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Kurukshetra News: मुख्यमंत्री ने 63 करोड़ 86 लाख की 26 परियोजनाओं का किया उद्घाटन व शिलान्यास
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पिहोवा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की सरस्वती नदी के पुन: उद्धार के लिए 63 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से 26 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें से 27 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से 16 परियोजनाओं का उद्घाटन और 36 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से 10 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री ने सरस्वती तीर्थ को विकसित करने के लिए एक मास्टर प्लान का भी शिलान्यास किया।
सीएम शुक्रवार को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से वसंत पंचमी के पावन पर्व पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश को पवित्र सरस्वती नदी सांस्कृतिक एकता के पवित्र बंधन में बांधती है। इसलिए प्रदेश सरकार नदियों को जोड़कर व सरस्वती सरोवरों और जलाश्यों का निर्माण करके सरस्वती को फिर से प्रवाहित करने का काम कर रही है। सरकार सरस्वती से जुड़े प्रमुख तीर्थों को सरस्वती तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, ओएसडी भारत भूषण भारती, बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, भाजपा के जिला अध्यक्ष तिजेंद्र गोल्डी, भाजपा नेता जयभगवान शर्मा डीडी, जिप चेयरमैन कवलजीत कौर के साथ मां सरस्वती मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहीं कार्यक्रम स्थल पर मां सरस्वती, नेता जी सुभाष चंद्र बोस व दीन बंधू सर छोटू राम को पुष्प अर्पित किए। उन्होंने कहा कि यह एक सौभाग्य है कि आज के दिन 23 जनवरी को कुरुक्षेत्र जिला भी करनाल से अलग होकर अपने अलग स्वरूप में आया। इस जिले को तीन गुना तेज गति के साथ विकसित किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती नदी की महत्ता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए सरस्वती को नर्मदा और साबरमती के जल के साथ जोड़कर पुनर्जीवित करने के प्रयास किए थे। उसी प्रकार हरियाणा में भी सरकार नदियों को जोड़कर व सरस्वती सरोवरों और जलाश्यों का निर्माण करके सरस्वती को फिर से प्रवाहित करने का काम कर रहे हैं। कार्यक्रम में सरस्वती बोर्ड के सोबिनियर का विमोचन भी किया। इस दौरान महंत बंसी पुरी, महंत शेरनाथ को भाजपा जिला अध्यक्ष तिजेंद्र गोल्डी, पूर्व जिला अध्यक्ष व संयोजक सुशील राणा, जिप चेयरमैन कंवलजीत कौर, नपा अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि, चेयरमैन तरुण सिंह वडैच, चेयरमैन बलजीत राणा व युधिष्ठिर बहल ने सम्मानित किया।
75 से अधिक संगठनों के साथ कर रहे काम, फिर मिलेगी सरस्वती को पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि सरस्वती नदी का पुन: उद्धार करके ऐतिहासिक पहचान को पुन: स्थापित करना है ताकि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकें कि वे उस भूमि के निवासी हैं, जहां मानव सभ्यता ने पहले कदम बढ़ाए थे। सरकार इसरो, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, ओएनजीसी, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और केंद्रीय भूजल बोर्ड जैसे 75 से अधिक प्रतिष्ठित अनुसंधान संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। इन संस्थाओं के वैज्ञानिक अध्ययनों ने यह साबित कर दिया कि सरस्वती कोई काल्पनिक नदी नहीं है अपितु आदिबद्री के गुजरात के कच्छ के रण तक प्राचीन नदी के चैनल आज भी मौजूद हैं। इसका भूजल 5 हजार से 14 हजार वर्ष पुराना है और इसका संबंध हिमाचल के ग्लेशियरों से है।
10 वर्षों में सरस्वती नदी के रास्तों पर किया 18 नए पुलों का निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है। सोमनदी पर एक बांध और सोम सरस्वती बैराज का निर्माण किया जा रहा है। सरकार ने पिछले 10 वर्षों में सरस्वती नदी के रास्तों पर 18 नए पुलों का निर्माण किया है। नदी के तट पर स्थित 111 विरासत स्थलों का जीर्णोद्धार किया गया। इसके साथ ही पिहोवा सरस्वती जंगल में सरस्वती वाटिका की स्थापना भी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सरस्वती से जुड़े प्रमुख तीर्थों को सरस्वती तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए। सरकार आदिबद्री से लेकर सिरसा तक के पूरे क्षेत्र को एक राष्ट्रीय पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित कर रही है। इसमें कुरुक्षेत्र, पिहोवा, कैथल, हिसार, राखीगढ़ी, फतेहबाद और सिरसा जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।
