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आपसी भाईचारे की मिसाल दे गया नाटक ‘मिट्टी दा बावा’ झलका 1947 के बंटवारे का दर्द
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The play 'Mitti Da Bawa' gave an example of mutual brotherhood, reflected the pain of partition of 1947
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। 1947 में हुए बंटवारे का दर्द आज भी हिंदुस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से हिंदुस्तान आने वाले लोगों के दिलों में जिंदा है। विभाजन के उस दर्दनाक मंजर को भूल पाना संभव नहीं है। विस्थापन की टीस आज भी बुजुर्गों के मन को अंदर तक झकझोर देती है। ऐसी ही एक झलक हरियाणा कला परिषद द्वारा कीर्ति भवन में आयोजित नाट्य मेले की चौथी शाम में नाटक मिट्टी दा बावा में देखने को मिली।
नाटक एक जंगल के दृश्य से प्रारंभ होता है, जहां लड़ाकू जहाजों के शोर के बीच एक हिंदुस्तानी सिपाही गुरबख्श सिंह जख्मी हालत में पहुंचता है। उसी समय एक पाकिस्तानी सिपाही शाहनवाज खान भी वहां आकर उस पर धावा बोल देता है। दोनों में लड़ाई होती है और दोनों के गोला-बारूद पहले ही खत्म होने के कारण दोनों थक हारकर बैठ जाते हैं। इसी दौरान कुछ जंगली लोग दोनों सिपाहियों पर हमला कर देते हैं और इसी मुठभेड़ में एक जंगली मारा जाता है। बाकी जंगली डर कर भाग जाते हैं। अकेले रह जाने के कारण हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी सिपाही आपस में बातचीत शुरू करते हैं और देश के विभाजन का दोष एक दूसरे को देते रहते हैं। धीरे-धीरे दोनों की बातचीत से पता चलता है कि बंटवारे के समय हिंदुस्तानी सिपाही पाकिस्तान से तथा पाकिस्तानी सिपाही हिंदुस्तान से पाकिस्तान गया था। दोनों भावुक होकर अपने-अपने घर की यादों में खो जाते हैं और एक दूसरे से अपने घर की बातों को साझा करते हैं। बंटवारे के समय की त्रासदी को दोनों सिपाही अपने-अपने ढंग से बयां करते हुए उस समय की सियासत को कोसते रहते हैं।
भावुकता के साथ विभाजन की तस्वीर को दिखाते हुए दोनों सिपाही इस कदर खो जाते हैं कि जंगली लोग आकर उन्हें फिर घेर लेते हैं। धीरे-धीरे नाटक आगे बढ़ता है और अंत में दोनों सिपाही एक दूसरे के लिए दया भाव दिखाते नजर आते हैं। इस प्रकार 1947 के दर्द को बहुत ही मार्मिकता के साथ नाटक मिट्टी दा बावा बयां कर गया। यह नाटक पाली भूपिंद्र का लिखा और कर्ण लड्डा के निर्देशन में तैयार किया गया है, जिसे केएल थियेटर सिरसा के कलाकारों ने मंचित किया। इस दौरान साहित्यकार चंद्रशेखर शर्मा, रंगकर्मी शिवकुमार किरमच, हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रमुख धर्मपाल गुगलानी, ललित कला समन्वयक सीमा कांबोज ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच संचालन मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने किया।
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हरियाणा कला परिषद द्वारा आयोजित नाट्य मेले में आगामी कार्यक्रम 22 व 23 अप्रैल को आयोजित किए जाएंगे, जिसमें 22 अप्रैल को फिल्म व टीवी कलाकार संजीव लखनपाल के निर्देशन में नाटक जब मैं सिर्फ एक औरत होती हूं मंचित किया जाएगा, वहीं 23 अप्रैल को स्थानीय कलाकार राजवीर राजू के निर्देशन में हास्य नाटक चरणदास चोर की प्रस्तुति कला कीर्ति भवन में की जाएगी। नाटकों का समय सायं 6:30 बजे रहेगा।
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नाटक एक जंगल के दृश्य से प्रारंभ होता है, जहां लड़ाकू जहाजों के शोर के बीच एक हिंदुस्तानी सिपाही गुरबख्श सिंह जख्मी हालत में पहुंचता है। उसी समय एक पाकिस्तानी सिपाही शाहनवाज खान भी वहां आकर उस पर धावा बोल देता है। दोनों में लड़ाई होती है और दोनों के गोला-बारूद पहले ही खत्म होने के कारण दोनों थक हारकर बैठ जाते हैं। इसी दौरान कुछ जंगली लोग दोनों सिपाहियों पर हमला कर देते हैं और इसी मुठभेड़ में एक जंगली मारा जाता है। बाकी जंगली डर कर भाग जाते हैं। अकेले रह जाने के कारण हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी सिपाही आपस में बातचीत शुरू करते हैं और देश के विभाजन का दोष एक दूसरे को देते रहते हैं। धीरे-धीरे दोनों की बातचीत से पता चलता है कि बंटवारे के समय हिंदुस्तानी सिपाही पाकिस्तान से तथा पाकिस्तानी सिपाही हिंदुस्तान से पाकिस्तान गया था। दोनों भावुक होकर अपने-अपने घर की यादों में खो जाते हैं और एक दूसरे से अपने घर की बातों को साझा करते हैं। बंटवारे के समय की त्रासदी को दोनों सिपाही अपने-अपने ढंग से बयां करते हुए उस समय की सियासत को कोसते रहते हैं।
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भावुकता के साथ विभाजन की तस्वीर को दिखाते हुए दोनों सिपाही इस कदर खो जाते हैं कि जंगली लोग आकर उन्हें फिर घेर लेते हैं। धीरे-धीरे नाटक आगे बढ़ता है और अंत में दोनों सिपाही एक दूसरे के लिए दया भाव दिखाते नजर आते हैं। इस प्रकार 1947 के दर्द को बहुत ही मार्मिकता के साथ नाटक मिट्टी दा बावा बयां कर गया। यह नाटक पाली भूपिंद्र का लिखा और कर्ण लड्डा के निर्देशन में तैयार किया गया है, जिसे केएल थियेटर सिरसा के कलाकारों ने मंचित किया। इस दौरान साहित्यकार चंद्रशेखर शर्मा, रंगकर्मी शिवकुमार किरमच, हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रमुख धर्मपाल गुगलानी, ललित कला समन्वयक सीमा कांबोज ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच संचालन मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने किया।
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हरियाणा कला परिषद द्वारा आयोजित नाट्य मेले में आगामी कार्यक्रम 22 व 23 अप्रैल को आयोजित किए जाएंगे, जिसमें 22 अप्रैल को फिल्म व टीवी कलाकार संजीव लखनपाल के निर्देशन में नाटक जब मैं सिर्फ एक औरत होती हूं मंचित किया जाएगा, वहीं 23 अप्रैल को स्थानीय कलाकार राजवीर राजू के निर्देशन में हास्य नाटक चरणदास चोर की प्रस्तुति कला कीर्ति भवन में की जाएगी। नाटकों का समय सायं 6:30 बजे रहेगा।