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Kurukshetra News: कथा में सुनाई अग्रवाल समाज के 18 गोत्रों की महिमा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 02:20 AM IST
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The glory of the 18 clans of the Agrawal community is narrated in the story.
कुरुक्षेत्र। व्यासपीठ की आरती करते अग्रवाल समाज के सदस्य। विज्ञ​प्ति
कुरुक्षेत्र। रेलवे रोड स्थित अग्रवाल धर्मशाला में मंगलवार को अग्र भगवत कथा में प्रवचनों की शृंखला चली। अग्र समाज की ओर से मंच की शोभा बढ़ाने के लिए व्यासपीठ का आरती पूजन किया गया। कथावाचक उज्ज्वल गर्ग ने प्रसंगों में अग्रवालों के 18 गोत्रों की विस्तारपूर्वक व्याख्या सुनाई। कथा में विभिन्न शहरों से प्रतिष्ठित जनों ने सहभागिता की।
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मुख्यमंत्री नायब सैनी के प्रतिनिधि कैलाश सैनी और थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा भी कथा में शामिल हुए। प्रसंगों में कथावाचक उज्ज्वल गर्ग ने कहा कि अग्रवाल समाज में 18 गोत्रों की स्थापना महाराजा अग्रसेन ने अपने 18 पुत्रों या यज्ञों के गणाधिपतियों के नाम पर की थी। ये गोत्र अग्रवाल समाज की एकता, कुलदेवी महालक्ष्मी की आराधना और परस्पर विवाह न करने (एक ही गोत्र में) के नियमों का आधार हैं। इन्हें अक्सर साढ़े सत्रह भी कहा जाता है, जो अहिंसा के प्रति सम्मान को दर्शाता है। अग्रवालों में गर्ग सबसे प्रमुख गोत्र है, जो अक्सर अग्रवंश के मूल से जुड़ा है। गोयल गोत्र सबसे आम गोत्रों में से एक है। बंसल गोत्र समृद्धि और प्रगति का प्रतीक है। कथा के दौरान महाराजा अग्रसेन की ओर से अपने 18 पुत्रों को दिए उपदेश की भव्य झांकी दिखाई गई।
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इस अवसर पर पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह, सेशन जज दिनेश मित्तल, करनाल के कंज्यूमर कोर्ट जज जसवंत सिंह, इंद्री (करनाल) से अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन सिंगला, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री खैराती लाल सिंगला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र सिंगला, प्रदेश उपाध्यक्ष विशाल सिंगला, राधेश्याम गर्ग, युनवीन सिंगला, पीयूष बंसल, अजय गोयल, नवीन बंसल, अवनी गुप्ता, नरेश सिंगला, कुलवंत गर्ग, गौरव मित्तल और अमरनाथ मित्तल सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद रहे।
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गौत्र का बखान और मान्यता
उन्होंने बताया कि कुच्छल समझदारी का गोत्र है। मित्तल गोत्र समानता का प्रतीक, सिंघल गोत्र शक्ति और मजबूती का, जिंदल गोत्र विजय और जीवंतता, बिंदल गोत्र अटूट विश्वास, तयाल गोत्र तेज और चपलता, मंगल गोत्र शुभ और कल्याण, धारण गोत्र स्थिरता, ऐरण गोत्र उच्चता, मधुकुल गोत्र मधुरता और मानिक्य बहुमूल्य रत्नों का गोत्र है। नागल गोत्र निडरता, गोयन ज्ञान का, भंदल रक्षा करने वाला, तिंगल शुद्धता का प्रतीक है। मान्यता है कि महाराजा अग्रसेन ने जब 18वां यज्ञ किया तो अहिंसा के कारण उसे बीच में रोक दिया था जिसके कारण साढ़े सत्रह यज्ञ पूरे हुए। इसलिए गोत्रों की संख्या पर मान्यताएं बदलती रहती हैं। सर्वमान्य 18 ही माने जाते हैं। अग्रवाल समाज में एक ही गोत्र में विवाह प्रतिबंधित है।
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