{"_id":"629e5e309742b55b943474bb","slug":"the-condition-of-shri-krishna-museum-is-disappointing-tourists-kurukshetra-news-knl1106963138","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीकृष्ण संग्रहालय की हालत पर्यटकों को कर रही मायूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीकृष्ण संग्रहालय की हालत पर्यटकों को कर रही मायूस
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण संग्रहालय में निकली पड़ी एसी की तारें।
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। किसी भी शहर की पहचान धार्मिक और सामाजिक संस्कृति के साथ-साथ वहां की धरोहरों, एतिहासिक पर्यटन स्थलों और पुरातत्व सामग्रियों से होती है। कुरुक्षेत्र भी देश का ऐसा ही एक धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यहां श्रीकृष्ण और महाभारत से जुड़ी यादों को समेटे श्रीकृष्ण संग्रहालय जहां अपने आप में एक बड़ा दर्शनीय स्थल है मगर आज इस संग्रहालय के प्रति अनदेखी पर्यटकों को मायूस और नाराज करती है।
यह संग्रहालय इन दिनों बदहाली का शिकार हो रहा है। न तो यहां तकनीकी स्टॉफ की कमी है न ही बजट का अभाव, फिर भी विभाग की लापरवाही से हालात बदतर बने हुए हैं। कोरोना काल के बाद यहां पर मरम्मत कार्य तक नहीं हो पाया है। धर्मनगरी में प्रतिदिन 800 से अधिक पर्यटक संग्रहालय का अवलोकन करने पहुंचते हैं। इनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल है, मगर संग्रहालय की दशा को देखकर अच्छी प्रतिक्रिया सामने नहीं आ रही है। अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय पर्यटकों की संख्या में अधिक इजाफा हो रहा है।
नहीं चल रहे एसी, गर्मी से परेशान पर्यटक
सोमवार दोपहर को श्रीकृष्ण संग्रहालय का जायजा लिया गया तो दूसरी और तीसरी मंजिल के एसी ठप मिले। कई जगह से एसी की तारें तक बाहर निकली हुईं थी। संग्रहालय का अवलोकन कर रहे गर्मी से परेशान पर्यटक बार-बार ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों से इसकी शिकायत करते दिखे। कई जगह दीवारों पर लगाए दिए चित्रों को फोकस करने वाली लाइटें भी खराब मिली।
विज्ञापन
पांच में से तीन कीओस्क मशीन खराब
संग्रहालय की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लगाई गई कीओस्क मशीनें पिछले काफी समय से बंद है। पहली और दूसरी मंजिल पर लगी पांच कीओस्क मशीनों में से तीन मशीनें बंद पड़ी हुई थी, जबकि दो की दशा भी ठीक नहीं है। इन दो मशीनों की टच भी सही ढंग से काम नहीं कर रही है। कोरोना के बाद से महाभारत की गाथा को प्रदर्शित करने वाला प्रोजेक्टर भी देखरेख के अभाव में ठप हो गया है। इसकी तारें प्रोजेक्टर से अलग हो चुकी है। वहीं दूसरी मंजिल पर लगी एलईडी भी दो साल से खराब पड़ी है।
मल्टीमीडिया गैलरी बनी शोपीस
दूसरी मंजिल पर बनी मल्टीमीडिया गैलरी संग्रहालय का मुख्य आकर्षक है, मगर मौजूदा स्थिति में यह गैलरी केवल शोपीस बनकर रह गई है। इस गैलरी का उद्घाटन 10 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने किया था। इस गैलरी में महाभारत युद्ध और गीता से संबंधित चलचित्रों को ध्वनि के साथ प्रस्तुत करने के लिए बनाया, मगर अब गैलरी में सिर्फ चित्र ही रह गए हैं। इससे निकलने वाला ध्वनि सिस्टम ठप हो चुका है। बिना आवाज के पर्यटक गैलरी को निहारे बिना ही आगे बढ़ जाते हैं।
संग्रहालय के 28 जगह से टूटे हैं शीशे
शीशे टूटने की वजह से संग्रहालय हवा महल बन चुका है। 28 जगह से संग्रहालय के शीशे टूटे हैं। इन टूटे शीशों को छिपाने के लिए कई जगह पर लकड़ी के दरवाजे फिट कर दिए गए हैं। वहीं शीशे टूटे होने के कारण कोई भी जीव-जंतु संग्रहालय में आसानी से प्रवेश कर सकता है, जिससे कोई भी हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरा शीशे टूटे होने के कारण संग्रहालय में धूल-मिट्टी जमने लगी है। दो साल बीतने के बाद भी शीशे स्थापित नहीं किए गए। वहीं संग्राहलय में लगे शीशे की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि शीशे टूटने की वजह सामने नहीं आ रही है।
