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आईपीएस पूरण कुमार के आत्महत्या मामले के दोषियों को जल्द किया जाए गिरफ्तार : सुदेश कुमारी
Tue, 14 Oct 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 14 Oct 2025 01:30 AM IST
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कुरुक्षेत्र। सरकार के खिलाफ रोष जताते जन संघर्ष मंच के सदस्य। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जन संघर्ष मंच सदस्यों ने आईपीएस वाई पूरण कुमार आत्महत्या मामले में दोषियों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में प्रदर्शन किया। सुदेश कुमारी ने कहा कि प्रदेश सरकार पीड़ित परिवार की ओर से की जा रही जायज मांग को भी नहीं मान रही। परिजनों की अधिकारियों को पद से हटाकर गिरफ्तार करने की मांग है। कर्मचारियों का सुसाइड नोट में नाम दर्ज है। उसके बाद भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा, जिस वजह से मृतक अधिकारी का अब तक पोस्टमार्टम नहीं हो पाया।
सुदेश कुमारी ने कहा कि अगर समय रहते उनकी पीड़ा को समझा जाता और व्यवस्थागत शोषण पर ध्यान दिया जाता, तो वे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर नहीं होते। यह घटना सामाजिक अन्याय, अमानवीयता और संवेदनहीनता का भयावह प्रमाण है, साबित करती है कि भाजपा राज दलितों के लिए अभिशाप बन गया है। मृतक अधिकारी के सुसाइड नोट में डीजीपी हरियाणा सहित कई पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के नाम दर्ज हैं और उन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। मृतक की पत्नी अमनीत पी कुमार द्वारा शिकायत करने के बावजूद एफआईआर में उन आरोपियों के नाम तक दर्ज नहीं किए गए। यह चिंताजनक है कि जब ऊंचे ओहदे पर बैठे दलित अधिकारियों का यह हाल है, तो यह समझा जा सकता है कि आम दलित समाज किन भयावह हालात में जी रहा है। आत्महत्या नोट में नामजद सभी पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को सरकार हटाकर जल्द गिरफ्तार करें।
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कुरुक्षेत्र। जन संघर्ष मंच सदस्यों ने आईपीएस वाई पूरण कुमार आत्महत्या मामले में दोषियों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में प्रदर्शन किया। सुदेश कुमारी ने कहा कि प्रदेश सरकार पीड़ित परिवार की ओर से की जा रही जायज मांग को भी नहीं मान रही। परिजनों की अधिकारियों को पद से हटाकर गिरफ्तार करने की मांग है। कर्मचारियों का सुसाइड नोट में नाम दर्ज है। उसके बाद भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा, जिस वजह से मृतक अधिकारी का अब तक पोस्टमार्टम नहीं हो पाया।
सुदेश कुमारी ने कहा कि अगर समय रहते उनकी पीड़ा को समझा जाता और व्यवस्थागत शोषण पर ध्यान दिया जाता, तो वे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर नहीं होते। यह घटना सामाजिक अन्याय, अमानवीयता और संवेदनहीनता का भयावह प्रमाण है, साबित करती है कि भाजपा राज दलितों के लिए अभिशाप बन गया है। मृतक अधिकारी के सुसाइड नोट में डीजीपी हरियाणा सहित कई पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के नाम दर्ज हैं और उन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। मृतक की पत्नी अमनीत पी कुमार द्वारा शिकायत करने के बावजूद एफआईआर में उन आरोपियों के नाम तक दर्ज नहीं किए गए। यह चिंताजनक है कि जब ऊंचे ओहदे पर बैठे दलित अधिकारियों का यह हाल है, तो यह समझा जा सकता है कि आम दलित समाज किन भयावह हालात में जी रहा है। आत्महत्या नोट में नामजद सभी पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को सरकार हटाकर जल्द गिरफ्तार करें।
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