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Kurukshetra News: खौफ के साए में गुजरी रात...
Sun, 19 Apr 2026 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 19 Apr 2026 12:40 AM IST
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कुरुक्षेत्र। एनआईटी में देर रात एक छात्रा ने छत से कूदकर आत्महत्या का प्रयास करने के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। छात्राओं के छात्रावास में चीख-पुकार मच गई। रातभर छात्राओं के अंदर डर का माहौल बना रहा। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल, महिला थाना की एसएचओ और एनआईटी का पूरा प्रशासन मौजूद रहा। एनआईटी के निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे प्रो. ब्रह्मजीत समेत सीएसओ, एनआईटी प्रवक्ता, चिकित्सकों की टीम ने मौके पर हर छात्रावास में जाकर छात्राओं से संवाद करते रहे, उनका हालचाल जान रहे थे।
निदेशक ने छात्राओं को समझाया, साथ ही उनकी काउंसलिंग भी की। इतना ही जिस छात्रा ने आत्महत्या की कोशिश की, उसके परिवार को सूचित किया, साथ ही उसे समझाया और छात्राओं को छात्रावास में आराम करने के लिए भेजा। इस मामले को निदेशक और उनकी टीम ने पूरी रात संवाद कर संभाला, साथ ही मामले को काबू किया। सुबह छह बजे तक सभी छात्राओं के सो जाने व सुबह की भौर निकलने के बाद निदेशक सुबह छह बजे के करीब वापस आए। पूरी रात प्रशासन सकते में रहा। प्रशासन को कुछ समझ में नहीं आया कि आज अब इन छात्रों को क्या हो गया है। छात्र छुट्टी घोषित करने के बाद भी इस तरह के कदम क्यों उठा रहे हैं।
पूरी रात छात्राएं भय के साये में रही और एक दूसरे से चिपक कर बैठी रही। छात्राओं को उनके प्रोफेसर समझाने में लगे रहे। वहीं निदेशक ने एनआईटी के दो चिकित्सकों को छात्रावास में तैनात रखा, जो छात्राओं को हर प्रकार की मेडिकल सहायता देते रहे। सुबह होते ही छात्राएं अपने घर के लिए रवाना होने लगी।
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निदेशक ने छात्राओं को समझाया, साथ ही उनकी काउंसलिंग भी की। इतना ही जिस छात्रा ने आत्महत्या की कोशिश की, उसके परिवार को सूचित किया, साथ ही उसे समझाया और छात्राओं को छात्रावास में आराम करने के लिए भेजा। इस मामले को निदेशक और उनकी टीम ने पूरी रात संवाद कर संभाला, साथ ही मामले को काबू किया। सुबह छह बजे तक सभी छात्राओं के सो जाने व सुबह की भौर निकलने के बाद निदेशक सुबह छह बजे के करीब वापस आए। पूरी रात प्रशासन सकते में रहा। प्रशासन को कुछ समझ में नहीं आया कि आज अब इन छात्रों को क्या हो गया है। छात्र छुट्टी घोषित करने के बाद भी इस तरह के कदम क्यों उठा रहे हैं।
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पूरी रात छात्राएं भय के साये में रही और एक दूसरे से चिपक कर बैठी रही। छात्राओं को उनके प्रोफेसर समझाने में लगे रहे। वहीं निदेशक ने एनआईटी के दो चिकित्सकों को छात्रावास में तैनात रखा, जो छात्राओं को हर प्रकार की मेडिकल सहायता देते रहे। सुबह होते ही छात्राएं अपने घर के लिए रवाना होने लगी।
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