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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव: कुरुक्षेत्र के कारीगर ने तैयार की साइकिल वाली चक्की, चलाकर अनाज भी पीसो और वजन भी घटाओ

Mon, 06 Dec 2021 09:20 PM IST
भूपेंद्र सिंह अजय जौली, संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
अजय जौली, संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 06 Dec 2021 09:20 PM IST
सार

इस चक्की से एक घंटे में साढ़े चार किलो आटा पीस सकते हैं। चक्की चलाने से कैलोरी बर्न भी होती है। यह साइकिल गीता महोत्सव में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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The artisan of Kurukshetra made a bicycle mill
आटा चक्की चलाकर देखता पर्यटक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

लोगों में बढ़ रहे मोटापे को लेकर चिंतित हरियाणा के कुरुक्षेत्र के एक कारीगर ने ऐसी चक्की बनाई है, जिसे चलाने से अनाज तो पिसेगा ही, साथ में मोटापा भी कम होगा। इस चक्की को साइकिल की तर्ज पर तैयार किया गया है। चक्की पर भी पैडल लगाए गए हैं। करीब एक घंटा साइकिल वाली चक्की को चलाकार चार से साढ़े चार किलो अनाज आसानी से पीसा जा सकता है।

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इतना ही नहीं चक्की में अनाज को मोटा पीसना है या बारीक, इसके लिए भी विकल्प दिया हुआ है। अनाज पीसने के साथ-साथ शरीर की कैलोरी भी बर्न होगी। इस चक्की की कीमत 17 हजार रुपये है। 
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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में तरह-तरह की आटा चक्की लेकर पहुंचे सुरेश कुमार ने बताया कि उसने सबसे पहले साइकिल वाली चक्की 2020 में बनाई थी। उनके घर पर हाथ से पिसाई करने वाली चक्की थी। उनकी मां कलादेवी इसी चक्की पर आटा पीसती थी। लगातार पिसाई करने के लिए बैठे रहने से उन्हें काफी परेशानी होती थी, तभी उसने सोचा की क्यों न ऐसी चक्की बनाई जाए जो हाथ नहीं पांव से चले।

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पांव से चक्की चलाने से शरीर को काफी फायदा भी होगा। तब उसने एक साइकिल खरीदी और उसे आधे हिस्से में काटकर आगे वाले हिस्से में एक चक्की फिट कर दी, लेकिन अनाज पीसने के लिए आगे पत्थर लगे होने के कारण वह काफी भारी चलती थी, जिससे चलाने वाला बहुत जल्दी थक जाता। ऐसे में उसने साइकिल में एक गियर बॉक्स डाल दिया, जिससे कि अनाज की पिसाई के समय पैडल आसानी से घूमने लगे। साइकिल वाली इस चक्की को हाथ से भी चलाया जा सकता है। 

 

चक्की में इस्तेमाल है मजबूत चट्टान का पत्थर

सुरेश ने बताया कि साइकिल वाली चक्की में पिसाई के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। वह पहाड़ों की मजबूत चट्टान का है। यह पत्थर इतनी आसानी से नहीं टूटता। साइकिल वाली चक्की सालों साल चलने वाली है। 

 

कई प्रकार की चक्कियां उपलब्ध

सुरेश कुमार ने बताया कि उसके पास और भी कई प्रकार की चक्कियां उपलब्ध हैं, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक, हाथ से चलने वाली और बिना गियर बॉक्स पैडल से चलने वाली साइकिल चक्की शामिल है। यह चक्कियां काम को आसान कर देती हैं।

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