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कुरुक्षेत्र में दो बार दिखा भगवान का विराट रुप,अब वहां अगले वामन द्वादशी उत्सव का इंतजार
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त्रेतायुग और द्वापर में जिस भूमि पर खड़े होकर भगवान दो बार विराट स्वरूप में आए, वामन भगवान की उस अवतरण भूमि कुरुक्षेत्र में अब अगले साल होने वाले वामन द्वादशी महोत्सव का बेसब्री से श्रद्धालुओं को इंतजार रहेगा। करीब 25 से बंद इस उत्सव की शुरुआत एक बार फिर शुक्रवार को हो चुकी है। अगलेे साल वामन द्वादशी मेले की भव्यता बढ़ाई जाएगी।
साल 2021 में हरियाणा के राज्यपाल और धर्मगुरुओं की मौजूदगी में इस आयोजन की शानदार शुरुआत का शंखनाद हो चुका है और आगे भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहे। यही कामना श्रद्धालुओं ने वामन द्वादशी मेले पर भगवान से की। वेद पाठी ब्राह्मणों, रंग मंच के कलाकारों और धर्म नगरी की दर्जनों संस्थाओं की मौजूदगी में इस महा उत्सव का नजारा कुरुक्षेत्र में इस बार विशेष रहा। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष हरियाणा के राज्यपाल, संतों और महंतों ने ही नहीं, बल्कि नगर के गणमान्य लोगों ने इस उत्सव को जागृत करने में अहम भूमिका निभाने वाली प्रमुख संस्था श्री ब्राह्मण व तीर्थोद्धार सभा का आभार जताया है।
तीर्थोद्धार सभा और केडीबी ने अन्य संस्थाओं को साथ लेकर जिस समन्वय के साथ इस उत्सव की शुरुआत की है। उसके अनुभवों से सीख लेकर अगले वर्ष इस आयोजन को और भव्य बनाने का संकल्प आज सन्निहित सरोवर पर लिया गया। इस बार किसान आंदोलन के चलते वामन द्वादशी उत्सव में होने वाला पारंपरिक खेल कुश्ती दंगल और कबड्डी प्रतियोगिताएं प्रशासन को रद्द करनी पड़ी, क्योंकि खेल आयोजन से कुछ घंटे पहले इस आयोजन में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करने आ रहे खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह का विरोध करने की वीडियो किसान नेता वायरल कर चुके थे।
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इसके बाद प्रशासन ने इस आयोजन से पांव पीछे खींच लिए और आयोजन रद्द हो गया। वहीं जो शोभायात्रा पिछले वर्षों में परंपरानुसार कुरुक्षेत्र प्राचीन नाभिकमल मंदिर ठाकुरद्वारा से रवाना होती थी, उसका कोविड की वजह से रूट छोटा करके इस बार दुखभंजन मंदिर से रवाना किया गया। हालांकि वामन द्वादशी उत्सव में पहली बार सन्निहित पर भी गंगा की तर्ज पर महा आरती की नई परंपरा की भी नींव रखी गई है। इसके लिए केडीबी और जीओ संस्था के सहयोग से सन्निहित के प्राचीन घाट पर भव्य आरती स्थल तैयार कराया गया है। यहां अब नियमित महा आरती का आयोजन होगा।
अमर उजाला ने उठाया महोत्सव शुरु करने का मुद्दा
अमर उजाला ने कुरुक्षेत्र में लुप्त हुए मेलों में होली के दिन लगने वाले कंकरियों के मेले और सन्निहित पर लगने वाले वामन द्वादशी मेले के लुप्त होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। वहीं एक माह पहले हरियाणा के नवनियुक्त राज्यपाल एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष बंडारू दत्तात्रेय के समक्ष कुरुक्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजन वामन द्वादशी मेले के लुप्त होने और इसे दोबारा जागृत करने का विषय रखा था।
श्रद्धा और विश्वास के साथ सुसंस्कृति का करना होगा पोषण: गीता मनीषी
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कुरुक्षेत्र भारत का पौराणिक तीर्थ और अध्यात्म का मुख्य केंद्र है। हमारी परंपराएं, संस्कृति और संस्कार तभी सुरक्षित रहेंगे, जब इस पावन भूमि पर श्रद्धा और विश्वास के साथ सुविचार और सुसंस्कृति का पोषण होगा। हमें अपनी परंपराओं और पूजा पद्धति को जानकर इस दिशा में कदम आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। वामन द्वादशी के अलावा अगले वर्ष से श्रावणी पर भी विशेष कार्यक्रम करने की आवश्यकता है।
वामन द्वादशी उत्सव का बने विराट स्वरूप: बंशी पुरी महाराज
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी व स्थाणेश्वर तीर्थ के महंत बंशी पुरी महाराज ने कहा कि वामन भगवान का जहां अवतरण हुआ हो, अगर उस भूमि पर भी उनका अवतरण दिवस वामन द्वादशी जैसे प्रमुख पर्वों का आयोजन नहीं होता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण विषय है। उन्होंने इस शुरुआत की सराहना करते हुए कहा कि अगले वर्षों में इस उत्सव का और विराट स्वरूप की तरह होना चाहिए और जिससे पूरी दुनिया में कुरुक्षेत्र के वामन द्वादशी मेले का संदेश जाए।
तीर्थोद्धार सभा उत्सव को लेकर जाएगी नई ऊंचाइयों पर: जयनारायण
केडीबी के पूर्व सदस्य व श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा ने आश्वासन दिया कि अगले वर्ष से सभी संस्थाओं और नगर वासियों के सहयोग से इस उत्सव को ऊंचाइयों पर ले जाने का काम उनकी सभा करेगी। उन्होंने कहा कि यह उत्सव कुरुक्षेत्र की पहचान बने। इसके लिए परंपरागत खेल और धार्मिक आयोजनों पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि केडीबी के साथ लोकसभा सांसद नायब सैनी और थानेसर के विधायक सुभाष सुधा का भी इस आयोजन को नया स्वरूप देने में सहयोग लिया जाएगा।
