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एसवाईएल के किनारे से बाढ़ के खतरे की आहट
सादिक अली/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Thu, 30 Jun 2016 01:07 AM IST
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भाखड़ा नदी की एक तरफ की दीवार भी टूटी।
- फोटो : Amar Ujala
मंगलवार को हुई 15 एमएम बारिश से क्षेत्र में एक बार फिर से बाढ़ की संभावना सताने लगी है। नहर की जरजर होती हालत को देखकर इसका अंदाजा आसानी से लग जाता है। मात्र 15 एमएम की बारिश ने ही नहर की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए। अगर समय रहते इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो शहर में बाढ़ के हालात बन सकते है। हालांकि अधिकारी का कहना है कि नहर की निगरानी की जा रही है। खैर हालात कुछ और ही बया करती एक रिपोर्ट।
एसवाईएल नहर के चलते पंजाब और हरियाणा के बीच पानी विवाद चल ही रहा है। पंजाब ने इस नहर में पानी देना भी बंद कर दिया है। पंजाब से पानी नहीं मिलने के बाद भी यह नहर कुरुक्षेत्र, ज्योतिसर सहित कई क्षेत्रों के लिए खतरे का अलार्म बन गई है। दरअसल इस नहर में भाखड़ा नहर का पानी भी छोड़ा जा रहा है। बारिश होने के कारण इस नहर में पानी उफान पर है। मंगलवार को हुई बारिश के कारण इस नहर के किनारों पर दरार आ गई है। नहर के बेहद नजदीक कई जगहों पर बड़े बड़े गड्डे हो गए हैं, जिससे नहर टूटने का खतरा बढ़ गया है।
पहले भी तबाही मचा चुकी है नहर
बताया जाता है कि 2007-08 में भी एक बार यह नहर टूटी थी। जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया था। खेतों में फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। पानी आसपास के गांवों तक भी पहुंच गया था। इसके बाद जैसे तैसे तब पानी को रोका गया था। लेकिन 2010 में एक बार फिर नहर के किनारे टूटे थे और इस बार इस नहरी पानी ने भारी तबाही मचाई थी। नहर का निकला पानी खेतों की फसल उजाड़ के शांतिनगर, दीदार कॉलोनी, नरकतारी, ज्योतिसर, मुंडाखेड़ा के अलावा शहर की कई कॉलोनियों में घुस गया था। शांतिनगर, दीदार कॉलोनी और नरकतारी में मकानों मे दरारें तक आ गई थी।
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कई लोगों के सिर से छत तक छीन गई थी। लोगों का कीमती सामान बह गया था। बड़ी मुश्किल से प्रशासन ने लोगों की जान बचाई थी। किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा था। बताया जाता है कि इस बाढ़ ने लाखों रुपये का नुकसान किया था।
इस बार भी है खतरा
मंगलवार को हुई बारिश के बाद बाढ़ का खतरा इस बार भी डराने लगा है। खेतों में काम करने वाले किसानों का कहना है कि यदि इस बार नहर टूटी तो कई किसान बर्बाद हो जाएंगे। जगह जगह बड़ी बड़ी दरारें होने से नहर के कभी भी टूटने का खतरा बन गया है। यदि तेज बारिश हुई तो यह नहर टूट जाएगी और फिर इसके पानी को रोक पाना मुश्किल होगा।
हर दिन मॉनिटरिंग हो रही
हमें इस बात की जानकारी हैं। हर दिन यहां मॉनिटरिंग कराई जा रही है। 1 जुलाई से डे-नाइट वॉचिंग शुरू कराई जाएगी। यदि ऐसी कोई स्थिति बनती है तो उससे निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार है। यदि दरारें पड़ रही हैं तो उन्हें ठीक कराने की कवायद की जाएगी। राजेश चोपड़ा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग कुरुक्षेत्र
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एसवाईएल नहर के चलते पंजाब और हरियाणा के बीच पानी विवाद चल ही रहा है। पंजाब ने इस नहर में पानी देना भी बंद कर दिया है। पंजाब से पानी नहीं मिलने के बाद भी यह नहर कुरुक्षेत्र, ज्योतिसर सहित कई क्षेत्रों के लिए खतरे का अलार्म बन गई है। दरअसल इस नहर में भाखड़ा नहर का पानी भी छोड़ा जा रहा है। बारिश होने के कारण इस नहर में पानी उफान पर है। मंगलवार को हुई बारिश के कारण इस नहर के किनारों पर दरार आ गई है। नहर के बेहद नजदीक कई जगहों पर बड़े बड़े गड्डे हो गए हैं, जिससे नहर टूटने का खतरा बढ़ गया है।
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पहले भी तबाही मचा चुकी है नहर
बताया जाता है कि 2007-08 में भी एक बार यह नहर टूटी थी। जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया था। खेतों में फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। पानी आसपास के गांवों तक भी पहुंच गया था। इसके बाद जैसे तैसे तब पानी को रोका गया था। लेकिन 2010 में एक बार फिर नहर के किनारे टूटे थे और इस बार इस नहरी पानी ने भारी तबाही मचाई थी। नहर का निकला पानी खेतों की फसल उजाड़ के शांतिनगर, दीदार कॉलोनी, नरकतारी, ज्योतिसर, मुंडाखेड़ा के अलावा शहर की कई कॉलोनियों में घुस गया था। शांतिनगर, दीदार कॉलोनी और नरकतारी में मकानों मे दरारें तक आ गई थी।
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कई लोगों के सिर से छत तक छीन गई थी। लोगों का कीमती सामान बह गया था। बड़ी मुश्किल से प्रशासन ने लोगों की जान बचाई थी। किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा था। बताया जाता है कि इस बाढ़ ने लाखों रुपये का नुकसान किया था।
इस बार भी है खतरा
मंगलवार को हुई बारिश के बाद बाढ़ का खतरा इस बार भी डराने लगा है। खेतों में काम करने वाले किसानों का कहना है कि यदि इस बार नहर टूटी तो कई किसान बर्बाद हो जाएंगे। जगह जगह बड़ी बड़ी दरारें होने से नहर के कभी भी टूटने का खतरा बन गया है। यदि तेज बारिश हुई तो यह नहर टूट जाएगी और फिर इसके पानी को रोक पाना मुश्किल होगा।
हर दिन मॉनिटरिंग हो रही
हमें इस बात की जानकारी हैं। हर दिन यहां मॉनिटरिंग कराई जा रही है। 1 जुलाई से डे-नाइट वॉचिंग शुरू कराई जाएगी। यदि ऐसी कोई स्थिति बनती है तो उससे निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार है। यदि दरारें पड़ रही हैं तो उन्हें ठीक कराने की कवायद की जाएगी। राजेश चोपड़ा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग कुरुक्षेत्र