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ब्रह्मसरोवर पर नजर आए भारत की सांस्कृतिक और शिल्प कला के रंग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:24 AM IST
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The colors of the culture and crafts increased, the enthusiasm of the festival increased
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर तट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में गुरुवार को देश की संस्कृति और शिल्पकला के रंग चटख हुए। विभिन्न लोक नृत्यों ओर गीत-संगीत से महोत्सव का उल्लास और बढ़ गया। दूरदराज से आए विभिन्न शिल्पकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।
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गीता महोत्सव में देश की सांस्कृतिक और शिल्पकला के रंग देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आनंदित कर रहे हैं। महोत्सव में शिल्प कला और संस्कृति के यादगार लम्हों को जीवन का यादगार क्षण बनाने के लिए हरियाणा ही नहीं, देशभर से लोग कुरुक्षेत्र की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक महोत्सव का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं। महोत्सव के शिल्प मेले में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला की ओर से विभिन्न राज्यों के शिल्पकार पहुंचे। इनमें से कई शिल्पकारों को राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय, संत कबीर दास सहित अन्य अवार्ड मिल चुके हैं। इन शिल्पकारों की शिल्पकला को निहारने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। महोत्सव में आए शिल्पकारों से बातचीत कर आकलन किया गया तो शिल्प और सरस मेले में अच्छा व्यवसाय हो चुका है। इन आंकड़ों से सहजता से आकलन किया जा सकता है कि यह महोत्सव शिल्पकारों के लिए आर्थिक रूप से भी एक विशेष महोत्सव के रूप में पहचान बना चुका है। शिल्पकला के साथ-साथ पर्यटकों को विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति से भी रूबरू होने का अवसर उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला की तरफ से दिया गया है। महोत्सव में हिमाचल प्रदेश, असम, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड सहित अन्य राज्यों के लोक नृत्यों ने पर्यटकों को अपने मोहपाश में बांधे रखा। इसके अलावा बाजीगर, बहुरूपिए और राजस्थान की कच्ची घोड़ी और हरियाणा की बीन बांसुरी और नगाड़ा पार्टी की थाप पर्यटकों को झूमने पर मजबूर कर रही है। इसलिए ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर भारत की संस्कृति और शिल्पकला का केंद्र बन चुके है और एक ही तट पर भारत की संस्कृति को देखा जा सकता है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुभव मेहता ने कहा कि ब्रह्मसरोवर पर सरस और शिल्प मेला 19 दिसंबर तक चलेगा।
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