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Kurukshetra News: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 15 दिवसीय रेजिन आर्ट प्रशिक्षण शुरू
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कुरुक्षेत्र। चहक फाउंडेशन ने नाबार्ड के सहयोग से गांव दयालपुर में 15 दिवसीय रेजिन आर्ट और सजावटी उत्पाद प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसका उद्देश्य 30 ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। गांव के सरपंच सुरेश ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसमें महिलाओं ने उत्साह से भाग लिया।
प्रशिक्षण में 30 ग्रामीण महिलाओं को रेजिन आर्ट और सजावटी उत्पाद बनाने का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। चहक फाउंडेशन के स्वयंसेवक कार्यक्रम के संचालन में सहयोग कर रहे हैं। मोनिका दुआ ने महिलाओं को रेजिन आर्ट की बारीकियां सिखाईं। इस कला से की-चेन, फोटो फ्रेम, सजावटी ट्रे, ज्वेलरी और नेम प्लेट जैसे आकर्षक उत्पाद बनाए जा सकते हैं। प्रशिक्षण में रेजिन मिक्सिंग, मोल्डिंग, डिजाइनिंग, फिनिशिंग और पैकेजिंग की तकनीकें शामिल हैं। महिलाएं यह कौशल सीखकर घर से ही छोटे स्तर पर अपना काम शुरू कर सकती हैं। तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजारों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन माध्यमों से बेचकर आमदनी अर्जित की जा सकती है।
महिलाओं को हुनरमंद बनाना प्राथमिकता
चहक फाउंडेशन के संस्थापक कंवर सिंह ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। उन्हें उचित प्रशिक्षण और अवसर देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है, जिससे वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे सकेंगी। फाउंडेशन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिलाओं को अपने हुनर को रोजगार और व्यवसाय में बदलने योग्य बनाना है। संस्था कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने इस पहल में सहयोग के लिए नाबार्ड का आभार जताते हुए महिलाओं से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।
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प्रशिक्षण में 30 ग्रामीण महिलाओं को रेजिन आर्ट और सजावटी उत्पाद बनाने का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। चहक फाउंडेशन के स्वयंसेवक कार्यक्रम के संचालन में सहयोग कर रहे हैं। मोनिका दुआ ने महिलाओं को रेजिन आर्ट की बारीकियां सिखाईं। इस कला से की-चेन, फोटो फ्रेम, सजावटी ट्रे, ज्वेलरी और नेम प्लेट जैसे आकर्षक उत्पाद बनाए जा सकते हैं। प्रशिक्षण में रेजिन मिक्सिंग, मोल्डिंग, डिजाइनिंग, फिनिशिंग और पैकेजिंग की तकनीकें शामिल हैं। महिलाएं यह कौशल सीखकर घर से ही छोटे स्तर पर अपना काम शुरू कर सकती हैं। तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजारों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन माध्यमों से बेचकर आमदनी अर्जित की जा सकती है।
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महिलाओं को हुनरमंद बनाना प्राथमिकता
चहक फाउंडेशन के संस्थापक कंवर सिंह ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। उन्हें उचित प्रशिक्षण और अवसर देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है, जिससे वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे सकेंगी। फाउंडेशन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिलाओं को अपने हुनर को रोजगार और व्यवसाय में बदलने योग्य बनाना है। संस्था कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने इस पहल में सहयोग के लिए नाबार्ड का आभार जताते हुए महिलाओं से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।
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