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Kurukshetra News: फसलों के प्राकृतिक रंग और गुणवत्ता ने मोहा मन
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कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक खेती फार्म पर फसलों को करीब से देखते महाराष्ट्र क
- फोटो : विभाग
कुरुक्षेत्र। महाराष्ट्र के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचे। उन्होंने यहां चल रहे विभिन्न प्रकल्पों का बारीकी से अवलोकन किया।
कुलपति डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विवि दापोली के कुलपति प्रो. संजय भावे, वसंतराव नाइक मराठवाडा कृषि विश्वविद्यालय परभनी के कुलपति प्रो. इंद्रमणि मिश्रा, महात्मा फूले कृषि विद्यापीठ राहुरी के कुलपति डॉ. विलास खारचे व डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ अकोला के कुलपति डॉ. शरद गडख के साथ कई अन्य कृषि विशेषज्ञों ने भी राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक खेती मॉडल को करीब से देखा।
गुरुकुल में इन सभी अतिथियों ने जीवामृत निर्माण केंद्र, गुरुकुल की अत्याधुनिक गोशाला, देवयान विद्यालय भवन, एनडीए ब्लॉक, आर्ष महाविद्यालय आदि का भी भ्रमण किया। गोशाला में देशी नस्लों की गाय और गोमूत्र-गोबर का प्राकृतिक खेती के लिए प्रबंधन देख सभी हैरान रह गए।
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सभी कुलपतियों व विशेषज्ञों ने ड्रैगन फ्रूट, केला, चीकू, बेर, आम, लीची, स्ट्रॉबेरी, सिंघाडा आदि की बागवानी, गेहूं, धान, गन्ना व हरी सब्जियों की उन्नत खेती पर विस्तार से चर्चा की। पद्म श्री डॉ. हरिओम ने उन्हें गेहूं और चने की मिश्रित फसल दिखाई और बताया कि इसमें पानी की 50 फीसदी तक बचत होती है और उत्पादन भी पूरा मिलता है।
फार्म पर बनाए जंगल मॉडल को देखकर सभी गदगद हो उठे। यहीं पर फूलगोभी और मटर की फसलों को देखा तो स्वाद भी चखा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर वे सलाद नहीं खाते क्योंकि बाहर सलाद वाली फसलों में बहुत अधिक मात्रा में केमिकल और कीटनाशक डाला जाता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए उनके मन में चल रही सभी शंकाएं दूर हुई हैं। राज्यपाल आचार्य देवव्रत का प्राकृतिक कृषि मॉडल किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगा, अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए और महाराष्ट्र में वे इसके लिए भरसक प्रयास करेंगे।
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कुलपति डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विवि दापोली के कुलपति प्रो. संजय भावे, वसंतराव नाइक मराठवाडा कृषि विश्वविद्यालय परभनी के कुलपति प्रो. इंद्रमणि मिश्रा, महात्मा फूले कृषि विद्यापीठ राहुरी के कुलपति डॉ. विलास खारचे व डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ अकोला के कुलपति डॉ. शरद गडख के साथ कई अन्य कृषि विशेषज्ञों ने भी राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक खेती मॉडल को करीब से देखा।
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गुरुकुल में इन सभी अतिथियों ने जीवामृत निर्माण केंद्र, गुरुकुल की अत्याधुनिक गोशाला, देवयान विद्यालय भवन, एनडीए ब्लॉक, आर्ष महाविद्यालय आदि का भी भ्रमण किया। गोशाला में देशी नस्लों की गाय और गोमूत्र-गोबर का प्राकृतिक खेती के लिए प्रबंधन देख सभी हैरान रह गए।
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सभी कुलपतियों व विशेषज्ञों ने ड्रैगन फ्रूट, केला, चीकू, बेर, आम, लीची, स्ट्रॉबेरी, सिंघाडा आदि की बागवानी, गेहूं, धान, गन्ना व हरी सब्जियों की उन्नत खेती पर विस्तार से चर्चा की। पद्म श्री डॉ. हरिओम ने उन्हें गेहूं और चने की मिश्रित फसल दिखाई और बताया कि इसमें पानी की 50 फीसदी तक बचत होती है और उत्पादन भी पूरा मिलता है।
फार्म पर बनाए जंगल मॉडल को देखकर सभी गदगद हो उठे। यहीं पर फूलगोभी और मटर की फसलों को देखा तो स्वाद भी चखा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर वे सलाद नहीं खाते क्योंकि बाहर सलाद वाली फसलों में बहुत अधिक मात्रा में केमिकल और कीटनाशक डाला जाता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए उनके मन में चल रही सभी शंकाएं दूर हुई हैं। राज्यपाल आचार्य देवव्रत का प्राकृतिक कृषि मॉडल किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगा, अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए और महाराष्ट्र में वे इसके लिए भरसक प्रयास करेंगे।