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सुरेंद्र ने मां को कांस्य पदक पहनाया तो मां ने बेटे को पहनाई सोने की चेन
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हॉकी के अर्जुन सुरेंद्र पालड़ ने सेक्टर-8 स्थित अपने घर ब्रदर्स विला पहुंचते ही जीता हुआ कांस्य पदक अपनी मां के गले में पहना दिया। मां ने भी पदक को चूम कर अपने बेटे को गले से लगा लिया। मां-बेटे के मिलन को देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। उसके बाद मां ने भी एक पल की देरी न करते हुए तुरंत सुरेंद्र के गले में सोने की एक चेन पहना दी।
मां नीलम ने कहा कि टोक्यो में बेटे द्वारा जीतकर लाए गए कांस्य पदक की चमक के आगे सोने की चेन की चमक फीकी है। उनका बेटा सुरेंद्र उनका खरा सोना है। उसने जो कांस्य पदक उन्हें गिफ्ट किया है वह अनमोल है। इसके बाद सुरेंद्र ने अपने सेक्टर-8 स्थित घर ब्रदर्स विला का रिबन काटकर उद्घाटन किया। इस दौरान ओलंपियन सुरेंद्र के दोस्त, साथी खिलाड़ी, रिश्तेदार और भाई बंधु ढोल की थाप पर नाचते रहे।
वहीं ब्रदर्स विला पर ओलंपिक के प्रतीक चिह्न और राष्ट्रीय ध्वज देखकर सुरेंद्र गदगद हो गए और उन्होंने अपने पिता मलखान के पांच छू कर आशीर्वाद लिया। सुबह से सुरेंद्र के घर पर उनके समर्थक, जान पहचान के लोग, रिश्तेदार और दोस्तों का आना जाना लगा हुआ था। सुरेंद्र घर पर शादी समारोह जैसे माहौल था। महिलाएं ढोलकी पर गीत गा रही थीं। रिश्तेदार नाच रहे थे, मगर सुरेंद्र की मां नीलम पूजा की थाली लेकर घर के मुख्य द्वार पर बेसब्री से सुरेंद्र के आने की प्रतीक्षा कर रही थीं। शाम 4 बजकर 47 मिनट पर जैसे ही सुरेंद्र ने घर के आंगन में कदम रखा, उसकी मां नीलम भावुक हो गईं। मां नीलम ने आरती उतारकर सुरेंद्र का स्वागत किया तथा मां ने परंपरा अनुसार सुरेंद्र का गृह प्रवेश कराया।
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सबसे पहले गुरु से की मुलाकात
कुरुक्षेत्र पहुंचने पर सुरेंद्र सबसे पहले अपने साथी खिलाड़ियों के साथ अपने गुरु साई प्रभारी गुरविंद्र सिंह से मिलने पहुंचे। दोपहर एक बजे ही सुरेंद्र ने साई परिसर में प्रवेश किया और डेढ घंटा अपने गुरु से बातचीत की।
पेरिस ओलंपिक पर गोल्ड पर निशाना
सुरेंद्र पालड़ ने कहा कि मैने तो मिट्टी के मैदान पर खेलकर ओलंपिक तक का सफर तय कर लिया, मगर नए खिलाड़ियों के लिए सरकार से एस्ट्रो टर्फ लगाने की मांग करता हूं, क्योंकि आगे के मुकाबला बेहद ही टफ है। मेरा टोक्यो ओलंपिक तक का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन मेरे गुरु के आशीर्वाद व सीख से मैने कांस्य पदक हासिल कर लिया। पेरिस ओलंपिक में उनका निशान गोल्ड होगा।
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मां नीलम ने कहा कि टोक्यो में बेटे द्वारा जीतकर लाए गए कांस्य पदक की चमक के आगे सोने की चेन की चमक फीकी है। उनका बेटा सुरेंद्र उनका खरा सोना है। उसने जो कांस्य पदक उन्हें गिफ्ट किया है वह अनमोल है। इसके बाद सुरेंद्र ने अपने सेक्टर-8 स्थित घर ब्रदर्स विला का रिबन काटकर उद्घाटन किया। इस दौरान ओलंपियन सुरेंद्र के दोस्त, साथी खिलाड़ी, रिश्तेदार और भाई बंधु ढोल की थाप पर नाचते रहे।
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वहीं ब्रदर्स विला पर ओलंपिक के प्रतीक चिह्न और राष्ट्रीय ध्वज देखकर सुरेंद्र गदगद हो गए और उन्होंने अपने पिता मलखान के पांच छू कर आशीर्वाद लिया। सुबह से सुरेंद्र के घर पर उनके समर्थक, जान पहचान के लोग, रिश्तेदार और दोस्तों का आना जाना लगा हुआ था। सुरेंद्र घर पर शादी समारोह जैसे माहौल था। महिलाएं ढोलकी पर गीत गा रही थीं। रिश्तेदार नाच रहे थे, मगर सुरेंद्र की मां नीलम पूजा की थाली लेकर घर के मुख्य द्वार पर बेसब्री से सुरेंद्र के आने की प्रतीक्षा कर रही थीं। शाम 4 बजकर 47 मिनट पर जैसे ही सुरेंद्र ने घर के आंगन में कदम रखा, उसकी मां नीलम भावुक हो गईं। मां नीलम ने आरती उतारकर सुरेंद्र का स्वागत किया तथा मां ने परंपरा अनुसार सुरेंद्र का गृह प्रवेश कराया।
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सबसे पहले गुरु से की मुलाकात
कुरुक्षेत्र पहुंचने पर सुरेंद्र सबसे पहले अपने साथी खिलाड़ियों के साथ अपने गुरु साई प्रभारी गुरविंद्र सिंह से मिलने पहुंचे। दोपहर एक बजे ही सुरेंद्र ने साई परिसर में प्रवेश किया और डेढ घंटा अपने गुरु से बातचीत की।
पेरिस ओलंपिक पर गोल्ड पर निशाना
सुरेंद्र पालड़ ने कहा कि मैने तो मिट्टी के मैदान पर खेलकर ओलंपिक तक का सफर तय कर लिया, मगर नए खिलाड़ियों के लिए सरकार से एस्ट्रो टर्फ लगाने की मांग करता हूं, क्योंकि आगे के मुकाबला बेहद ही टफ है। मेरा टोक्यो ओलंपिक तक का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन मेरे गुरु के आशीर्वाद व सीख से मैने कांस्य पदक हासिल कर लिया। पेरिस ओलंपिक में उनका निशान गोल्ड होगा।