जल्द होगा संग्रहालय का कायाकल्प : छाबड़ा
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि कोरोना काल के बाद से संग्रहालय में मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शीघ्र ही संग्रहालय की मरम्मत कराई जाएगी। वहीं शीशे की गुणवत्ता पर बताया कि संग्रहालय में टफन ग्लास लगाया है। इस बार टफन ग्लास की जगह सिक्योरिटी ग्लास लगाया जाएगा। वह टफन ग्लास की अपेक्षा अधिक मजबूत है।
विज्ञापन
यह संग्रहालय इन दिनों बदहाली का शिकार हो रहा है। न तो यहां तकनीकी स्टॉफ की कमी है न ही बजट का अभाव, फिर भी विभाग की लापरवाही से हालात बदतर बने हुए हैं। कोरोना काल के बाद यहां पर मरम्मत कार्य तक नहीं हो पाया है। धर्मनगरी में प्रतिदिन 800 से अधिक पर्यटक संग्रहालय का अवलोकन करने पहुंचते हैं। इनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल है, मगर संग्रहालय की दशा को देखकर अच्छी प्रतिक्रिया सामने नहीं आ रही है। अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय पर्यटकों की संख्या में अधिक इजाफा हो रहा है।
विज्ञापन
नहीं चल रहे एसी, गर्मी से परेशान पर्यटक
सोमवार दोपहर को श्रीकृष्ण संग्रहालय का जायजा लिया गया तो दूसरी और तीसरी मंजिल के एसी ठप मिले। कई जगह से एसी की तारें तक बाहर निकली हुईं थी। संग्रहालय का अवलोकन कर रहे गर्मी से परेशान पर्यटक बार-बार ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों से इसकी शिकायत करते दिखे। कई जगह दीवारों पर लगाए दिए चित्रों को फोकस करने वाली लाइटें भी खराब मिली।
विज्ञापन
पांच में से तीन कीओस्क मशीन खराब
संग्रहालय की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लगाई गई कीओस्क मशीनें पिछले काफी समय से बंद है। पहली और दूसरी मंजिल पर लगी पांच कीओस्क मशीनों में से तीन मशीनें बंद पड़ी हुई थी, जबकि दो की दशा भी ठीक नहीं है। इन दो मशीनों की टच भी सही ढंग से काम नहीं कर रही है। कोरोना के बाद से महाभारत की गाथा को प्रदर्शित करने वाला प्रोजेक्टर भी देखरेख के अभाव में ठप हो गया है। इसकी तारें प्रोजेक्टर से अलग हो चुकी है। वहीं दूसरी मंजिल पर लगी एलईडी भी दो साल से खराब पड़ी है।
मल्टीमीडिया गैलरी बनी शोपीस
दूसरी मंजिल पर बनी मल्टीमीडिया गैलरी संग्रहालय का मुख्य आकर्षक है, मगर मौजूदा स्थिति में यह गैलरी केवल शोपीस बनकर रह गई है। इस गैलरी का उद्घाटन 10 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने किया था। इस गैलरी में महाभारत युद्ध और गीता से संबंधित चलचित्रों को ध्वनि के साथ प्रस्तुत करने के लिए बनाया, मगर अब गैलरी में सिर्फ चित्र ही रह गए हैं। इससे निकलने वाला ध्वनि सिस्टम ठप हो चुका है। बिना आवाज के पर्यटक गैलरी को निहारे बिना ही आगे बढ़ जाते हैं।
संग्रहालय के 28 जगह से टूटे हैं शीशे
शीशे टूटने की वजह से संग्रहालय हवा महल बन चुका है। 28 जगह से संग्रहालय के शीशे टूटे हैं। इन टूटे शीशों को छिपाने के लिए कई जगह पर लकड़ी के दरवाजे फिट कर दिए गए हैं। वहीं शीशे टूटे होने के कारण कोई भी जीव-जंतु संग्रहालय में आसानी से प्रवेश कर सकता है, जिससे कोई भी हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरा शीशे टूटे होने के कारण संग्रहालय में धूल-मिट्टी जमने लगी है। दो साल बीतने के बाद भी शीशे स्थापित नहीं किए गए। वहीं संग्राहलय में लगे शीशे की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि शीशे टूटने की वजह सामने नहीं आ रही है।
जल्द होगा संग्रहालय का कायाकल्प : छाबड़ा
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि कोरोना काल के बाद से संग्रहालय में मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शीघ्र ही संग्रहालय की मरम्मत कराई जाएगी। वहीं शीशे की गुणवत्ता पर बताया कि संग्रहालय में टफन ग्लास लगाया है। इस बार टफन ग्लास की जगह सिक्योरिटी ग्लास लगाया जाएगा। वह टफन ग्लास की अपेक्षा अधिक मजबूत है।