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Kurukshetra News: सरकार की मनमानी के विरोध में शिक्षकों ने जताया रोष
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कुरुक्षेत्र। सरकार की मनमानी समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश के विभिन्न कॉलेज और यूनिवर्सिटी शिक्षक भारी संख्या में पंचकूला के सेक्टर पांच स्थित उच्चतर शिक्षा निदेशालय के आगे आक्रोश जताने के लिए पहुंचे। हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशनज (एचफुक्टो) के बैनर तले प्रदेश की स्टेट यूनिवर्सिटियों सरकारी एवं एडेड कॉलेजों के हजारों शिक्षकों शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए सड़क पर उतरे। इस प्रदर्शन में कुरुक्षेत्र से भी बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। पंचकुला रवाना होने से पहले केयू परिसर में भी शिक्षकों ने रोष जताया ।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के प्रधान डॉक्टर आनंद कुमार ने बताया कि उच्च शिक्षण संस्थाओं के वरिष्ठ शिक्षकों के साथ सरकार द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है। प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों में सरकार की मनमानी, अपमान और अपनी मांगों को लेकर नाफरमानी के कारण काफी रोष है। शिक्षा सदन के पीछे मैदान में सभी एडेड कॉलेज के शिक्षकों ने संघ के प्रधान डाक्टर विकास सिवाच के नेतृत्व में हरियाणा फेडरेशन ऑफ कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी टीचर्स आर्गेनाइजेशन के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन किया ।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सचिव डॉ जितेंद्र खटकड़ ने बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें हरियाणा सरकार ने लगभग चार वर्षों की देरी के बाद लागू की और वह भी यूजीसी के मापदंडों के अनुरूप नहीं की। उसमें काफी सारी विसंगतियां जानबूझकर सुनियोजित तरीके से छोड़ दी गई। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में शिक्षकों की एमफिल पीएचडी इनक्रिमेंट का लाभ वापस ले लिया गया, शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु यूजीसी के नियमों के अनुसार 65 वर्ष नहीं की गई। जब भी कोई वेतन आयोग लागू होता है तो तीन वर्ष की अवधि दी जाती है ताकि शिक्षक नई प्रणाली के अनुरूप अपनी सभी अर्हता पूरी कर लें, परंतु सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में ऐसा नहीं किया गया।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के प्रधान डॉक्टर आनंद कुमार ने बताया कि उच्च शिक्षण संस्थाओं के वरिष्ठ शिक्षकों के साथ सरकार द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है। प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों में सरकार की मनमानी, अपमान और अपनी मांगों को लेकर नाफरमानी के कारण काफी रोष है। शिक्षा सदन के पीछे मैदान में सभी एडेड कॉलेज के शिक्षकों ने संघ के प्रधान डाक्टर विकास सिवाच के नेतृत्व में हरियाणा फेडरेशन ऑफ कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी टीचर्स आर्गेनाइजेशन के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन किया ।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सचिव डॉ जितेंद्र खटकड़ ने बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें हरियाणा सरकार ने लगभग चार वर्षों की देरी के बाद लागू की और वह भी यूजीसी के मापदंडों के अनुरूप नहीं की। उसमें काफी सारी विसंगतियां जानबूझकर सुनियोजित तरीके से छोड़ दी गई। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में शिक्षकों की एमफिल पीएचडी इनक्रिमेंट का लाभ वापस ले लिया गया, शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु यूजीसी के नियमों के अनुसार 65 वर्ष नहीं की गई। जब भी कोई वेतन आयोग लागू होता है तो तीन वर्ष की अवधि दी जाती है ताकि शिक्षक नई प्रणाली के अनुरूप अपनी सभी अर्हता पूरी कर लें, परंतु सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में ऐसा नहीं किया गया।
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