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Kurukshetra News: बीमा कंपनी को ब्याज सहित देना होगा इलाज का खर्च
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कुरुक्षेत्र। उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की इलाज को काॅस्मेटिक प्रक्रिया बताकर क्लेम देने से मना करने की दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को इलाज का खर्च नौ प्रतिशत ब्याज और 11 हजार रुपये कानूनी लागत के साथ अदा करे।
शांति नगर निवासी रणधीर सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने अक्तूबर 2019 में इंश्योरेंस कंपनी से चार लाख रुपये की पाॅलिसी ली थी। अगस्त 2020 में उनके बेटे हरपाल सिंह के सीने में अचानक तेज दर्द और सूजन (गाइनेकोमेस्टिया) की समस्या हुई।
हालत बिगड़ने पर उसे मल्टीस्पेश्यलिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उसका ऑपरेशन हुआ। इलाज पर 27 हजार 360 रुपये खर्च हुए। जब रणधीर सिंह ने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो बीमा कंपनी ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि गाइनेकोमास्टिया का ऑपरेशन काॅस्मेटिक सर्जरी है, जो पाॅलिसी के नियमों और शर्तों के तहत कवर नहीं होती। मामले की सुनवाई करते हुए पाया गया कि मरीज को सीने में गंभीर दर्द था और मेडिकल रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती थी।
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आयोग ने माना कि यह कोई सौंदर्य बढ़ाने वाली स्वैच्छिक सर्जरी नहीं थी बल्कि शारीरिक कष्ट के कारण अचानक उत्पन्न हुई स्थिति थी। बीमा कंपनी को अस्पताल में भर्ती होने की तारीख से भुगतान तक 27,360 रुपये पर प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के रूप में 11,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बीमा कंपनी को यह भी आदेश दिए गए कि भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा। आदेश का पालन न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत जेल या जुर्माने की कार्यवाही की जा सकती है।
इस फैसले से उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जिनके क्लेम बीमा कंपनियां तकनीकी बारीकियों का हवाला देकर अक्सर रद्द कर देती हैं।
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शांति नगर निवासी रणधीर सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने अक्तूबर 2019 में इंश्योरेंस कंपनी से चार लाख रुपये की पाॅलिसी ली थी। अगस्त 2020 में उनके बेटे हरपाल सिंह के सीने में अचानक तेज दर्द और सूजन (गाइनेकोमेस्टिया) की समस्या हुई।
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हालत बिगड़ने पर उसे मल्टीस्पेश्यलिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उसका ऑपरेशन हुआ। इलाज पर 27 हजार 360 रुपये खर्च हुए। जब रणधीर सिंह ने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो बीमा कंपनी ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि गाइनेकोमास्टिया का ऑपरेशन काॅस्मेटिक सर्जरी है, जो पाॅलिसी के नियमों और शर्तों के तहत कवर नहीं होती। मामले की सुनवाई करते हुए पाया गया कि मरीज को सीने में गंभीर दर्द था और मेडिकल रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती थी।
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आयोग ने माना कि यह कोई सौंदर्य बढ़ाने वाली स्वैच्छिक सर्जरी नहीं थी बल्कि शारीरिक कष्ट के कारण अचानक उत्पन्न हुई स्थिति थी। बीमा कंपनी को अस्पताल में भर्ती होने की तारीख से भुगतान तक 27,360 रुपये पर प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के रूप में 11,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बीमा कंपनी को यह भी आदेश दिए गए कि भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा। आदेश का पालन न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत जेल या जुर्माने की कार्यवाही की जा सकती है।
इस फैसले से उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जिनके क्लेम बीमा कंपनियां तकनीकी बारीकियों का हवाला देकर अक्सर रद्द कर देती हैं।