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साल 2021 में हरियाणा के राज्यपाल और धर्मगुरुओं की मौजूदगी में इस आयोजन की शानदार शुरुआत का शंखनाद हो चुका है और आगे भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहे। यही कामना श्रद्धालुओं ने वामन द्वादशी मेले पर भगवान से की। वेद पाठी ब्राह्मणों, रंग मंच के कलाकारों और धर्म नगरी की दर्जनों संस्थाओं की मौजूदगी में इस महा उत्सव का नजारा कुरुक्षेत्र में इस बार विशेष रहा। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष हरियाणा के राज्यपाल, संतों और महंतों ने ही नहीं, बल्कि नगर के गणमान्य लोगों ने इस उत्सव को जागृत करने में अहम भूमिका निभाने वाली प्रमुख संस्था श्री ब्राह्मण व तीर्थोद्धार सभा का आभार जताया है।
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तीर्थोद्धार सभा और केडीबी ने अन्य संस्थाओं को साथ लेकर जिस समन्वय के साथ इस उत्सव की शुरुआत की है। उसके अनुभवों से सीख लेकर अगले वर्ष इस आयोजन को और भव्य बनाने का संकल्प आज सन्निहित सरोवर पर लिया गया। इस बार किसान आंदोलन के चलते वामन द्वादशी उत्सव में होने वाला पारंपरिक खेल कुश्ती दंगल और कबड्डी प्रतियोगिताएं प्रशासन को रद्द करनी पड़ी, क्योंकि खेल आयोजन से कुछ घंटे पहले इस आयोजन में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करने आ रहे खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह का विरोध करने की वीडियो किसान नेता वायरल कर चुके थे।
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इसके बाद प्रशासन ने इस आयोजन से पांव पीछे खींच लिए और आयोजन रद्द हो गया। वहीं जो शोभायात्रा पिछले वर्षों में परंपरानुसार कुरुक्षेत्र प्राचीन नाभिकमल मंदिर ठाकुरद्वारा से रवाना होती थी, उसका कोविड की वजह से रूट छोटा करके इस बार दुखभंजन मंदिर से रवाना किया गया। हालांकि वामन द्वादशी उत्सव में पहली बार सन्निहित पर भी गंगा की तर्ज पर महा आरती की नई परंपरा की भी नींव रखी गई है। इसके लिए केडीबी और जीओ संस्था के सहयोग से सन्निहित के प्राचीन घाट पर भव्य आरती स्थल तैयार कराया गया है। यहां अब नियमित महा आरती का आयोजन होगा।
अमर उजाला ने उठाया महोत्सव शुरु करने का मुद्दा
अमर उजाला ने कुरुक्षेत्र में लुप्त हुए मेलों में होली के दिन लगने वाले कंकरियों के मेले और सन्निहित पर लगने वाले वामन द्वादशी मेले के लुप्त होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। वहीं एक माह पहले हरियाणा के नवनियुक्त राज्यपाल एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष बंडारू दत्तात्रेय के समक्ष कुरुक्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजन वामन द्वादशी मेले के लुप्त होने और इसे दोबारा जागृत करने का विषय रखा था।
श्रद्धा और विश्वास के साथ सुसंस्कृति का करना होगा पोषण: गीता मनीषी
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कुरुक्षेत्र भारत का पौराणिक तीर्थ और अध्यात्म का मुख्य केंद्र है। हमारी परंपराएं, संस्कृति और संस्कार तभी सुरक्षित रहेंगे, जब इस पावन भूमि पर श्रद्धा और विश्वास के साथ सुविचार और सुसंस्कृति का पोषण होगा। हमें अपनी परंपराओं और पूजा पद्धति को जानकर इस दिशा में कदम आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। वामन द्वादशी के अलावा अगले वर्ष से श्रावणी पर भी विशेष कार्यक्रम करने की आवश्यकता है।
वामन द्वादशी उत्सव का बने विराट स्वरूप: बंशी पुरी महाराज
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी व स्थाणेश्वर तीर्थ के महंत बंशी पुरी महाराज ने कहा कि वामन भगवान का जहां अवतरण हुआ हो, अगर उस भूमि पर भी उनका अवतरण दिवस वामन द्वादशी जैसे प्रमुख पर्वों का आयोजन नहीं होता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण विषय है। उन्होंने इस शुरुआत की सराहना करते हुए कहा कि अगले वर्षों में इस उत्सव का और विराट स्वरूप की तरह होना चाहिए और जिससे पूरी दुनिया में कुरुक्षेत्र के वामन द्वादशी मेले का संदेश जाए।
तीर्थोद्धार सभा उत्सव को लेकर जाएगी नई ऊंचाइयों पर: जयनारायण
केडीबी के पूर्व सदस्य व श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा ने आश्वासन दिया कि अगले वर्ष से सभी संस्थाओं और नगर वासियों के सहयोग से इस उत्सव को ऊंचाइयों पर ले जाने का काम उनकी सभा करेगी। उन्होंने कहा कि यह उत्सव कुरुक्षेत्र की पहचान बने। इसके लिए परंपरागत खेल और धार्मिक आयोजनों पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि केडीबी के साथ लोकसभा सांसद नायब सैनी और थानेसर के विधायक सुभाष सुधा का भी इस आयोजन को नया स्वरूप देने में सहयोग लिया जाएगा।