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सीएम शुक्रवार को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से वसंत पंचमी के पावन पर्व पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश को पवित्र सरस्वती नदी सांस्कृतिक एकता के पवित्र बंधन में बांधती है। इसलिए प्रदेश सरकार नदियों को जोड़कर व सरस्वती सरोवरों और जलाश्यों का निर्माण करके सरस्वती को फिर से प्रवाहित करने का काम कर रही है। सरकार सरस्वती से जुड़े प्रमुख तीर्थों को सरस्वती तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री ने गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, ओएसडी भारत भूषण भारती, बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, भाजपा के जिला अध्यक्ष तिजेंद्र गोल्डी, भाजपा नेता जयभगवान शर्मा डीडी, जिप चेयरमैन कवलजीत कौर के साथ मां सरस्वती मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहीं कार्यक्रम स्थल पर मां सरस्वती, नेता जी सुभाष चंद्र बोस व दीन बंधू सर छोटू राम को पुष्प अर्पित किए। उन्होंने कहा कि यह एक सौभाग्य है कि आज के दिन 23 जनवरी को कुरुक्षेत्र जिला भी करनाल से अलग होकर अपने अलग स्वरूप में आया। इस जिले को तीन गुना तेज गति के साथ विकसित किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती नदी की महत्ता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए सरस्वती को नर्मदा और साबरमती के जल के साथ जोड़कर पुनर्जीवित करने के प्रयास किए थे। उसी प्रकार हरियाणा में भी सरकार नदियों को जोड़कर व सरस्वती सरोवरों और जलाश्यों का निर्माण करके सरस्वती को फिर से प्रवाहित करने का काम कर रहे हैं। कार्यक्रम में सरस्वती बोर्ड के सोबिनियर का विमोचन भी किया। इस दौरान महंत बंसी पुरी, महंत शेरनाथ को भाजपा जिला अध्यक्ष तिजेंद्र गोल्डी, पूर्व जिला अध्यक्ष व संयोजक सुशील राणा, जिप चेयरमैन कंवलजीत कौर, नपा अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि, चेयरमैन तरुण सिंह वडैच, चेयरमैन बलजीत राणा व युधिष्ठिर बहल ने सम्मानित किया।
75 से अधिक संगठनों के साथ कर रहे काम, फिर मिलेगी सरस्वती को पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि सरस्वती नदी का पुन: उद्धार करके ऐतिहासिक पहचान को पुन: स्थापित करना है ताकि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकें कि वे उस भूमि के निवासी हैं, जहां मानव सभ्यता ने पहले कदम बढ़ाए थे। सरकार इसरो, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, ओएनजीसी, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और केंद्रीय भूजल बोर्ड जैसे 75 से अधिक प्रतिष्ठित अनुसंधान संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। इन संस्थाओं के वैज्ञानिक अध्ययनों ने यह साबित कर दिया कि सरस्वती कोई काल्पनिक नदी नहीं है अपितु आदिबद्री के गुजरात के कच्छ के रण तक प्राचीन नदी के चैनल आज भी मौजूद हैं। इसका भूजल 5 हजार से 14 हजार वर्ष पुराना है और इसका संबंध हिमाचल के ग्लेशियरों से है।
10 वर्षों में सरस्वती नदी के रास्तों पर किया 18 नए पुलों का निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है। सोमनदी पर एक बांध और सोम सरस्वती बैराज का निर्माण किया जा रहा है। सरकार ने पिछले 10 वर्षों में सरस्वती नदी के रास्तों पर 18 नए पुलों का निर्माण किया है। नदी के तट पर स्थित 111 विरासत स्थलों का जीर्णोद्धार किया गया। इसके साथ ही पिहोवा सरस्वती जंगल में सरस्वती वाटिका की स्थापना भी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सरस्वती से जुड़े प्रमुख तीर्थों को सरस्वती तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए। सरकार आदिबद्री से लेकर सिरसा तक के पूरे क्षेत्र को एक राष्ट्रीय पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित कर रही है। इसमें कुरुक्षेत्र, पिहोवा, कैथल, हिसार, राखीगढ़ी, फतेहबाद और सिरसा जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।