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Kurukshetra News: रखरखाव में अव्वल रहने वाले तीर्थों को प्रोत्साहित करेगी सरकार, मुख्यमंत्री ने किया एलान
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कुरुक्षेत्र। 48 कोस तीर्थ सम्मेलन में हिस्सा लेते तीर्थ समितियों के सदस्य। आयोजक
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में सोमवार को 48 कोस तीर्थ सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्यातिथि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि तीर्थ सम्मेलन में 48 कोस तीर्थों के दर्शन कर अभिभूत हूं। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष तीर्थों के रखरखाव में अव्वल रहने वाले तीन तीर्थों को प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि ब्रज की 84 कोसी यात्रा की तर्ज पर 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि स्थित तीर्थों की यात्रा शुरू की जाए। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र को भगवान श्रीकृष्ण जी की नगरी मथुरा और धार्मिक स्थल हरिद्वार से जोड़ने के लिए इन मार्गों पर ट्रेन चलाई गई है। केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ओर से स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत विभिन्न तीर्थों पर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। इस सर्किट के तहत 48 कोस की परिधि में स्थित 134 स्थानों का पर्यटन स्थलों के रूप में विकास होगा। मुख्यमंत्री ने 48 कोस में आने वाले तीर्थों की जानकारी देने वाली पुस्तक का भी विमोचन किया और तीर्थ समितियों के सदस्यों को आ रही समस्याओं को सुना और उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया।
स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि तीर्थों को विकसित करने में सरकार के साथ-साथ तीर्थ समितियों को भी आगे आने की जरूरत है। अपने-अपने गांव के तीर्थ को गौरव समझना चाहिए तभी तीर्थों का विकास संभव है। तीर्थ निगरानी कमेटी को हर पहलू पर मंथन कर तीर्थ के विकास को 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन के साथ-साथ सरकार के समक्ष रखना चाहिए। पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने भी संबोधित किया।
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आमजन तक पहुंची 48 कोस के तीर्थों की महिमा : उपेंद्र सिंघल
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने कहा कि 48 कोस में 367 में से 182 तीर्थों की पहचान कर विकसित किया जा रहा है। तीर्थों को विकसित करने के लिए सरकार की ओर से दी जा रही आर्थिक सहायता के साथ समितियों की ओर से भी प्रयास किया जा रहा है। मानद सचिव ने तीर्थों की विकासकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला और भावी योजनाओं को भी सबके समक्ष रखा।
तीर्थों में पानी निकासी की आईं सबसे अधिक समस्याएं
तीर्थ सम्मेलन में अधिकतर तीर्थों पर पानी निकासी की समस्या को दूर करने के लिए तीर्थ समिति सदस्यों ने मुख्यमंत्री से आह्वान किया। इसी के साथ 48 कोस तीर्थों के सभी गेट एक जैसे बनाने की मांग भी रखी। कई तीर्थों पर पानी का स्त्रोत न होने और कहीं ट्यूबवेल न होने की समस्या और कई मुख्य तीर्थों के विकास की ग्रांट जारी होने के बाद टेंडर प्रक्रिया लंबित होने जैसी समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। मुख्यमंत्री ने सभी का जल्द निवारण करने का आश्वासन दिया। इस दौरान तीर्थों को विकसित करने की योजना भी तैयार की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में स्थित लगभग 80 तीर्थों पर विकास कार्य चल रहे हैं। 80 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि से चार तीर्थ स्थलों-ब्रह्मसरोवर, ज्योतिसर तीर्थ, नरकातारी, सन्निहित सरोवर का विकास शामिल है।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि ब्रज की 84 कोसी यात्रा की तर्ज पर 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि स्थित तीर्थों की यात्रा शुरू की जाए। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र को भगवान श्रीकृष्ण जी की नगरी मथुरा और धार्मिक स्थल हरिद्वार से जोड़ने के लिए इन मार्गों पर ट्रेन चलाई गई है। केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ओर से स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत विभिन्न तीर्थों पर विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। इस सर्किट के तहत 48 कोस की परिधि में स्थित 134 स्थानों का पर्यटन स्थलों के रूप में विकास होगा। मुख्यमंत्री ने 48 कोस में आने वाले तीर्थों की जानकारी देने वाली पुस्तक का भी विमोचन किया और तीर्थ समितियों के सदस्यों को आ रही समस्याओं को सुना और उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया।
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स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि तीर्थों को विकसित करने में सरकार के साथ-साथ तीर्थ समितियों को भी आगे आने की जरूरत है। अपने-अपने गांव के तीर्थ को गौरव समझना चाहिए तभी तीर्थों का विकास संभव है। तीर्थ निगरानी कमेटी को हर पहलू पर मंथन कर तीर्थ के विकास को 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन के साथ-साथ सरकार के समक्ष रखना चाहिए। पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने भी संबोधित किया।
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आमजन तक पहुंची 48 कोस के तीर्थों की महिमा : उपेंद्र सिंघल
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने कहा कि 48 कोस में 367 में से 182 तीर्थों की पहचान कर विकसित किया जा रहा है। तीर्थों को विकसित करने के लिए सरकार की ओर से दी जा रही आर्थिक सहायता के साथ समितियों की ओर से भी प्रयास किया जा रहा है। मानद सचिव ने तीर्थों की विकासकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला और भावी योजनाओं को भी सबके समक्ष रखा।
तीर्थों में पानी निकासी की आईं सबसे अधिक समस्याएं
तीर्थ सम्मेलन में अधिकतर तीर्थों पर पानी निकासी की समस्या को दूर करने के लिए तीर्थ समिति सदस्यों ने मुख्यमंत्री से आह्वान किया। इसी के साथ 48 कोस तीर्थों के सभी गेट एक जैसे बनाने की मांग भी रखी। कई तीर्थों पर पानी का स्त्रोत न होने और कहीं ट्यूबवेल न होने की समस्या और कई मुख्य तीर्थों के विकास की ग्रांट जारी होने के बाद टेंडर प्रक्रिया लंबित होने जैसी समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। मुख्यमंत्री ने सभी का जल्द निवारण करने का आश्वासन दिया। इस दौरान तीर्थों को विकसित करने की योजना भी तैयार की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में स्थित लगभग 80 तीर्थों पर विकास कार्य चल रहे हैं। 80 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि से चार तीर्थ स्थलों-ब्रह्मसरोवर, ज्योतिसर तीर्थ, नरकातारी, सन्निहित सरोवर का विकास शामिल है।