{"_id":"69b475f3440cef57b6020d7f","slug":"the-accused-of-raping-a-minor-girl-was-sentenced-to-rigorous-imprisonment-for-life-and-fined-rs-250-lakh-kurukshetra-news-c-45-1-kur1007-151529-2026-03-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कठोर कारावास की सजा, 2.50 लाख जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कठोर कारावास की सजा, 2.50 लाख जुर्माना
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट बलात्कार एवं पॉक्सो एक्ट मामलों) की अदालत ने एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई है। कैथल जिले के भागल गांव निवासी दोषी विक्रम उर्फ विक्की को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कठोर कारावास के साथ दो लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामला 2 जून 2023 का है, जब थाना शहर पिहोवा क्षेत्र में एक मां ने पुलिस को शिकायत दी कि उनकी पांच वर्षीय बेटी सुबह करीब सात बजे घर से खेलने निकली थी लेकिन काफी देर तक नहीं लौटी। खोजबीन के दौरान पता चला कि पुलिस ने एक घायल बच्ची को लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल पहुंचाया है। बच्ची की मां थाने पहुंची, जहां फोटो देखकर उन्होंने अपनी बेटी की पहचान की। मेडिकल जांच में बच्ची के साथ किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से की गई गलत हरकत की पुष्टि हुई। इस आधार पर थाना शहर पिहोवा में अपहरण, गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाने, अपहरण कर दुष्कर्म करने और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस जांच में आरोपी विक्रम उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया गया और अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया। जांच पूरी होने के बाद चालान अदालत में पेश किया गया। लंबी सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक सबूत और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आईपीसी की अपहरण की धारा 363 के तहत पांच वर्ष कठोर कारावास, 50 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न चुकाने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। आईपीसी की गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाने की धारा 365 के तहत सात वर्ष कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना न चुकाने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा। दुष्कर्म की नीयत से अपहरण करने की धारा 366 के तहत 10 वर्ष कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना व जुर्माना न चुकाने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा। नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने पर पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कठोर कारावास व एक लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी जिसमें आजीवन कारावास प्रमुख रहेगा। जुर्माने की राशि कुल दो लाख 50 हजार रुपये है, जो पीड़िता के पुनर्वास या मुआवजे में उपयोगी साबित हो सकती है।
विज्ञापन
अपहरण कर दिया था वारदात को अंजाम
तीन साल पहले पिहोवा की एक कॉलोनी के तत्कालीन पार्षद ने 2 जून 2023 को पुलिस को सूचना दी कि कॉलोनी के सुनसान क्षेत्र में स्थित एक खंडहर में करीब पांच वर्षीय बच्ची बेसुध पड़ी है। उसके निजी अंग से खून बह रहा है। सूचना पर पिहोवा पुलिस मौके पर पहुंची थी और बच्ची को इलाज के लिए पिहोवा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो बच्ची बेसुध व लहूलुहान हालात में मिली। छानबीन में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर आरोपी विक्रम को गिरफ्तार किया था। फुटेज में आरोपी विक्रम उस बच्ची का हाथ पकड़ कर उसे लेकर जाता दिखा था। जांच में पता चला कि आरोपी बच्ची को खाने की चीज दिलाने के बहाने लेकर गया था।
परिवार को इंसाफ मिलने से अपराधों पर लगाम लगने की जगी उम्मीद : मैनपाल
जिला न्यायवादी मैनपाल ने कहा कि यह सजा मासूम बच्चियों की सुरक्षा और अपराधियों को कड़ी चेतावनी देने का संदेश है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की तेज कार्रवाई से न्याय मिला, जो पॉक्सो मामलों में समयबद्ध सुनवाई की अहमियत दर्शाता है। पीड़िता परिवार को इंसाफ मिलने से समाज में महिलाओं व बच्चों के प्रति अपराधों पर लगाम लगाने की उम्मीद जगी है।
विज्ञापन
मामला 2 जून 2023 का है, जब थाना शहर पिहोवा क्षेत्र में एक मां ने पुलिस को शिकायत दी कि उनकी पांच वर्षीय बेटी सुबह करीब सात बजे घर से खेलने निकली थी लेकिन काफी देर तक नहीं लौटी। खोजबीन के दौरान पता चला कि पुलिस ने एक घायल बच्ची को लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल पहुंचाया है। बच्ची की मां थाने पहुंची, जहां फोटो देखकर उन्होंने अपनी बेटी की पहचान की। मेडिकल जांच में बच्ची के साथ किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से की गई गलत हरकत की पुष्टि हुई। इस आधार पर थाना शहर पिहोवा में अपहरण, गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाने, अपहरण कर दुष्कर्म करने और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
विज्ञापन
पुलिस जांच में आरोपी विक्रम उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया गया और अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया। जांच पूरी होने के बाद चालान अदालत में पेश किया गया। लंबी सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक सबूत और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आईपीसी की अपहरण की धारा 363 के तहत पांच वर्ष कठोर कारावास, 50 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न चुकाने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। आईपीसी की गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाने की धारा 365 के तहत सात वर्ष कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना न चुकाने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा। दुष्कर्म की नीयत से अपहरण करने की धारा 366 के तहत 10 वर्ष कठोर कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना व जुर्माना न चुकाने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा। नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने पर पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कठोर कारावास व एक लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी जिसमें आजीवन कारावास प्रमुख रहेगा। जुर्माने की राशि कुल दो लाख 50 हजार रुपये है, जो पीड़िता के पुनर्वास या मुआवजे में उपयोगी साबित हो सकती है।
विज्ञापन
अपहरण कर दिया था वारदात को अंजाम
तीन साल पहले पिहोवा की एक कॉलोनी के तत्कालीन पार्षद ने 2 जून 2023 को पुलिस को सूचना दी कि कॉलोनी के सुनसान क्षेत्र में स्थित एक खंडहर में करीब पांच वर्षीय बच्ची बेसुध पड़ी है। उसके निजी अंग से खून बह रहा है। सूचना पर पिहोवा पुलिस मौके पर पहुंची थी और बच्ची को इलाज के लिए पिहोवा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो बच्ची बेसुध व लहूलुहान हालात में मिली। छानबीन में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर आरोपी विक्रम को गिरफ्तार किया था। फुटेज में आरोपी विक्रम उस बच्ची का हाथ पकड़ कर उसे लेकर जाता दिखा था। जांच में पता चला कि आरोपी बच्ची को खाने की चीज दिलाने के बहाने लेकर गया था।
परिवार को इंसाफ मिलने से अपराधों पर लगाम लगने की जगी उम्मीद : मैनपाल
जिला न्यायवादी मैनपाल ने कहा कि यह सजा मासूम बच्चियों की सुरक्षा और अपराधियों को कड़ी चेतावनी देने का संदेश है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की तेज कार्रवाई से न्याय मिला, जो पॉक्सो मामलों में समयबद्ध सुनवाई की अहमियत दर्शाता है। पीड़िता परिवार को इंसाफ मिलने से समाज में महिलाओं व बच्चों के प्रति अपराधों पर लगाम लगाने की उम्मीद जगी है।