार से उसने जबरन राज्याधिकार प्राप्त किया था। उस आघात में बिंदुसार की मौत हो गई। संवाद
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कला परिषद के निदेशक विवेक कालिया के नेतृत्व में पहले दिन वरिष्ठ रंगकर्मी बृजकिशोर शर्मा, नीरज सेठी, चंद्रशेखर दुआ, सुरेखा और हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल ने उत्सव का शुभारंभ किया।
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मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा द्वारा लिखित और अंकिता के निर्देशन तथा रविमोहन के मार्गदर्शन में मंचित लगभग दो घंटे की अवधि वाला नाटक सत्ता, युद्ध और विजय की कथा से आगे बढ़कर एक ऐसे शासक की आत्मिक यात्रा को दिखाता है, जो हिंसा के मार्ग से हटकर करुणा और धम्म के रास्ते पर चलता है। कलिंग युद्ध की विभीषिका अशोक के अंदर गहरा द्वंद्व पैदा करती है।
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युद्धभूमि में बहता रक्त, स्त्रियों और बच्चों की चीखें, उजड़ते हुए नगर सब अशोक के हृदय को झकझोर देते हैं और यहीं से अशोक का परिवर्तन प्रारंभ होता है। सम्राट अशोक में दिखाया कि अशोक जन्म के समय से ही काफी कुरूप थे। लेकिन एक वीर योद्धा थे।
नाटक में दर्शाया कि अशोक बिंदुसार का पुत्र था। उनकी मां धर्मा उपेक्षित थी। अशोक के जन्म के बाद उन्हें स्वीकारा गया। इसलिए पुत्र का नाम अशोक रखा। अशोक उज्जयिनी के शासन बने। बिंदुसार से उसने जबरन राज्याधिकार प्राप्त किया था। उस आघात में बिंदुसार की मौत हो गई। संवाद

कुरुक्षेत्र। नाटक सम्राट अशोक का मंचन करते कलाकार। विज्ञप्ति